BJP सांसद ने क्यों बोला राहुल गांघी को जिन्ना का अवतार
गांधी परिवार और निशिकांत दुबे एक दूसरे पर हमलावर रहते ही हैं। लेकिन इस बार निशिकांत दुबे ने झारखंड मामले में राहुल गांधी की तुलना मोहम्मद अली जिन्ना से कर दी है। उन्होंने ये बोला कि वो जिन्ना के सही उत्तराधिकारी हैं और इसको लेकर के उन्होंने बोला कि पिछले जन्म में जिन्ना ही रहे होंगे। इस बार वो राहुल गांधी के रूप में पैदा हुए हैं। और इसको झारखंड के परिप्रेक्ष में बात कही गई है। जिस तरह से राहुल गांधी लगातार बात करते हैं चाहे वो संघ पर आक्रामक रहे हो या मुस्लिम लीग को वो सेकुलर ऑर्गेनाइजेशन बताते रहे हो। इस सब के अलावा हिंदुओं पर जिस तरह से हमला बोलते रहे हो, सनातन पर जिस तरह से वो छुपे ढंग से अटैक करते हो या कोई दूसरा कांग्रेस का कार्यकर्ता जब सनातन पर हमला करता है तो उसमें राहुल गांधी की चुप्पी रहती है। इसको लेकर के लगातार राहुल ना केवल आलोचना का शिकार रहते हैं बल्कि उन पर आक्रामक भी रहते हैं।राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वह चाहे बांग्लादेश के हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर चुप्पी हो और फिलिस्तीन के लिए लंबी बात बड़ी-बड़ी बात हो। तो ये ये सारी चीजें हैं जो होती रहती हैं और इसको लेकर के लगातार निशिकांत दुबे आक्रामक रहते हैं। विशेष रूप से राहुल गांधी पर। अब उन्होंने सीधे तौर पर राहुल गांधी को जिन्ना का अवतार बता दिया और जिन्ना का सबसे बड़ा प्रशंसक या सबसे बड़ा बता दिया। अब इसमें कुल मिलाकर यही है कि झारखंड में जिस तरह से विरोध प्रदर्शन छात्रों का चल रहा है। उस पर ना केवल राहुल गांधी ने चुप्पी साध रखी है। उनकी पार्टी ने चुप्पी साध रखी है बल्कि अब तक कोई वहां नहीं गया। सबसे बड़ा कारण यह है कि वहां पर कांग्रेस समर्थित झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार है और कहने के लिए सबसे बड़े नेता राहुल गांधी का उनकी पार्टी का दावा है। लेकिन छात्रों का मानना है और भारतीय जनता पार्टी का आरोप है कि वो झारखंड के मुख्यमंत्री को इस बात के लिए नहीं समझा पा रहे हैं कि इस मामले में जो छात्रों की डिमांड है उनको मांग लिया जाए। चाहे ईडी और सीबीआई से इंक्वायरी हो चाहे जो तीन परीक्षाओं को कैंसिल करने की बात हो। अब पेपर लीक को लेकर के आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है
आम आदमी भी फंसी हुई है पेपर लीक के मामले में
आम आदमी पार्टी भी अपना दांव खेलती हुई नजर आई और लगातार यह आरोप लगाती रही सरकार पर। विशेष रूप से जब जंतरमंतर पर सीजेपी का प्रोटेस्ट चल रहा था। कि सरकार जो है वह असवेदनशील है और वह जो है कुछ भी छात्रों के हित में नहीं करना चाहती है। लेकिन अब दांव उल्टा सा पड़ता हुआ लग रहा है। पंजाब का जो पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट है उसने यह कंफर्म कर