संजना जाटव की जीत में उनके पति और ससुर की जी तोड़ मेहनत

एक कहावत प्रचलित है कि हर पुरुष की सफलता के पीछे एक न एक महिला का हाथ होता है, लेकिन राजस्थान की भरतपुर संसदीय सीट से कांग्रेस के टिकट पर जीत कर लोक सभा में पहुंचने वाली मात्र 26 साल की संजना जाटव की कहानी इस कहावत एक दम उल्ट है।उनकी शानदार जीत के एकमात्र कारण उनके पति और ससुर द्वारा की गई जी तोड़ मेहनत है। इसी मेहनत का नतीजा है जो संजना स्थानीय कांग्रेस नेताओं के जबरदस्त विरोध के बावजूद खासे अंतर से चुनाव जीती हैं।

सांसदों में 4 महिलाएं सबसे कम उम्र की इनमें से एक है संजना जाटव

18वीं लोकसभा के लिए चुने गए सांसदों में 4 महिलाएं सबसे कम उम्र की हैं। इनमें से एक है संजना जाटव। संजना को भरतपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस ने मैदान में उतारा था। पूरे दमखम से चुनाव लड़ा और भाजपा के रामस्वरूप कोली को करीब 50 हजार वोट से हरा दिया। संजना के लिए यह चुनावी सफर आसान नहीं थी क्योंकि उसे इस मुकाम तक पहुंचने से पहले ताने तक सुनने पड़े थे। एक कांग्रेस नेता ने तो उसे यहां तक कह दिया था- इसे विधायक बनने की जल्दी है। इसी स्थानीय नेता के इशारे पर घर के सामने गड्‌ढा खोद दिया गया। फिर भी संजना ने हार नहीं मानी।

संजना का राजनीति प्रवेश उनके ससुर हरभजन सिंह के कारण

संजना जाटव सबसे कम उम्र की सांसद बनी हैं। उनका कहना है कि परिवार की सपोर्ट की वजह से ही वह इस मुकाम तक पहुंच पाई हैं। 18 साल की उम्र में शादी संजना की शादी अलवर जिले के कठूमर में रहने वाले कप्तान सिंह से हुई थी। संजना का राजनीति में प्रवेश उनके ससुर हरभजन सिंह के कारण हुई। ससुर ठेकेदार हैं। बड़े ससुर कमल सिंह सरपंच रह चुके हैं। परिवार का राजनीति में हस्तक्षेप पहले से ही था। बड़े ससुर के कहने पर संजना ने 2021 में अलवर के वार्ड नंबर 29 से चुनाव लड़ने का फैसला किया। परिवार के पास पैसे नहीं थे। पति और ससुर ने मिलकर रुपए जुटाए और चुनाव लड़ाया। संजना ने निराश नहीं किया और जीत हासिल की।

संजना के ससुर हरभजन सिंह को कांग्रेस नेता की अपमानजनक टिप्पणी

2021 में संजना जिला परिषद सदस्य बनी थीं। इसके बाद वह अपने ससुर के साथ जयपुर में कांग्रेस के नेताओं से मिलने गईं। इस दौरान वह एक कांग्रेस नेता के यहां भी पहुंचीं। उस समय वहां काफी लोग मौजूद थे। सबकी मौजूदगी में कांग्रेस नेता ने संजना और उनके ससुर को यह कहकर वहां से निकाल दिया कि इसे विधायक बनने की जल्दी है। संजना के ससुर हरभजन सिंह को कांग्रेस नेता की ये टिप्पणी अपमानजनक लगी। इसके बाद ससुर ने संजना को विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार किया।

इसी स्थानीय कांग्रेस नेता के कहने पर संजना के घर के बाहर जब गड्ढा खोदा गया तो संजना का पूरा परिवार परेशान हुआ। परिवार का आरोप था कि ये राजनीति अदावत के चलते किया गया था। इस कांग्रेस नेता और संजना के बड़े ससुर के बीच राजनीति अदावत रही। इसी काे लेकर कांग्रेस नेता की ओर से संजना के परिवार को परेशान करना शुरू कर दिया गया। एक बार रात में कांग्रेस नेता के इशारे पर घर के बाहर गड्ढा खोद दिया गया। घर से निकलना बंद कर दिया गया। पति की जयपुर तक पुलिस विभाग में शिकायत की गई। संजना को भी लगने लगा कि विधानसभा चुनाव लड़ने से पहले खुद को मजबूत करना होगा।

