Dr Mohsin Wali

शिशुओं के नर्म -मुलायम कंबल दे रहे उन्हें कईं बीमारियों— संभल जाइए 

गुड लुकिंग बढ़िया-बढ़िया ट्राउज़र्स, पजामे, लेगिंग्स और यहां तक के स्पोर्ट्स ब्रा जिम में भी देखने को मिल गई। तो यह सिंथेटिक फाइबर जो है ना यह बदन के लिए जहर है। इवन बनियान तक में सिंथेटिक फाइबर मौजूद है और वो माइक्रोप्लास्टिक हमको मुफ्त में दे रहा है। स्किन से कांटेक्ट है। माइक्रोप्लास्टिक रिलीज होती है। माइक्रोप्लास्टिक की कितनी भी क्वांटिटी हो कम से कम वह भी बदन के लिए हानिकारक है। माइक्रोप्लास्टिक उतना ही हानिकारक है जितना टेफॉन हानिकारक है, माइक्रोप्लास्टिक उतना ही हानिकारक है जितने पेट्रोलियम प्रोडक्ट हानिकारक है। माइक्रोप्लास्टिक एक ऐसा पोइजन है जिसकी हाफ लाइफ नहीं होती फॉर एवर पोइजन है। छोटे बच्चे को पैदा होते ही जिस फ्लफी रूएं वाले कंबल में लपेट के रखते हैं। बहुत अच्छे-अच्छे लाइट कलर के, पिंक कलर के, लाइट ब्लू कलर के वह बच्चों के कंबल में भी सिंथेटिक माइक्रोफाइब्रिल्स फाइब्रिल्स हैं और वो छोटे बच्चे की स्किन के थ्रू अब्सॉर्ब हो जाते हैं। तो माइक्रोप्लास्टिक आज का सबसे बड़ा हमारा दुश्मन अनअवॉयडेबल दुश्मन बन चुका है। जितना हो सके ढीले कपड़े पहने। कॉटन कपड़े पहने बच्चे को वही पुराना निहलचा जो बच्चे का होता था हाथ का सिला हुआ, मां का सिला हुआ, लट्ठे के कपड़े का सूती कॉटन कपड़े पहनिए। सिंथेटिक कपड़ों को खत्म कर दीजिए। पहनना बंद। पहनने ऊपर से पहन लीजिए। अंडर कॉटन पहनिए। सब चीज कॉटन की पहनिए। शौक के लिए कुछ पहनना है दिखावे के लिए तो ऊपर पहन लीजिए। इसके नुकसान – लड़कियों में प्रीकशियस प्रॉबर्टी हो रही है। ब्रेस्ट बड़े हो रहे हैं। 11 साल की लड़कियों के पीरियड्स आ रहे हैं। 11 साल में कभी-कभी periods प्रोलोंग हो रहा है। पीसीओडी हो रहा है। बाल निकल रहे हैं। फीमेल्स के लिए यह फर्टिलिटी डिजास्टर है। ओवरी में पाया गया है माइक्रोप्लास्टिक, टेस्टिस में पाया गया है जिससे लड़कों में लैक ऑफ लबिडो प्रीकशस लैक ऑफ स्पर्म काउंट रिडक्शन स्पर्म काउंट इरेक्टाइल डिस्फंक्शन एंड लॉयक ऑफ लबिडो की वजह से डिप्रेशन अलदगी और मेरिटल टर्मिनेशन तक आ जाता है।

 

Dr Mahipal Sachdeva

रात को स्पीड ब्रेकर नहीं दिख रहा-कार बार बार उछल जाती है सावधान हो जाइए यदि रात को आपको चीजें देखने में , ड्राइव करने में दिक्कत हो रही है। ड्राइव करते समय आपको रोड के ऊपर कोई स्पीड ब्रेकर या गड्डे वगैरह आ रहा है या साइड के विजन में कम दिख रहा है। आपको डार्क में जब जाते हैं तो आपको एडप्ट करने में वो डार्क कंडीशंस को अप्ट करने में दिक्कत हो रही है। तो आप नाइट ब्लाइंडनेस यानी के निकलोपिया से प्रभावित हो रहे हैं। व्यक्ति को रात को कम दिखता है , बच्चों में इसका कारण न्यूट्रिशनल डेफिशिएंसी होता है। यानी कि विटामिन ए जो है उसकी डेफिशिएंसी होती है। इसका सरल उपाय है कि विटामिन ए का सप्लीमेंट दिया जाए चाहे वो ओरल दिया जाए या इंजेक्टेबल फॉर्म में दिया जाए और इसमें वो बहुत जल्दी रिवर्स हो जाती है। एडल्ट्स में नाइट ब्लाइंडनेस रेटिना की डिजीजसेस करके हो सकती है। जिसमें के मुख्य कारण है जिसको हम कहते हैं रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा। अनफॉर्चूनेटली इसमें यह जो पिगमेंट एपिथीलियम जो रोड्स के होते हैं वह खराब होते जाते हैं और इसमें व्यक्ति को प्रोग्रेसिवली रात को कम दिखता है। रात को चीजों को अडप्ट करने में बिल्कुल दिक्कत होती है। उसके कॉन्टूर्स नहीं दिखते हैं। दूर से व्यक्ति अगर आ रहा हो नाइट में तो उसको वो पहचान नहीं सकता। यह अनफॉर्चूनेटली एक प्रोग्रेसिव डिजीज है और आज की तारीख में इसका कोई इलाज नहीं है।

