सम्राट चौधरी लगातार हमलों का शिकार बन रहे

बिहार, जब से नीतिश कुमार की विदाई हुई है बीजेपी के लिए कुछ ज्यादा अच्छा नहीं चल रहा है, कुछ ना कुछ वाद-विवादों में बीजेपी सरकार और सम्राट चौधरी घिरे ही रहते हैं और विपक्षियों यानी लालू यादव की पार्टी और कांग्रेस को हमला करने का पूरा मौका दे देते है, और अब जब से प्रशांत किशोर ने बांकीपूर सीट बीजेपी के मुंह से निकाल कर जीत हासिल की है, वो भी लगातार अलग अलग मुद्दों पर सरकार पर हमलावर रहते हैं। अभी हाल ही में भरत तिवारी इऩकाउंटर मामले में सम्राट चौधरी सरकार की काफी छीछी लेदर हो चुकी है और अब लगता है वंशवाद का मुद्दा, पावर का मुद्दा आने वाले समय में सरकार के लिए सिरदर्दी पैदा कर सकता है, जी हां पता चला है कि एक तरफ RJD विधायक भाई वीरेंद्र ने बीजेपी सहयोगी राष्ट्रीय लोकमोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है और खुलआम कहा है कि जो लोग कभी इसके खिलाफ थे, आज वही अपने परिवारों को राजनीति में आगे बढ़ा रहे उन्होंने कहा कि कुशवाहा के परिवार के सदस्य विभिन्न राजनीतिक पदों पर हैं।

 

Bihar —वंशवाद के खिलाफ बोलने वाले आज अपने परिवार के लिए चाहते अनेक पद

वैसे देखा जाए तो RJD के ये नेता कुछ गलत नहीं कह रहे हैं, क्योंकि देखा जाए तो खुद उपेंद्र कुशवाहा राज्यसभा सदस्य हैं, उनके बेटे विधान परिषद सदस्य और पत्नी विधायक हैं। इतना सब होने के बावजूद पता चला है कि उपेंद्र कुशवाह ने नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत पर भी अपनी दावेदारी जता रहे हैं, यह दावा नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से विराम लेने की चर्चा के बीच , हाल ही में पार्टी की ओर से आयोजित विमर्श शिविर में किया गया है।उपेंद्र कुशवाह ने कहा कि कईं राजनीतिक दल इस विरासत पर अपना दावा करेंगे, लेकिन हमें पता है कि बिहार की बड़ी जनता चाहती है कि यह जिम्मेदारी उनकी पार्टी को मिले।

निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने की बढ़ती डिमांड NDA की बढ़ती चिंता

वहीं दूसरी तरफ सम्राट चौधरी को एक नई चिंता सताने लगी है क्योंकि JDU की विरासत को लेकर पूर्व सीएम नीतीश कुमार के चाहने वालों की बयानबाजी तेज हो गई है ये सभी उनके बेटे निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने की बात कर रहे हैं। JDU सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने तो खुलकर कह भी दिया कि निशांत कुमार मुख्यमंत्री क्यों नहीं बन सकते। बिहार की राजनीती में चल रही इन तमाम हलचल के सामने आने के बाद RJD और CONGRESS के नेता और एग्रिसव होकर BJP और JDU पर हमला कर रहे हैं और कह रहे हैं कि किसी का बेटा होने से कोई मुख्यमंत्री नहीं बन जाता है, मुख्यमंत्री बनने के लिए योग्यता और राजनीतिक क्षमता जरूरी है।

All is not well Between BJP-JDU

RJD के पास इस समय बड़ा मुद्दा यही है कि BJP के सहयोगी दल चाहे वो नीतिश की पार्टी हो या उपेंद्र कुशवाह की ये सभी एक समय में परिवारवाद के खिलाफ खुलकर बोलते थे, पर आज उल्टी गंगा बहनी शुरू हो गई है, सभी अपने परिवार के सदस्यों को आगे बढ़ाने में जमकर काम कर रहे हैं, वैसे बिहार की Power में बीजेपी और jdu के बीच गद्दी को लेकर चल रही खींचातानी की खबरों के लगातार सामने आने से RJD को भी मौका मिल रहा है यहां बनी NDA सरकार को घेरने का, और विपक्षी कहने लगे हैं कि All is not well Between BJP-JDU और आने वाले समय में कुछ भी हो सकता है।

Rahul Gandhi महिलाओं के हित की बात करते -यादादाश ठीक करो मेनका गांधी पर की टिप्पणी याद करो

हाल फिलहाल में राहुल गांधी ने अपने एक कार्यक्रम में मनुस्मृति पर टिप्पणी की, उसके बाद से बीजेपी नेताओं ने उन्हें आडे हाथों ले लिया है, योगी जी ने तो बाकायदा राहुल पर तंज कसते हुए सलाह दे डाली कि पहले वेदों को समझ लें तभी मनुस्मृति के वारे में जानोगे ,और अब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार कंचन गुप्ता ने राहुल पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें इतिहास याद दिला दिया। कंचन गुप्ता ने राहुल गांधी को उनके पिता और पूर्व प्रधानमंत्री का वो दौर याद दिला दिया जब मेनका गांधी खुद राजीव गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ रहीं लेकिन उनके खिलाफ गांधी परिवार ने भद्दे नारों विवादित नारों को बढ़ावा दिया था, जी हां आपको बता दें कि मेनका गांधी साल 1984 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से राजीव गांधी के खिलाफ निर्दलीय मैदान में उतर गई थीं तब उनके खिलाफ नारे लिखे गए थे कि ‘बेटी है सरदार की, देश के गद्दार की, कंचन गुप्ता ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि मेनका गांधी के खिलाफ इन गंदे नारों को कांग्रेस और राजीव गांधी का पूरा समर्थन हासिल था। आपको बता दें कि मेनका के पिता तरलोचन सिंह आनंद एक सिख सरदार थे। और उस दौर में ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद सिखों के खिलाफ गलत माहौल बना दिया गया था। इसी दौरान अमेठी की दीवारों पर मेनका गांधी के खिलाफ यह नारा लिखा गया था। कंचन गुप्ता ने यह भी लिखा कि भारतीयों में इतिहास की समझ बहुत कम होती है, इसलिए लोगों की याददाश्त बहुत कमजोर होती है।