क्या Rahul Gandhi को अनुभवी नेताओं भरोसा नहीं रहा 

लगता है आने वाले समय में कांग्रेस से उनके अनुभवी और बुजुर्ग नेताओं की छुट्टी ही होने वाली है, जी हां यदि उन्हें महत्वपूर्ण पद नहीं मिले तो अपने आप ही उन्हें साइड होने के संदेश मिलना स्वाभाविक है, पता चला है कि राहुल गांधी ने AICC यानी all india congress commette के सचिवों के चयन में युवा नेताओं को आगे लाने की कवायद शुरू कर दी है, हां अब युवा से मतलब 50 साल से उपर ही हैं क्योंकि राहुल गाधी को भी कांग्रेस में युवा ही कहा जाता है और वो 56 पार कर चुके हैं, खैर पता चला है कि AICC सचिवों की नियुक्ति के लिए congress ने 100 से ज्यादा संभावित नेताओं की सूची तैयार की है और नेताओं के इंटरव्यू की शुरूआत हो चुकी है और इसकी प्रक्रिया कई चरणों में होगी। इसी कड़ी में शनिवार को ही पार्टी ने छह राज्यों के प्रभारियों में बड़ा फेरबदल किया। सचिन पायलट को पंजाब, भूपेश बघेल को असम और रणदीप सिंह सुरजेवाला को गुजरात का प्रभारी बनाया गया। इन सभी को कांग्रेस में युवा फेस ही माना जाता है। इनमें सबसे अहम सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी सौपना है क्योंकि पंजाब में कांग्रेस के बीच चल रही गुटबाजी को रोकना और चुनाव की तैयारी करना पायलेट के सामने बड़ी चुनौती है।

PM पद का दावेदार राहुल गांधी को कौन पिछाड़ रहा रेस में-Congress क्यों परेशान 

सबको पता है कि तमिलनाडु के सीएम विजय थलपति की सरकार कांग्रेस के सहयोग से चल रही है, इसके अलावा इंडिया गठबंधन के कईं दल भी उन्हें सरकार चलाने में मदद कर रहे हैं पर विजय को गद्दी संभाले 3 महीने हो गए हैं और साफ दिख रहा है कि वो खुद इंडिया गठबंधन से दूरी बनाकर चल रहे हैं और अभी तक कहीं भी इस बात का चर्चा नहीं कि की वो इंडिया गठबंधन का पार्ट हैं या उसमें शामिल होना चाहते हैं, और जब हाल ही में विजय की पार्टी टीवीके के नेताओं और मंत्रियों ने सीएम विजय फॉर पीएम वाला कैंपेन शुरू कर दिया तो उसकी और कांग्रेस की दूरियां और बढ़ गई, कांग्रेस के कईं नेताओं ने इसपर खुलकर नाराजगी जाहिर कर दी, विजय को लेकर तमिलनाडू के लोग कोई सपना ना पाले इसके लिए बाकायदा तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मणिकम टैगोर को बार-बार यह कह रहे हैं कि 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए उनकी पार्टी की पसंद राहुल गांधी ही हैं। फिर कईं और नेताओं के साथ कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी कह दिया कि किसी को भी ऐसी कोई गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए। राहुल गांधी ही 2029 में इंडिया गठबंधन का चेहरा होंगे।

 

विजय थलपति लोगों में काफी लोकप्रिय पर अब बना रहे दिलों में जगह 

लेकिन सवाल यह पैदा हो रहा है कि कांग्रेस को अचानक विजय से इतना डर क्यों लगने लगा, क्या उन्हें दिख रहा है कि विजय के सामने राहुल गांधी का स्टारडम खत्म हो रहा है या वो कभी था ही नहीं क्योंकि तमिलनाडू की जनता तक ने pm के लिए विजय को जितने वोट दिए , उतने वोट राहुल गांधी को नहीं दिए, और बड़ी बात ये है कि विजय की लोकप्रियता और स्टारडम दूसरे राज्यों में भी मिसाल बन सकता है क्योंकि जन हित में विजय कईं योजनाएं सामने लाए हैं , वैसे पहले से ही फिल्म स्टार होने के कारण विजय थलपति लोगों में काफी लोकप्रिय थे, लेकिन जब से उनकी सरकार बनी हैं वो उन्होंने लोगों के बीच जाकर उनकी समस्या सुनने और दूर करने का काम शुरू किया है , उनकी योजनाएं लोगों की भलाई के लिए कईं काम कर रही हैं तो माना जा रहा है कि विजय धीरे-धीरे लोगों के दिल में अपनी जगह बना रहे हैं और उनकी लोकप्रियता राज्य की सीमा तोड़कर दूसरे राज्य में भी पहुंच रही है, यही नहीं विजय को और दल के साथ मिलकर सरकार चलाने में भी कोई ज्यादा परेशानी नहीं हो रही, वो सबको साथ लेकर चलने की कला में भी माहिर लगते हैं और यही कारण है कि उन्होंने आगे बढकर अपनी सरकार को समर्थन करने वाली पार्टियों की मीटिंग 9 सितंबर को बुलाई है। इस समय तमिलनाडु विधानसभा में congress 5 विधायकों के साथ है , वहीं VCK के 2, IUML के 2 समेत अन्य समर्थक दल भी मीटिंग में शामिल होंगे। वाम दल के 4 विधायक सरकार को सपोर्ट कर रहे हैं।

Congress को सबसे ज्यादा परेशान कर रही विजय थलपति की खूबियां 

और विजय की यही सब खूबियां कांग्रेस को सबसे ज्यादा परेशान कर रही है क्योंकि पहले से ही राहुल गांधी का स्टारडम विजय के सामने कम आंका जाता है और अब जब उनकी लोकप्रियता, सबको साथ लेने की क्षमता, जनता के हित में काम करने की आदत और राज्यों में पहुंच रही है तो pm पद के दावेदार के रूप में जनता उन्हें राहुल गांधी की बजाय देखना पसंद करेगी आसानी से