 

Dr Jitendra Nagpal

बच्चों के सपनों को पहचानिए-जाने अनजाने उनपर अपने सपनों को मत लादिए

बच्चों के सपनों से अलग पैरेंटस का बच्चों के करियर को लेकर बनाने वाला प्रेशर बहुत आम देखा जा रहा है, इसके चलते बच्चे डिप्रेशन में जा रहे हैं, उदास है, परेशान हैं और यहां तक की अपनी जिंदगी भी ख्तम कर रहे हैं। कई बार बच्चों पर पैरेंटुस जैसे बनने का प्रेशन भी जाने-अनजाने उसके दिल में घर कर लेता है, पैरेटेस मेडिकल में हैं, इंजिनिरिंग में हो, चारेड इकाउंटेंट हो, लॉयर हो, बच्चों के उपर ये छुपा प्रेशर रहता है कि उनकी उमीदे पूरी करनी है, उनके सपने साकार करने हैं और उनके जितना या उनसे उच्छा बनाना है और यहीं पर ये प्रेशर बच्चे के उपर एक साकरात्मक तरीके से उसे जिन्दगी के पहलू पर आगे चलने नहीं देता है, बच्चा अगर म्यूजिक में जाना चाहता है, पेंटिंग करना चाहता है, शेफ बनना चाहता है, होटल मेनिजमेंट में जाना चाहता है, जो थोड़े से नॉन कंवेंशनल केरियर्स हैं, तो पैरेंट्स के सपने उसे वो करने से रोकते हैं और वो उनकी पसंद के मुताबिक करियर तो चुन लेता है पर अंदर ही अंदर घुटता रहता है। तो अगर उसको अपनी पसंद का केरियर बनाना है, तो उसको एंकरेज करिये, प्रेरणा दीजिए, उसको डांटे ना धुतकारिय मत। बच्चों के सपनों की कद्र करके हम उन्हें डिप्रेशन, उदासी और आत्महत्या तक करने से रोक सकते हैं।

 

दोस्त जरूरी है दोस्ती जरूरी है आगे बढ़ने की अंधी दौड़ में इसे मत खोइए

क्या कारण हो सकता है? दोस्तों के साथ दोस्ती हम क्यों नहीं निभा पा रहे हैं? क्या कॉंपिटिशन इतना जादा है? हाँ, यही बात आम देखे जा रही है। इतना जादा कॉंपिटिशन के कई बार एक दूसरे में दरार पैदा हो जाती है, और कॉंपिटिशन जॉब का भी है, प्लेस्मेंट का भी है, यहां तक के कितनी सैलरी मिलेगी जॉब में इसको, उसको कितनी मिल रही है, यह जो तुलना है एक दूसरे के बीच में, कहने कह से काभी के बार प्लेस्मेंट पाउंट कर रही है. कॉंपिटिशन पढ़ाई काई नहीं है, कसी भी चीज़ में एचिविमेंट, या फॉर्स्ट आना, या स्पोर्ट्स में, कहीं पर कहीं पर वो जो एन्वी होती वो जो एक दूसरे के बीच में एक Competition की भावना, भावना जो एक दूसरे के बीच में होती है, Peer to Peer Support कम कर रहे हैं, इसको रोकिये क्योंकि दोस्ती, दोस्ती लाबदायक है, दोस्ती जिंदगी है, दोस्ती प्रोचसाहित करती है, health के लिए, happiness के लिए और lifelong Achievement के लिए भी और यह important है जानना कि ब्रेन भी हमारा, हमारे ब्रेन के अंदर अर्बो Neurons हैं, cells हैं, क्या वो एक सहपार्टी और सयोगी तरीके से काम नहीं करते? जब हम खुश होते हैं, दोस्तों के साथ चलते हैं, जैसे अपने परिवार और अपने माता बिता के साथ रहते हैं, ऐसे दोस्तों का रोल भी जिंदगी को एक Meaning देने के लिए, एक Purpose देने के लिए, एक जिंदगी को प्रेरिट करने के लिए बहुत ज़रूरी है. Competition की वजए से, Marks की वजए से, Jobs की वजए से, Placement की वजए से, दोस्ती को मत छोड़िये, क्योंकि Encouragement जो मिलता है, वो हमारे health के लिए बहुती उच्छोटी का परिणाम है, और आगे चलके यही हमें Help करेगा, Lifelong Health and Happiness के लिए।