टाइटेनिक डूबते समय मची चीख-पुकार , डर, ठंडे पानी में डूबते लोग -सब feel कराता यह अनोखा Museum

टाइटेनिक मूवी सब ने देखी है और सब जानते हैं कि 1912 में टाइटेनिक जो कि एक ड्रीमशिप था एक आइसबर्ग से टकरा के डूब गया। जिसके चलते 2000 ज्यादा लोगों की मृत्यु हो गई। लेकिन आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि उस दुर्धटना को जीवित करने के लिए एक म्यूजिम बनाया गया है। पेज फर्च टेनिस अमेरिका में एक ऐसा ही म्यूजियम बनाया गया है जो टाइटेनिक डूबने की रात को, उसमें सवार लोगों के उसी असली दर्द को डूबते हुए उनके अहसास को , उस भयानक रात को दर्शाता है। इस म्यूजियम के अंदर जाने पर उसी रात के ठंडे पानी का यानी माइनस डिग्री का पानी जिसमें तमाम लोगों की जान चली गई, उसका अहसास होता है। अमेरिका में मौजूद पिजन फर्च टेनिस में दुनिया का सबसे बड़ा टाइटेनिक संग्रहालय है। इस म्यूजियम को बनाना आसान नहीं था, और इसमें जाकर यहां टाइटेनिक के काम को अनुभव करना इसे अंजाम में लाना कोई आसान काम नहीं है। टाइटेनिक जहाज 28 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहा होता है और आइसबर्ग दिखने के समय उसकी दूरी सिर्फ 400 मीटर रह जाती है। इतने विशाल जहाज को नियंत्रित करना आसान नहीं होता। आपके पास प्रतिक्रिया देने और जहाज को मोड़ने के लिए बेहद कम समय बचता है। लेकिन इससे भी ज्यादा मुश्किल चुनौती आगे है। अगर कोई व्यक्ति अपने हाथ को समुद्र के पानी के बराबर तापमान वाले पानी में तय समय तक डुबो कर रखे तो वह कई लाख डॉलर भी जीत सकता है। पानी का तापमान -2 डिग्री तक कम होता है। इसलिए ज्यादातर लोग एक मिनट भी इसे नहीं सहन कर पाते। इसके अलावा इस म्यूजियम में एक खास चुनौती भी है जिसमें राइडर खुद जहाज के झुकने का अनुभव कर
सकते हैं। इसमें टाइटेनिक के डूबने के दौरान डेथ से लगातार झुकने की प्रक्रिया को बिल्कुल उसी तरह दोहराया जाता है। आप अपनी आंखों से सामने समुद्र का पानी धीरे-धीरे जहाज के अंदर भरते हुए देखते हैं और उस समय अपनी आंखों के सामने समुद्र का पानी धीरे-धीरे जहाज के अंदर भरते हुए देखते हैं और उस समय यात्रियों की बेबुसी और आखरी पलों पर अनुभव करते हैं। यहां तक कि उस समय यात्रियों ने जो भी दृश्य अनुभव किया, देखा था, उसे भी पूरी तरह से इस म्यूजिम में दर्शाया गया है। इस म्यूजिम में जाने के बाद ऐसा लगता है कि आप एक सदी पीछे पहुंचकर , उस रात में पहुंच गए हों , जब टाइटेनिक डूबा था।

Road पर बनी सफेद और पीली लाइनें इतनी Right और Perfect कैसे

 

क्या कभी आपने सोचा है कि रोड पर बनी सफेद और पीली लाइनें इतनी राइट और परफेक्ट कैसे दिखती हैं? सच बताऊं तो यह काम हाथ से करना बिल्कुल मुमकिन नहीं है। इसके लिए एक खास रोड मार्किंग मशीन का इस्तेमाल होता है , जिसमें गर्म थर्मोप्लास्टिक पेंट भरा जाता है। यह पेंट खास होता है क्योंकि इसमें मिलाए जाते हैं ग्लास बीड्स यानी छोटे-छोटे कांच के दाने। जब मशीन यह पेंट सड़क पर डालती है तो उसके ऊपर से यह ग्लास बीट्स चिपक जाते हैं। नतीजा दिन में लाइन साफ-साफ सफेद दिखती है और रात को गाड़ियों की लाइट पड़ते ही यह ग्लास बीट की वजह से चमक पड़ती है। शायद ही आपको मालूम हो कि सड़क पर जो डॉटेड निशान होते हैं उन्हें पहले से ही नापा और मार्क किया जाता है ताकि मशीन एकदम सीधी और सटीक लाइन खींचे। इसलिए ड्राइव करते समय सड़क पर लाइन एकदम
परफेक्ट नेविगेशन में मदद करती हैं।

 

नाटक करने में माहिर ये अनोखा पक्षी

किल डेयर बर्ड , एक ऐसा पक्षी , जो एक्टिंग में शायद हॉलीवुड को भी पीछे छोड़ दे। क्योंकि जैसे ही इसे कोई शिकारी जानवर या इंसान दिखाई देता है, तो यह वैसे ही अपने टूटे पंखों का नाटक करने लगती है जिससे लगे कि इसे कोई चोट लगी है। फिर जैसे-जैसे आप इसके पास जाएंगे यह थोड़ी-थोड़ी दूर आगे बढ़ती चली जाएगी। और जैसे ही आप इसका थोड़ा और पीछा करेंगे तो ये अचानक से उड जाएगी। लेकिन क्यों? यह इतनी समझदार होती है और ऐसा करतब करके नाटक दिखाकर ये शिकारियों को अपने घोंसले से दूर ले जाती है ताकी इसके बच्चे सुरक्षित रह सकें।

दुनिया का अनोखा हरीभरी चट्टानों, और नदियों के बीच से गुजरता हुआ एक ब्रिज

दुनिया का सबसे अनोखा शानदार ब्रिज , जिस पर गाड़ियां चलती हैं तो ऐसा लगता है जैसे गाड़ियां किसी ब्रिज पर नहीं चल रही बल्कि पानी पर तैर रही हैं। इस ब्रिज का नाम सिज़गोन फ्लोटिंग ब्रिज है जो चीन में मौजूद है। हरीभरी चट्टानों, और नदियों के बीच से गुजरते हुए इस ब्रिज को सपनों का पुल भी कहा जाता है। 1460 फीट लंबा और सिर्फ 16 फीट चौड़े लंबे इस ब्रिज को एक खास तकनीक से डिजाइन किया गया है। क्योंकि जब इस पुल को 20 कि.मी. की रफ्तार से पार किया जाता है तो इस पुल पर एक लहर बनने लगती है और उसी लहरों पर गाड़ियां उसके साथ चलने लगती है जो कि एक अलग ही रोमांचक अनुभव कराती हैं।

बायोटिक मछली जो लगे असली मछली जैसी

चीन ने पर्यावरण की दिशा में एक अनूठा कदम उठाया है। यहां की युवाहान यूनिवर्सिटी ने 53 सें.मी. लंबी एक खास किस्म की बायोटिक मछली तैयार की है जो बिल्कुल असली मछली की तरह तैरती है। जिसका एक खास काम होता है यह पानी की क्वालिटी को जांचती है। पानी में मौजूद प्रदूषकों का पता लगाती है और एक कंप्लीट डाटा इकट्ठा करती है। इस टेक्नोलॉजी की मदद से यॉक नदी की निगरानी की जा रही है ताकि जल प्रदूषण को रोका जा सके और जलीय जीवन को सुरक्षित रखा जा सके।