सुप्रिया सुले को केंद्रीय मंत्री-शरद पवार को राष्ट्रपति पद क्या NDA में शामिल कर पाएगा

एनडीए के नेता जिस तरह से राष्ट्रवाद कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार से मुलाकात कर रह हैं उसके बाद एक बात बहुत मजबूती से य बहुत जोरदार चर्चा में है कि क्या शर पवार भी एनडीए में शामिल होने वाले हैं शरद पवार की लंबे समय से यह इच्छा थी क उनकी बेटी सुप्रिया सूले या तो महाराष्ट् के मुख्यमंत्री पद की दावेदार बने और महाराष्ट्र की मुख्यमंत्री बने। लेकिन पिछले चुनाव में जिस तरह से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रे और शिवसेना उद्धव बाला साहब ठाकरे की हुई है, ह्यूमिलिएटिंग डिफीट हुई है। उसक बाद उन संभावनाओं पर तो विराम लग गया है और अगले चुनाव तक शरद पवार चुनावी राजनीति में कितना सक्रिय रहेंगे? कितना सुप्रिया सूले को मदद कर पाएंगे? ये एक बड़ा प्रश्न है। अब दूसरा ऑप्शन क्या है? शरद पवार को अपनी पुत्री को राजनीति में लंबे समय तक स्थापित करने के लिए। सांसद वो हैं लेकिन सांसद हर साल लगभग मतलब 750 के आसपास अगर लोकसभा राज्यसभा मिला दिया जाए तो 750 के आसपास सांसद होते हैं तो सांसद की कोई इस तरह के परिवार की आई से आई आए व्यक्ति के लिए सांसद होना महत्वपूर्ण नहीं होता है। महत्वपूर्ण है कि कोई मंत्रिमंडल मिले। कैबिनेट मंत्रिमंडल कैबिनेट का पद मिले। तो उसके लिए अब शरद पवार के पास एक ही ऑप्शन है कि वो एनडीए जाइन करें और सुप्रिया सूले को अगले जो एक्सपेंशन है उसमें मंत्रालय को ही दिया जाए। अब इस पूरे मामले के लिए अठावले साहब हैं वो लगातार जो है इस बारे में चर्चा कर रहे थे। चर्चा शरद पवार से कर रहे थे। शरद पवार को वह लगातार 2014 से पर्सुएट कर रहे हैं कि आप एनडीए जाइन कर लीजिए। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि अगर वो एनडीए जाइन कर लिए होतेतो राष्ट्रपति पद के दावेदार होते। क्योंकि उनके पास नंबर नहीं था इसलिएउन्होंने अपना कैंडिडेचर वापस ले लिया था। जब दोनों अभी जब मुर्मू राष्ट्रपति मुर्मू का चुनाव हुआ था तो ये वास्तु स्थिति है। लेकिन अब जो दृष्टिकोण है शरद पवार का उसमें थोड़ा बदलाव है। इसलिए कि उनको यह नजर आ रहा है कि जिस तरह से राहुल गांधी कंडक्ट कर रहे हैं जो हाल कांग्रेस का है वो कहीं से भी भारतीय जनता पार्टी को चुनौती देती हुई नजर नहीं आ रही है। बावजूद इसके कि लगातार भारतीय जनता पार्टी से एक के बाद एक इस तरह की गलतियां हो रही हैं जिस पर उनको अब तक मुश्किल में पड़ जाना चाहिए था लेकिन वैसा होता हुआ नहीं दिख रहा है तो क्या अगले एक्सपेंशन में सुप्रिया सूले मंत्री मंत्रिमंडल का शपथ लेंगी हम सबकी नजर रखेगी लेकिन संभावनाएं बहुत मजबूत हो रही है।

 

