ममता दीदी ने किया खेला BJP चारों खाने चित

हाल ही में तृणमूल कांग्रेस यानी ममता दीदी ने बीजेपी को एक और झटका देते हुए हल्दिया की बीजेपी विधायक तापसी मंडल को टीएमसी में शामिल कर लिया. पता चला है कि तापसी बजट सत्र में भाग लेने कोलकाता पहुंची और विधान भवन से निकलकर सीधे टीएमसी दफ्तर पहुंच गई। बस इसके बाद से टीएमसी ने बंगाल में एक नारा बुलंद कर दिया कि तापसी तो ट्रेलर है, पिच्चर अभी बाकी है। सबको पता है कि बंगाल में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं और अभी से पश्चिम बंगाल में दीदी ने मोदी सरकार को कड़ी टक्कर देने की पूरी रणनीती बना ली है, जी हां दीदी मोदी सरकार को कमजोर करने के लिए एक एक करके बंगाल में बीजेपी के तमाम बड़े -दिग्जज नेताओं को अपने पाले में कर रही है। दीदी की यह रणनीती कितनी कामयाब साबित हो रही है इस बात से अंदाजा लगा लें कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी विधायकों की संख्या घटकर 77 से 65 हो गई है और साल 2021 से अभी तक बीजेपी के 12 विधायकों को अपने पाले में कर चुकी है। TMC यानी तृणमूल कांग्रेस की प्लानिंग है कि साल 2026 तक बीजेपी की ताकत आधी कर दे और आसानी से चुनाव जीत ले। दीदी की इस प्लानिंग के चलते बीजेपी आलाकमान में जबरदस्त तनाव और चिंता है क्योंकि लाख कोशिश के बावजूद भी वो दीदी के इस रामबाण को भेद नहीं पा रहे हैं। बंगाल में बीजेपी के सामने अपने विधायकों को एकजुट करने की सबसे बड़ी चुनौती है और बीजेपी इस चुनौती का सामना करने में फेल होती दिख रही है।
आखिर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने क्यों मांगी माफी

आखिर संसद में ऐसा क्या हो गया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को डिप्टी स्पीकर हरिवंश से माफी मांगनी पड़ी। दरअसल जब राज्यसभा में नई शिक्षा नीति पर चर्चा चल रही थी तब डिप्टी स्पीकर ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को बोलने के लिए मौका मिला था पर खरगे साहिब बीच में ही खड़े हो गए। स्पीकर ने जब उन्हें बैठने को कहा तो खरगे भड़क गए। उन्होंने जोर से बोला आपको क्या-क्या ठोकना है, हम ठीक से ठोकेंगे। बस फिर क्या था बीजेपी नेताओं ने इसपर जमकर हंगामा किया और मजबूरन खरगे को माफी मांगनी पड़ गई पर हैरानी की बात तो यही है कि कुछ समय पहले ही राज्यसभा में खुद खरगे ने बीजेपी और उसके मंत्रियों को समय पर सदन में आने का ज्ञान दिया था और साथ ही केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा से कह भी दिया था कि विपक्षी दलों को प्रशिक्षण की नसीहत देने वाले नेता सदन को ही इसकी जरूरत है क्योंकि उनके ही सदस्य और मंत्री ही समय पर सदन में नहीं आते हैं। अब जब खरगे पहले ही सदन के समय और सम्मान पर ज्ञान दे चुके थे और उसके बाद उन्होंने ही गलत भाषा का प्रयोग कर डाला तो चर्चाएं यही चल निकली की अगर खरगे माफी नहीं मांगते तो खुद ही अपने नेताओं की नजर में गिर जाते । और सदन में बीजेपी के नेता भी उनका सम्मान नहीं करते। क्योंकि ऐसा तो हो नहीं सकता कि अपने लिए कुछ और नियम दूसरों के लिए कुछ और।
नीतीश की पीठ पर किसने घोपा छुरा

लगता है बिहार में नीतीश कुमार की मुशिकलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं, पहले बीमार रहने, याददाश कमजोर होने की टिप्पणियों से घिरे नीतीश पिछले काफी समय से काफी सजग होकर यह साबित करने की कोशिश में जुटे हैं कि अब भी उनमें पहले जैसा दमखम है और वह एक बार फिर बिहार की गद्दी संभालने के लिए फिट हैं, बिहार की जनता ने इस बात को स्वीकारना शुरू ही किया था कि अचनाक JDU के तीन दिग्गज ने नेताओं ने नीतीश को जबरदस्त झटका देकर JDU यानी लालू की पार्टी ज्वाइन कर ली। माना जा रहा है इससे JDU की टॉप लीडरशिप में ‘क्रैक’ आ गया है क्योंकि इन तीनों नेताओं का बिहार में अपनी जगहों पर पूरी दबदबा है। JDU के प्रदेश महासचिव रामकृष्ण मंडल , शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव दयानंद शर्मा और JDU नेता अविनाश राम ने तेजस्वी की तारीफ करते हुए बिहार को बचाने के लिए RJD में जाने की बात कही। इन तीनों ने लालू के विचार और सामाजिक न्याय की भी तारीफ की, पर चर्चाओं का बाजार गर्म है कि अंदर कुछ और ही बात हुई है। , इतने सालो में इन नेताओं को लालू और तेजस्वी के गुण याद नहीं आए फिर अचानक क्या हो गया। माना यही जा रहा है बिहार में जल्द आने वाले विधानसभा चुनाव में सीटों को लेकर ये नेता नाराज चल रहे थे और मौका पाते ही नीतीश को पीठ दिखा दी।
बिहार में NDA को झटका

राजनीतिक दलों में कुछ कामन हो या ना हो पर चुनाव आते ही सभी बड़ी पार्टियों में एक बात कामन रूप से देखी जाती है और सभी दल इस बात से परेशान भी रहते हैं ,कि कब कोई बड़ा नेता, कोई दल नाराज हो जाए और पार्टी या गठबंधन तोड़कर निकल ले। और इस situation से निकलना हर पार्टी के लिए टेढ़ी खीर के समान ही हो जाता है। अब बिहार में चुनाव आने वाले हैं और तमाम तरह की राजनीतिक उठापठक शुरू हो गई है। और इन्ही सब के बीच कल तक NDA का हिस्सा बनने वाले विकासशील इंसान पार्टी की की बैठक में पार्टी प्रमुख मुकेश सहनी ने बड़ा बयान देकर सबको हैरान-परेशान कर दिया, उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी एनडीए में शामिल नहीं होंगी और आगे भी ऐसा कभी नहीं होगा। साहनी ने कहा कि पार्टी ने संकल्प लिया था कि अगर NDA आरक्षण नहीं देता तो गठबंधन भी नहीं होगा। मुकेश साहनी ने यह भी तंज मार दिया कि 2020 में अहर हम साथ नहीं देते नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं बन सकते थे । पर उसके बाद मोदी सरकार ने निषाद आरक्षण की चर्चा तक नहीं की । इसलिए पार्टी निषाद समाज के हित के लिए अलग हो गई, वैसे चर्चा तो यह है कि सीटों के बंटवारे में कुछ तामझाम हुआ और मुकेश जी नाराज हो गए।
