कांग्रेस 200 सीट की मांग -Infrastructure कोई नहीं
कांग्रेस के उत्तर प्रदेश के नए इंचार्ज बनाए गए हैं राजनपाल गौतम उनके इस दावे ने कि कांग्रेस को आधी सीटों पर चुनाव लड़ने दिया जाना चाहिए। इसको लेकर के बवाल मच गया है। विशेष रूप से समाजवादी पार्टी उनको इतनी सीट क्यों देगी? जब पिछले चुनाव में उनके पास सिर्फ दो सीटें थी जो जीत करके आए थे। विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में भी जो बेहतर परफॉर्मेंस है वह समाजवादी पार्टी का है। निश्चित तौर पर छह सीटें समाजवादी पार्टी कांग्रेस भी जीत करके आई है। लेकिन क्या सिर्फ इस क्राइटेरिया से 403 में से 200 सीटें कांग्रेस को दी जानी चाहिए। इसको लेकर के समाजवादी पार्टी हालांकि बहुत फूंक-फूंक करके कदम रख रही है और यह कहने की कोशिश कर रही है कि इंडिया अलायंस भारतीय जनता पार्टी को मिलकर के चुनाव हराएगा और यह उसी स्टैंड पर कायम है। इसलिए बहुत तेजी से तो रिएक्ट नहीं कर रहे हैं। लेकिन यह दबी जुबान में ज़रूर कह रहे हैं कि कांग्रेस को यह बताना होगा कि वह कौन-कौन सी सीटें ऐसी हैं जीत सकती है और किन कारणों से जीत सकती है। क्या फ़ैक्टर्स हैं और उनके संगठन की स्थिति क्या है। इसलिए कि कांग्रेस को बहुत सारी जगहों पर अपने संगठन से कोई मदद नहीं मिलती है। एक बात दूसरी बात उनका संगठन बचा नहीं है और उनको परजीवी की तरह से दूसरे राजनीतिक दलों को की मदद लेनी पड़ती है और अभी के दृष्ट अभी के परिपेक्ष में ये समाजवादी पार्टी है जिनके साथ उनका अलायंस है तो जो 2024 में छह सीटें जीती हैं उनमें मुसलमान मतदाताओं की भूमिका रही है और समाजवादी पार्टी के साथ अलायंस के कारण उनको मिला है। लेकिन उसमें कांग्रेस के इमरान मसूद सीधे तौर पर मुस्लिम डोमिनेटेड कॉन्स्टिट्यूएंसी से लड़े हैं। सोनिया रायबरेली और अमेठी दो ऐसी हालत है बाकी और इलाकों में ब्राह्मणों कांग्रेस को समर्थन मिला था। तो इन परिस्थिति में क्या 200 सीटें कांग्रेस को मिलेंगी और 200 सीटें जो जिस पार्टी के पास दो सीटें विधानसभा में हैं, वह 200 सीटें लड़ेगी क्या उसके पास उसका इंफ्रास्ट्रक्चर है? सपोर्ट सिस्टम है, सपोर्ट बेस है, कार्यकर्ता हैं। कैंडिडेट्स ऐसे मिल पाएंगे जो जीतने की तो बात छोड़ दीजिए। अच्छी फाइट दे पाएंगे। ये स्थिति है। इन सब परिस्थिति को देखने हुए बहुत विस्तृत तरीके से समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस से पोलाइटली बहुत सारे डिटेल मांगे हैं। उसके बाद ही इस पर फैसला होगा और अंतिम फैसला समाजवादी पार्टी की तरफ से ही आएगा कि उनको कितनी सीटें मिलेगी। लेकिन 200 तो मुश्किल का ही सबब है।
Mamata ने किए बहुत अनर्थ सब करने होंगे ठीक
दूसरा जो महत्वपूर्ण मसला है वो यह तृणमूल कांग्रेस ने 77 ओबीसी की एक लिस्ट बनाई थी। बहुत आननफानन बनाई थी जिसको लेकर के अदालत तक लोग गए थे और अदालत ने उसको उस पर रोक लगा दी थी। अब जो 77 लोगों की इसमें ज्यादातर ज्यादातर तो क्या सभी मुस्लिम जातियां शामिल है। मतलब सभी कुल मिलाकर के पूरी की पूरी मुस्लिम कम्युनिटी को इस लिस्ट के माध्यम से ओबीसी की कैटेगरी में डाल दिया गया था। जिसको हाई कोर्ट ने रोक लगा दी रोक लगा दी थी। अब इस इस पूरी की पूरी सूची को जो नई सरकार बनी है उस नई सरकार ने बिल पास करके इस पूरी की पूरी सूची को हटा दिया है। अब इसका जो दो अमेंडमेंट जून 26 में पास किए अभी कल पास किए वो इनको ओबीसी का दर्जा देने से मना कर दिया। लेकिन ये 2010 से 12 के बीच में ये लिस्ट पास की गई थी। जिसको कोलकाता हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में स्वीकार करने से मना कर दिया था। इसके अलावा ओबीसी का जो रिजर्वेशन था वो घटा करके 17 से 7% रिवाइज कर दिया है। अब ये जो पहले सरकार ने 2010 में जो है 66 जातियों को ओबीसी कैटेगरी में रखा था, सरकार ने उस पर कोई बदलाव नहीं किया है। यह कुल मिलाकर के इसके अलावा जो एक और मामला हुआ है कि इस मामले में तृणमूल कांग्रेस तब की तृणमूल कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट में गई थी जिसको अभी की सरकार ने विथड्रॉ कर लिया है। अपील को विथड्रॉ कर लिया है। तृणमूल कांग्रेस की सरकार को जिसके कारण जो सुप्रीम जो हाई कोर्ट का जो वर्डिक्ट है वही प्रवेल करेगा। अब कुल मिलाकर के स्थिति क्या है? स्थिति ये है कि मुसलमानों को आरक्षण देने के लिए बैक डोर से सभीमुसलमानों को ओबीसी कैटेगरी में डाल दिया था। और इसको लेकर के लोग ने विरोध किया और यह आननफानन किया गया। यह भी नहीं बताया गया किस कौन सी कमेटी बनी थी। उस कमेटी में सदस्य कौन थे? किन-किन लोगों ने यह डिसाइड किया और क्या इनपुट्स मांगे गए और किस आधार पर यह कोई नहीं था। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने इसको हाई कोर्ट ने इसको स्टक डाउन कर दिया गया था। यह आर्बिट्रेरी था, एपीजमेंट का एक तरीका था जिसको शुभेंदू हिंदू सरकार ने खत्म कर दिया है।