BJP को घेरने संसद में विपक्ष के पास कईं मुद्दे पर क्या सफल होंगे

मानसून सत्र जो आने वाला है मानसून सत्र में क्या कोई काम होने की संभावना है? इसको लेकर के बहुत सारी बातें हो रही। लेकिन उसकी संभावना कम इसलिए दिख रही है कि विपक्ष के पास इस बार फिर बहुत सारे मुद्दे हैं और कुछ ऐसे मुद्दे हैं जो बीजेपी के लोग कह भी रहे हैं कि अबकि राहुल गांधी अभी 15 दिन गुप्त विदेश यात्रा से आए हैं तो कुछ ना कुछ वो लेकर के आए होंगे सेशन से पहले और वो इसीलिए सेशन से पहले जाते हैं और सेशन के पहले कुछ ना कुछ इस तरह का होगा और उसका इंतजार भी हो रहा है। लेकिन जो नया कुछ राहुल गांधी लेकर के आएंगे या जो कुछ बात होगी वह तो जब आएगा तब आएगा लेकिन अभी जो चढ़ावा चोरी वाला मामला है वो एक बड़ा मसला विपक्ष के हाथ में है और कम से कम उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी इस मामले को लेकर के बहुत वोकल है और बहुत जोर शोर से विरोध प्रदर्शन कर रही है और लगातार भारतीय जनता पार्टी को घेरने की कोशिश कर रही है। हालांकि एक ही कारण है जिसके कारण भारतीय जनता पार्टी अभी भी अपने आपको मजबूती के साथ इसका मुकाबला करती हुई दिख रही है। वो है योगी आदित्यनाथ और योगी आदित्यनाथ की छवि कि वो इस तरह किसी भी तरह के भ्रष्टाचार कोटोलरेट नहीं करते हैं और अगर वो राम मंदिर का मामला है तो उसको पूरी तरह उसको तो और भी वो बहुत संजीदगी के साथ कर लेते हैं। अब इस पूरे मामले में बहुत सारे डेवलपमेंट हैं। डेवलपमेंट पर हम बहुत सारी चर्चा कर चुके हैं। नए सीईओ के चयन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। वह बाकायदा 3 साल का टेन्योर होगा। वो सारी बातें हैं। लेकिन मसला क्या होगा? मसला यह होगा कि चंदा चोरी का मामला उससे संबंधित डिटेल पर चर्चा उस विरोध प्रदर्शन होगा। संसद नहीं चलने दिया जा सकता है और संसद में हो सकता है इस पर चर्चा की वहां बात हो कि क्या कार्यवाही की गई, कहां तक बात पहुंची ये सारी चीजें निकल कर के आती हैं। दूसरा सीजेपी का कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध प्रदर्शन लगातार चल रहा है। सोनम मांगचुक के भूख हड़ताल का 17वां 18वां दिन हो रहा है। तो वो एक मामला भी चलेगा वहां पर, दूसरा एन नीट वाली परीक्षा को भी सरकार ने बेहतर ढंग सेमैनेज कर लिया। जो भी रहा हो दोबारा जो परीक्षा हुई उसमें विपक्ष के पास अब कहने के लिए कुछ नहीं है। लेकिन ये भी ये दो मसले ऐसे हैं जो संसद सत्र में बवाल करा सकते हैं और संसद सत्र को बाधित करने में विपक्ष की मदद कर सकते हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी अपना ही धरना बन रहा गले की हड्डी

जंतरमंतर पर जो कॉकरोच जनता पार्टी का धरना चल रहा है अभिजीत दीपके के नेतृत्व में अब वो एक ऑनरेबल एग्जिट का वो पूरे आंदोलन को एक ऑनरेबल एग्जिट का रास्ता खोज रहे हैं। अब वो आंदोलन का एग्जिट का रास्ता इसलिए खोज रहे हैं कि कोई भी उनके समर्थन में नहीं आया। भीड़ वहां इकट्ठा नहीं हो रही है। और जो लोग आए वह पहले से ही डिसक्रेडिटेड लोग थे। ज्यादातर लोग एंटी इंडिया बात करने वाले लोग थे। वहां पर गाने चल रहे हैं। अ हम देखेंगे नाम रहेगा अल्लाह का। तो ये सारी बातें हो रही हैं। इसके कारण और जो कहने के लिए जो स्टूडेंट का मूवमेंट है, जैंजी का मूवमेंट है, ज़ैंजी ने पूरी तरह से उसमें दूरी बना करके रखी हुई है। अब जंजी ज्यादातर पढ़ाई लिखाई से मतलब रखता है। इस तरह के आंदोलन में नहीं रखता वो रखता है। दूसरा बात यह कि सोनम वांचुक जिनकी अपनी क्रेडिबिलिटी को लेकर के भी प्रश्न है कि क्या वो नॉन पॉलिटिकल नॉन पार्टीशंड आदमी है? नहीं वो कांग्रेस एमएलए के बेटे हैं और हमेशा ऐसा काम करते रहे हैं जो सरकार को विशेष रूप से एंटी बीजेपी उनका प्लैंक है और सरकार को एंबरेस करें। सरकार को एंबरेस करना कोई अपराध नहीं है, कोई वो नहीं है। लेकिन जब आप ढूंढ-ढूंढ के इस तरह का काम करते हैं तो आपके इंटेंशन पर डाउट होता है और उनका इंटेंशन डाउटफुल है। अभिजीत दीपके भी व्यवस्थित आदमी हैं। उनको किसी चीज की कमी नहीं है। वो अमेरिका में रह के पढ़ाई कर रहे हैं। बाकी सारे जो इस आंदोलन के समर्थक हैं वो भी वैसे ही और जैसा मैंने बताया कि जो लोग आ रहे हैं समर्थन में आ रहे हैं वो भी उसी तरह की मानसिकता रखने वाले लोग हैं। इसमें एक महत्वपूर्ण बात यह है कि शायद इस आंदोलन को कोशिश ये किया जाए कि विंटर मानसून सेशन तक रोक के रखा जाए। कंटिन्यू किया जाए। जिससे इस आंदोलन के बहाने कुछ संसद में बवाल किया जाए और वो होगा। लेकिन क्या उतने दिन तक सस्टेन कर पाएगी? इसलिए कि जिस तरह के अभिजीत दीपके के बयान आ रहे हैं वो लगातार यह कह रहे हैं यह कहने की कोशिश कर रहे हैं या उनकी बातों से यह लग रहा है कि कोई एक ऐसा रास्ता मिल जाए जिससे वह उनकी इज्जत भी बच जाए और यह आंदोलन भी खत्म कर जाए। समर्थन नहीं है। सारी सारे लोग चाहे वो एनडीTV की पत्रकार हो, चाहे वो दिल्ली यूनिवर्सिटी की टीचर हो, चाहे वो मरलेना हो, आरटीसी मरलेना हो, चाहे वो बाकी और आम आदमी पार्टी का नेता कोई हो। यह उसी तरह से काम करते हुए दिख रहे हैं। लेकिन अब शायद ज्यादा देर तक इस आंदोलन को खींच ना पाए।