Reiki के साथ अग्नि शक्ति मिलकर शरीर से सारी Negative Energy खत्म करती है
हम बता रहे हैं कि हमारी पांच तत्व की जो शक्तियां है, हमारी जो ऊर्जाएं है, हमारी जो ब्रह्मांड की शक्तियां है, पांच तत्व की उन्हें अगर हम रेकी ऊर्जा के साथ जोड़ देते हैं, तो हमें बहुत फायदे होते हैं। अब तक हम आपको तीन एनर्जी के बारे में बता चुके हैं, यह जो पंचत्व की शक्तियां है, वह भगवान की ऊर्जा के साथ मिली हुई है और भगवान के अक्षरों से निकली है। भा मतलब भूमि ग मतलब गगन व मतलब वायु आज हम आपको बताने के चौथे तत्व आ के बारे में आ मतलब अग्नि आ जैसे कि हम जानते हैं हमारा जो पूरा ब्रह्मांड है। इसी अग्नि के ऊपर निर्मित है और ये अग्नि का कोण केंद्र जो है हमारा सूरज है। सूरज की अग्नि जब पृथ्वी पर आती है। उसी से सारी चीजें ऊर्जावान होती है। उसी से फसल उगती है। उन्ही से प्राण ऊर्जा होती है।
एक दिव्य शक्ति प्रकाश शरीर में आ रहा है होता है इसका आभास
रेकी चैनल वाले इसी सूर्य की शक्ति को अग्नि की ऊर्जाओं को अपने अंदर लेके अपने शरीर की सारी नकारात्मक ऊर्जाओं को खत्म करते हैं। रेकी चैनल में आह्वान करते हैं अग्नि का, आंख का कि हे अग्नि देव हमारे ऊपर प्रकाशमान हो और हमारे शरीर के अंदर जो भी नकारात्मक ऊर्जाएं हैं बीमारियों के जो कीटाणु हैं जो हमारे अंदर शरीर में बसे हुए हैं उन्हें अपनी इस अग्नि में जला के समाप्त करो। आप हैरान हो जाएंगे। वही अग्नि एक दिव्य शक्तियों के साथ हमारे ऊपर प्रकाशवान होती है। रेकी के ऊर्जावान शक्तिशाली प्रतीक चिन्हों के साथ और हमारी शरीर के अंदर जो भी रोग दोष होते हैं उन्हें समाप्त करती है।
Reiki की शक्ति को आहवान करते हैं
जैसा कि हम जानत हैं सूरज की किरणें हमारे जीवन के लिए बहुत जरूरी है। पेड़ पौधों के लिए हर किसी के लिए इस अग्नि को हम अपने जीवन में बहुत अच्छी तरह उपयोग ला सकते हैं। अगर हम रेकी के प्रतीक चिन्हों को जानते हैं। क्योंकि रेकी में एक प्रतीक चिन्ह है जिससे हम कहीं भी कनेक्ट हो जाते हैं। किसी भी चीज से संबंध स्थापित कर लेते हैं। हम लोग अपनी शक्तियों से रेकी की ऊर्जाओं के साथ अग्नि से कनेक्ट होते हैं और प्रार्थना करते हैं कि अग्नि की शक्तियां हमारे ऊपर प्रकाशमान हो हमारे घर में या किसी भी सदस्य के ऊपर और वहां जो भी नेगेटिव ऊर्जा है वह किसी भी रूप में है उसे जला के समाप्त करें। आप समझ सकते हैं कि यह पंचत्व की शक्तियां हमारे लिए कितनी जरूरी है। हमारे ऋषि मुनि जो हमारे पूर्वज थे इन्हीं पंचतत्व की शक्तियों के साथ कुदरत की शक्तियों के साथ जुड़े हुए थे और उनके जीवन में बहुत खुशहाली थी। रोग दोष उनसे बहुत दूर थे और जीवन में बहुत कम समस्या थी।
