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पाकिस्तान, टर्की और सऊदी अरब के बीच एक पैक्ट हुआ है जिसको मक्का का नाम दिया गया। तीनों में से किसी एक देश के ऊपर हमला होता है तो ये बाकी सारे देशों के ऊपर हमला गिना जाएगा और सब मिलकर लडेंगे। लेकिन अगर हमला होता है तो क्या बाकी देश समय पर रिएक्ट करेंगे? क्या ये नैटो की तरह काम करेगा, क्या है इसका मकसद , भारत को इससे क्या खतरा है, तमाम बातों के बारे में विस्तार से बात की पूर्व मेजर जनरल P K Sehigal से

Ques——-ये पैक्ट हुआ है इसको कहा जा रहा है कि ये नैटो की तरह काम करेगा, तो एक्सक्टली ये पैक्ट है क्या ?

Ans —-ये पैक्ट सऊदी अरेबिया, टर्की , पाकिस्तान के बीच सात अगस्त को साइन हुआ है और इसको कहा जा रहा है , और टर्की के एक्सटर्नल अफेयर्स मिनिस्टर का बयान है कि तीनों में से किसी एक देश के ऊपर किसी देश के ऊपर हमला होता है तो ये बाकी सारे देशों के ऊपर हमला माना जाएगा लेकिन साफ तौर पर इसमें कहा गया है कि अगर हमला होता है तो क्या बाकी देश रिएक्ट करेंगे ये इंडिविजुअल नेशन के ऊपर डिपेंड करेगा , कंसल्टेशन के बाद में यानी अगर पाकिस्तान—- हिंदुस्तान के ऊपर हमला करता है या हिंदुस्तान पाकिस्तान के ऊपर हमला करता है, तो क्या सऊदी अरेबिया पाकिस्तान की मदद करेगा ,मेरे मुताबिक शायद नहीं करेंगे क्योंकि ये पैक्ट अपने आप में काफी पेचिदा है और हर देश का अपना ही फंडा है।

Ques ——कहा जाता है कि इस पैक्ट को बनाने के पीछे कईं कारण हैं ?

Ans——- इस पैक्ट के पीछे पांच मुख्य कारण है, सबसे पहले सऊदी अरेबिया को साफ तौर पj नजर आता है कि वो अमेरिका के ऊपर कंप्लीटली डिपेंड नहीं कर सकता तो एक स्ट्रेटेजिक डायवर्जेंस चाहता है वो चाहता है कि कोई और देश भी उसकी मदद करे इन एडिशन टू सो दैट डिटरेंस कैपबिलिटी जो है सऊदी अरबिया ले बढ़े। दूसरा टर्की है, टर्की साफ़ तौर पर जानता है कि बहुत बड़ी एक सबसे मिलिट्री इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स है। हवाई जहाज बना रहे हैं। नेवल जहाज बना रहे हैं। मिसाइल बना रहे ड्रोन बना रहे हैं और जो दुनिया में सबसे बेहतरीन वो चाहता है कि उसकी स्ट्रेटजी और पोलिटिकल इन्फ्लुएंस जो है इस इलाके में बढ़े। तीसरा जो है पाकिस्तान चाहता है कि उसको सऊदी अरेबिया से पैसा भी मिले, एनर्जी भी मिले और टर्की से उसको टेक्नोलॉजी मिले और ट्रांसफर ड्रोंस वगैरह मिले हिंदुस्तान के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए। चौथा कारण है ईरान, पाकिस्तान को सऊदी अरेबिया को साफ तौर पर नजर आता है कि ईरान की तरफ से उसके ऊपर बार-बार हमला हो रहा है। लेकिन जहां तक टर्की का ताल्लुक है, टर्की जो है वो नहीं किसी प्रकार से इनवॉल्व होना चाहता डायरेक्टली क्योंकि टर्की के साथ ईरान के इतने इतने नाजुक रिश्ते नहीं है जो अभी सीरिया को लेकर टर्की और ईरान के अंदर काफी ज्यादा रिश्ते खराब हो गए हैं। इतने खराब नहीं हुए कि लड़ाई की ना हो। जहां तक सऊदी अरेबिया का ताल्लुक है सऊदी अरेबिया तो साफ तौर पर जानता है कि ईरान थ्रेड टू पाकिस्तान है जो है पाकिस्तान भी ईरान पाकिस्तान का लेबर है और उसको स्टेबिलिटी चाहिए क्योंकि बलूचिस्तान को अगर ईरान का भी सपोर्ट मिले तो बलूचिस्तान लिबेट हो सकता है। इसलिए पाकिस्तान भी नहीं चाहेगा। ऐसे में सऊदी अरेबिया के ऊपर अगर हमले होते रहे तो मुझे नहीं लगता कि ना तो पाकिस्तान इनवॉल्व होगा ना ही ईरान।पांचवा कारण है इजराइल जहां तक टर्की का ताल्लुक है टर्की और इजराइल के ताल्लुकात जो है काफी ज्यादा बेहतर हो चुके हैं वंस अगेन सीरिया को लेकर पाकिस्तान भी हाईली क्रिटिकल रहा है लेकिन सऊदी अरेबिया कंप्लीटली प्रैक्टिकल है वो साफ तौर पे जानता है कि इजराइल इज़ अ पावर टू स्टे विथ एस फ मिड ईस्ट इस कंसर्न और किसी प्रकार से उसमें सो देयर इज़ अ ह्यूज अमाउंट ऑफ़ परसेप्चुअल डिफरेंसेस ऑन ईरान टर्न एस वेल एस इज बिटवीन द थ्री।

Ques—भारत को इससे क्या खतरा हो सकता है क्योंकि क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर में देखा गया था कि टर्की ने खुल के पाकिस्तान की मदद की थी और ऐसे में ये पैक्ट सामने आ गया तो भारत को क्या कोई खतरा होगा?