दिया है कि पेपर लीक हुआ है। अब पेपर लीक हुआ है। उसको लेकर के एक जजमेंट आ गया है। जजमेंट में यह बताया गया है कि पंजाब और हरियाणा ने जो फार्मेसी ऑफिसर्स का रिक्रूटमेंट हुआ था जो फरीदक में पेपर लीक हुआ था उसको स्टे कर दिया है। अब स्टे करने से यह बात स्पष्ट हो गई कि वहां पर गड़बड़ियां हुई थी। अब इन सब गड़बड़ियों के बीच जो लंबी चौड़ी बात कर रहे थे विशेष रूप से सिसोदिया ने बोला था कि हम अपने शिक्षा मंत्री का इस्तीफा ले लेंगे। अगर कोई गड़बड़ी पाई गई लेकिन जब से सीजेपी के प्रोटेस्ट के बाद धर्मेंद्र प्रधान का त्यागपत्र हुआ है सारे लोग दिल्ली से बैठ के मौखिक तौर पर तो लंबी चौड़ी बात कर रहे हैं। ना तो कोई झारखंड गया है ना झारखंड के छात्रों के समर्थन में कोई बात किया है। जबकि वहां पर उनको बहुत ब्रूटिटी के साथ पीटा गया है। यहां पर पुलिस वालों पर हमला किया गया था। 120 पुलिस वाले घायल हुए थे। लेकिन फिर भी पुलिस वालों के का के ह्यूमन राइट, पुलिस वालों के लीगल राइट, पुलिस वालों के अधिकारों को इग्नोर करते हुए सिर्फ छात्रों की बात की गई थी और छात्र जो बैग में ईंट भर के ले आए थे। इस तरह की रिपोर्ट्स हैं और वो जो जिनके क्रिमिनल एंटीिसिडेंट्स हैं और जिनका परीक्षाओं से कोई लेना देना नहीं। अब ऐसे तो जो सीजेपी के नेता हैं या पूरी की पूरी नेता मंडली है उनमें से ज्यादातर लोगों को चाहे सौरभ दास हो चाहे अभिजीत दीप के हो इनका कोई लेना देना नहीं है कोई परीक्षा और सब ज्यादातर अब अभिजीत दीप के 32 साल के हैं जो बहुत सारे महत्वपूर्ण एग्जाम्स हैं उनकी ऐज पार कर चुके हैं वो अमेरिका में कोई कोर्स कर रहे थे तो ये है कुल मिलाकर के लेकिन उसको छात्र विरोध बता दिया गया और जो जेन्युइन छात्र प्रोटेस्ट है उसको कोई छात्र प्रोटेस्ट मानने के लिए नहीं तैयार है। समर्थन के लिए तैयार है। अब पंजाब में कोई नहीं बोल रहा है। कर्नाटक में कोई नहीं बोल रहा है। तेलंगाना में कोई नहीं बोल रहा है। तो ये सिलेक्टिविटी जो है ये एक्सपोज हो रही है और धीरे-धीरे यही मुश्किल बढ़ाएगी और जो दिल्ली में हो रहा है जो संसद में हो रहा है वो भी उसी तरफ इशारा करता है। वो भी वही बता रहा है कि ये सिलेक्टिविटी जो है वो कांग्रेस और बाकी विपक्षियों को मुश्किल में डालेगी।
हिमाचल में बढ़े पेट्रोल के दाम Congress क्यों है चुप
अब एक जो इंटरेस्टिंग मामला निकल कर के आया है वो यह जहां पर पहले से ही जो विपक्ष के शासित ज्यादातर प्रदेश जो हैं वहां पर बीजेपी शासित प्रदेशों की तुलना में पेट्रोलियम प्रोडक्ट 5 से ₹1 या ₹15 तक महंगे हैं। अब हिमाचल प्रदेश की सरकार ने 60 पैसा सेस लगा दिया है। अब वो 60 पैसा सेस क्या है? वो विधवा अनाथ सेस लगाया है कि इस सेस से इन लोगों को मदद की जाएगी। अब हिमाचल प्रदेश की सरकार या हिमाचल प्रदेश पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है और वहां