संजना के पति पुलिस विभाग में कॉन्स्टेबल

इसके लिए उन्होंने अपने परिवार के सामने एलएलबी करने की इच्छा जाहिर की। पति कप्तान सिंह ने संजना को एलएलबी में एडमिशन दिलवाया। 2023 में ही संजना ने एलएलबी पूरी की। संजना के पति पुलिस विभाग में कॉन्स्टेबल हैं। पढ़ाई से लेकर उनके राजनीतिक सफर में काफी सहयोग रहा है। संजना और उनके परिवार ने राहुल और प्रियंका गांधी के कैम्पेन को संभाला था ।

‘भारत जोड़ो’ यात्रा और प्रियंका गांधी की ‘मैं भी लड़की हूं लड़ सकती हूं’ कैम्पेन में सक्रिय

राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो’ यात्रा और प्रियंका गांधी की ‘मैं भी लड़की हूं लड़ सकती हूं’ कैम्पेन में काफी सक्रिय होकर काम किया। दोनों कैम्पेन में स्थानीय स्तर पर संजना ने पूरी जिम्मेदारी संभाली। प्रियंका गांधी के इस कैम्पेन में काफी युवतियाें को जोड़ा। यहीं से वह प्रियंका गांधी की नजरों में आईं। इसके बाद राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो’ यात्रा में संजना पहुंची। प्रियंका गांधी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान कांग्रेस महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह भी मौजूद थे।प्रियंका गांधी ने संजना को लेकर भंवर जितेंद्र सिंह से कहा था कि इसे आगे बढ़ाना है। तभी से वह कांग्रेस नेतृत्व की नजरों में आईं।

कांग्रेस पार्टी में संजना के नाम की भी चर्चा होने लगी।

2023 में संजन को विधानसभा का टिकट मिला था। वह महज 409 वोट से हारीं थीं। प्रियंका गांधी के कहने के बाद संजना भंवर जितेंद्र सिंह के साथ काम करने लगी। प्रियंका गांधी की करीबी होने का फायदा ये मिला कि संजना को साल 2023 में कठूमर विधानसभा से टिकट देने का फैसला लिया गया। ऐसे में संजना और उनके परिवार के साथ सहानुभूति भी थी। प्रियंका गांधी के कहने के बाद भंवर जितेंद्र सिंह भी उनके समर्थन में आ गए और उन्होंने संजना के पक्ष में भरतपुर में एक सभा भी की थी। इस हर के बाद से ही कांग्रेस पार्टी में संजना के नाम की भी चर्चा होने लगी।

 

बीजेपी प्रत्याशी को 50 हजार वोट से हरा दिया

 

विधानसभा चुनाव में हार के बाद भी संजना क्षेत्र में काफी काम किया। इसी का नतीजा रहा कि उन्हें दूसरी बार मौका मिला। हार के बाद भी क्षेत्र में सक्रिय रहीं संजना विधानसभा चुनाव में इतने कम वोट से हार के बाद भी संजना ने हिम्मत नहीं हारी वह लगातार क्षेत्र में कांग्रेस के लिए काम करती रहीं। अलवर की कठूमर विधानसभा भरतपुर लोकसभा क्षेत्र में आती है। भरतपुर एससी सीट रही। ऐसे में कांग्रेस के आलाकमान को भी लगने लगा कि संजना भरतपुर लोकसभा सीट निकाल सकती हैं। इस बार भी भंवर जितेंद्र सिंह को इसकी कमान सौंपी गई और संजना को चुनावी मैदान में उतारा। वरिष्ठ कांग्रेस नेता विश्वेंद्र सिंह ने भरतपुर में एक सभा की थी और संजना को बेटी बताया था संजना के नाम पर मुहर लगने के बाद पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने भी अपना समर्थन दिया और वोट की अपील की थी। इसके बाद एक ये चर्चा होने लगी कि अगर पूर्व राजपरिवार के सदस्य विश्वेंद्र सिंह ने संजना को अपनी बेटी माना है तो वह भी हमारी बहन और बेटी हुई। ऐसे में जाट समाज का भी संजना को समर्थन मिला। नतीजा ये रहा कि संजना ने बीजेपी प्रत्याशी को 50 हजार वोट से हरा दिया।

भरतपुर लोकसभा क्षेत्र मे लगभग ढाई लाख के लगभग मुस्लिम मतदाता हैं ।मुस्लिम समुदाय के लोग कांग्रेस के कोर वोटर माने जाते है। मुस्लिम समुदाय के सभी वोट कांग्रेस प्रत्याशी संजना जाटव के पक्ष में गए। मेवात क्षेत्र में पुलिस की आये दिन हो रही कार्रवाई की वजह से भी मुस्लिम समुदाय बीजेपी से नाराज चल रहा था। भरतपुर लोकसभा सीट पर जाट , जाटव , मुस्लिम ,मीणा जातियां एक होकर बीजेपी के खिलाफ हो गई जिसका फायदा संजना जाटव को मिला और वह चुनाव जीत गई।

 

 

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