Ans—— भारत को टर्की की तरफ से बहुत ध्यान देना पड़ेगा। पिछले सात दिन से टर्की से बड़े पैमाने पर मिलिट्री हवाईज आ रहे हैं। जो ड्रोन ला रहे हैं और कुछ और सामान ला रहे हैं पाकिस्तान की आर्मी के लिए। लेकिन कल अगर पाकिस्तान और हिंदुस्तान का झड़प हो जाती है तो टर्की के किसी प्रकार से गल ग्रुप्स या उसके हवाई जहाज हिंदुस्तान के साथ कारवाई नहीं करेंगे। जहां तक सऊदी अरेबिया का ताल्लुक है सऊदी अरेबिया जो है फाइनेंशल सपोर्ट दे सकता है। पाकिस्तान को उसको एनर्जी सपोर्ट दे सकता है। लेकिन किसी प्रकार से हिंदुस्तान के खिलाफ कोई भी कारवाई नहीं करेगा। अगर आपको याद होगा तो 1971 की वॉर में एक समय था जब सऊदी अरेबिया ने पाकिस्तान को 35 हवाई जहाज दिए थे। लिबिया ने हवाई जहाज दिए थे। टर्की ने अपनी फर्सेस को मोबिलाइज कर दिया था। इस तरह की कोई कारवाई अब नहीं होगी। सऊदी अरेबिया साफ तौर पर जानता है कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की अहमियत कम हो जाएगी और बड़े पैमाने पर अगले 30 साल से वो कम से कम 100 बिलियन डॉल हिंदुस्तान में लगाना चाहता है, इन्वेस्ट करना चाहता है वो साफ तौर पे जानता है कि हिंदुस्तान की मार्केट बहुत बड़ी है पाकिस्तान की मार्केट ना के बराबर है इसलिए हिंदुस्तान के साथ किसी हालत में ताल्लुकात खराब नहीं करेगा।

Ques—-सुनने में आ रहा है कि बांग्लादेश भी इस पैक्ट में शामिल हो सकता है ?

Ans—तब भारत को खतरा है, अभी बांग्लादेश की तरफ से भी इशारा हो रहा है कि बांग्लादेश को इस पैक्ट को ज्वाइन करेगा अगर बांग्लादेश इस पैक्ट में आ जाता तो भारत के लिए चिंता है। अमेरिका ने इस इस पैक्ट को वेलकम किया है। वो चाहता है कि इस फैक्ट के अंदर जॉर्डन भी, कुवैत भी और इजिप्ट भी शामिल हो जाए। उस अमेरिका चाहता है कि वास्तव में मिडिल ईस्ट में कुछ और देश भी जो है इनवॉल्व हो जाए ताकि वो अपनी सुरक्षा खुद कर सकें और वो भी अपने सैनिकों को ईरान के खिलाफ खड़ा करें।

 

Ques—- जैसे आपने कहा साउदी पाकिस्तान को फाइनेंसियल सपोर्ट दे सकता है, सऊदी अरबिया एनर्जी सपोर्ट दे सकता है टर्की जो है आर्म्स दे सकता है तो ये छुपा हुआ खतरा है जिसके बारे में सतर्क रहना चाहिए सरकार को ?

Ans—- सरकार तो सतर्क है लेकिन कन्वेंशनली हिंदुस्तान पाकिस्तान से बहुत ज्यादा स्ट्रांग है पाकिस्तान को भी हर प्रकार से सहायता मिल रही है चाइना की तरफ से टर्की की तरफ से ऑपरेशन सिंदूर में भी आपने देखा बड़े पैमाने पर सहायता मिली लेकिन उस सहायता का कोई फायदा नहीं हुआ पाकिस्तान को हिंदुस्तान ने विद इन 48 आवर्स पाकिस्तान के घुटने टिका दिए और अगर दोबारा मुठभेड़ होती है तो टर्की भी जानता है सऊदी अरेबिया भी जानता है पाकिस्तान भी खुद जानता है कि बुरा होगा, अगर आप देखो फजलुर रहमान जो है पाकिस्तान का एक इंपॉर्टेंट लीडर है उसने साफ तौर पे पाकिस्तान को चेताया है कि किया है कि किसी भी हालत में हिंदुस्तान के खिलाफ लड़ाई की बात नहीं अपनी अपनी असलियत पहचानो सर इकोनमिकली हम कंगाल है टूटने की तरफ है और लड़ाई में हम किसी प्रकार से काबिल नहीं हिंदुस्तान के साथ पंगा लेने के लिए साथ ही साथ उसने कहा कि अपने देश को भी संभालो बजाय दूसरे देश की तरफ देखने के लिए।