क्राइसिस इस हद तक है कि उनके पास अपने जो कर्मचारी हैं उन कर्मचारियों को पैसा देने के लिए नहीं होता है फंड और कई कई बार सैलरी जो है वो डिले होती है सरकारी कर्मचारियों की। ये बड़ा अद्भुत मामला है। सामान्यत ऐसा नहीं होता है कि सरकारी कर्मचारियों की है लेकिन इसके सैलरी डिले हो लेकिन हिमाचल प्रदेश में यह होता है और लगातार होता है और इसी चक्कर में सरकार जो है वो कोशिश कर रही थी कि किसी तरह से फंड को ठीक दुरुस्त रखा जाए कि कम से कम ये जो बेसिक जो सरकारी जरूरते हैं वो पूरी हो सके। अब उसके पीछे कारण यह है कि जिस तरह से चुनावी वादे किए गए वो तो पूरे हुए ही नहीं। लेकिन और भी बहुत सारे ऐसे वादे थे जिसको पूरा करने में शायद सरकार के बहुत सारे पैसे खर्च हुए और रेवेन्यू जनरेट जिस तरह का होना चाहिए उस पर कोई सरकार की योजना नहीं थी। तब सरकार की कोई योजना नहीं थी तो यही सबसे बेहतर तरीका होता है कि सरकार पर घूम फिर करके बर्डन करो। वहां पर तोकांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी भी सक्रिय है। वहां पर लेफ्ट भी सक्रिय है। तो क्या वहां पर कोई प्रोटेस्ट करेगा कि नहीं करेगा? नहीं करेगा। तो ये भी सिलेक्टिविटी का एक और नमूना है।
PM Modi जितना हमला करोगे उतने ही जनता के बीच लोकप्रिय होंगे
अभी भूपेश बघेल जो है पूर्व छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की तरफ इशारा करते हुए एक बात कही और उसके बाद जो जनता थी उनसे रिपीट करने के लिए कहा कि नारा क्या था? 56 इंच का छोटा बंदर बाल नरेंद्र बाल नरेंद्र अब यह अपने आप में बहुत जिसको बोलते हैं कि खराब बात है।कि राहुल गांधी भी इसी तरह की बात करते रहे हैं कि वो कायर है, डरपोक है और भगोड़ा है और कंप्रोमाइज्ड है। इस तरह की बातें करते रहे हैं। तो छोटे नेता उनसे क्या सीखेंगे या ये कह लीजिए कि छोटे नेताओं को यह बोला जा रहा है कि आप इसी तरह से हमलावर हो। लेकिन इस इस तरह से प्रधानमंत्री पर हमला करने से कभी भी राहुल राहुल गांधी को या कांग्रेस को फायदा नहीं हुआ। अलबत्ता इसका नुकसान हुआ है और क्या लगातार ये सारी चीजें करके कांग्रेस या राहुल गांधी या उनके बाकी नेता भूपेश बघेल जैसे पवन खेड़ा जैसे सुप्रिया जैसी, हालांकि सुप्रिया से तो आजकल कहीं नजर नहीं आती हैं। अब उनके एक नेता को मतलब उनके साथ के ही एक व्यक्ति को पवन खेड़ा को राज्यसभा दे दिया गया। वो कहीं कंसीडरेशन में भी नहीं है, रेकनिंग में नहीं है। उसका कारण ये जो भी हो या ये कहिए कि जो उन्होंने एक बार कह दिया था कि शायद मेरी तपस्या में अभी कोई कमी रह गई। खैर शब्द का इस्तेमाल कीजिए। लेकिन उसका चुनावी फायदा क्या आपको मिल रहा है या नहीं मिल रहा है या आप उससे बेफिक्र हैं। यह भी एक बड़ी बात है। मुझे लगता है कि ये कांग्रेस सिर्फ प्रधानमंत्री पर हमला करने पर है। उसके नाले उसके फायदे नुकसान पर नहीं सोच रही।
