शरद पवार का नया खेला-Congress भी झुकी

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी गुट के नेता शरद पवार को राज्यसभा के 16 तारीख के चुनाव के लिए आईएडीआईए ने पूरा समर्थन उनको कर दिया है। विशेष रूप से कांग्रेस ने उनको राज्यसभा भेजने का निर्णय किया है। अब राज्यसभा भेजे जाने जाना शरद पवार को महाराष्ट्र में आप या इस दृष्टि से देखा जा सकता है कि वहां आई एनडीआई एक साथ नजर आएगा या इसका दूसरा जो इसका जो दूसरा मतलब निकाला जा सकता है वो यह हो सकता है कि शरद पवार किस तरह से चीजों को बहुत बेहतर ढंग अपने पक्ष में करवाने में अपने पक्ष में ले आने में कामयाब हो जाते हैं।अब उनकी उम्र उस तरह की राजनीति की नहीं रही लेकिन वो जिस तरह से अपनी राजनीतिक चाल या उनकी जो राजनीतिक कदम होते हैं वो बड़े सटीक होते हैं और वो बहुत प्रभावी होते हैं। तो, अब जब उनका राज्यसभा का टेन्योर ख़तम हो रहा है, तो और जिस तरह से विधानसभा के चुनाव के परिणाम है कि उसमे किसी भी कोई भी जो शरद पवार वाला राज राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी या शिवसेना, उद्धव बाला साहब ठाकरे या कांग्रेस यह अलग-अलग करके सीटें नहीं जीत सकती थी। उन परिस्थितियों में कांग्रेस का शरद पवार के समर्थन में खड़े होना यह दिखाता है कि वह कम से कम उनके साथ हैं।या यह कहिए कि शायद कांग्रेस ने इसलिए समर्थन कर दिया शरद पवार को कि कहीं ऐसा ना हो वो पार्टी मर्ज हो और वो एनडीए के खेमे में चले जाए।

तमिलनाडू में BJP को परेशानी दे सकता नया समीकरण


दूसरा महत्वपूर्ण मामला है वो यह क डीएमके और कांग्रेस अब मिलकर चुनाव लड़ेंगे। हालांकि सरकार में साथ होंगे कि नहीं होंगे इसको लेकर के विरोध बताया जा रहा था और जो डीएमके है उसने बोला था कि हम सात चुनाव लड़ेंग लेकिन सरकार में कांग्रेस नहीं शामिल होगी और 28 सीटें कांग्रेस को दी गई हैं। जिस तरह से लगभग तमिलनाडु की विधानसभा है, उसमें जितनी सीट्स हैं उसमें कितनी सीट्स मिली हैं वो बड़ी महत्वपूर्ण है कांग्रेस के लिए। इसलिए कि कुल जितनी विधानसभा की सीटें हैं उसमें से सिर्फ 28 सीटें मिलना कांग्रेस के लिए कोई बहुत अच्छी बात नहीं है। 234 में से सिर्फ 28 सीटें कांग्रेस को मिलना मतलब लगभग 200 से ज्यादा सीटों पर डीएमके चुनाव लड़ेगी। यह गठबंधन के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि कोई भी जो स्टेट का गठबंधन है वो अपने दूसरे पार्टनर को बहुत ज्यादा सीट देने के लिए नहीं तैयार है। चाहे वो तमिलनाडु की बात करें या कोई किसी स्टेट की बात करें जैसे एआई एआई एडीएम भी भारतीय जनता पार्टी को सीट देने के लिए नहीं तैयार है ज्यादा। लेकिन अगर यह गठबंधन चुनाव मिलकर के लड़ता है जैसा एक और कयास लगाए जा रहे थे कि कांग्रेस जो है वह विजय के साथ जा सकती है और अगर वैसी स्थिति होती तो डीएमके का हारना लगभग तय था लेकिन अब एक बार फिर जिस तरह से अलायंस बन रहा है उसमें जो डीएमके है वो फिर मजबूत स्थिति में आ गया है।

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