पाकिस्तान  में जिस तरह से बलूच विद्रोहियों ने 400 यात्रियों से भरी ट्रेंन हाइजैक की  उससे पता चलता है कि  पाकिस्तान के अलग अलग प्रांतों में रहने वाले लोग पाकिस्तान सरकार से कतई खुश नहीं हैं, और पाकिस्तान से अलग होने के लिए कोई भी कदम उठा सकते हैं, और उठा भी रहे हैं।देश में यह घटना बड़ी चर्चा का विषय बनी हुई है और हो भी क्यों ना क्योंकि पाकिस्तान हमारा पड़ोसी मुल्क है और भारत में आतंकवाद फैलाने में इसका बड़ा हाथ है , इस घटना को लेकर डिफेंस सेक्टर में भी काफी चर्चा है और उनका मानना है कि पाकिस्तान को अपनी करनी का फल मिल रहा है। पूर्व मेजर जनरल पी के सहगल मानते हैं कि पाकिस्तान ना केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में आतंकवाद फैला रहा है, आतंकवादियों को पनह दे रहा है और इसका खामियाजा आज खुद ही भुगत रहा है, दूसरे देशों में हिंसा फैलाने वाला देश खुद रोजाना किसी ना किसी प्रकार की हिंसा से जूझ रहा है
 सवाल यही है कि पाकिस्तान के अलग अलग प्रांतों जैसे बलूचिस्तान, सिंघ, गिलगिट पाकिस्तान में बसे लोगों में पाकिस्तनी  सरकार के लिए इतना रोष क्यों है और क्यों ये  लोग क्यों अपना  अलग मुल्क बनाने की मांग के लिए इस तरह की हिंसा पर उतारू हो चुके हैं ।इस बारे में पूर्व मेजर जनरल जे के बंसल का कहना है कि चुंकि पाकिस्तान यहां रहने वाले लोगों के साथ बुरा व्यवहार करती है, उनके संसाधनों पर पूरी तरह से कबजा कर रखा है, उनके क्षेत्र का विकास नहीं हो रहा, चीन के साथ मिलकर सभी संसाधनों को लूट रहा है और यही कारण हैं कि ये लोग सरकार के खिलाफ बगावत पर उतर आए हैं।
पर अपने देश में इतनी बगावत , इतनी हिंसा होने के बाद भी क्या पाकिस्तान संभल जाएगा और खासकर कश्मीर पर अपनी हिंसक गतिविधियां कम करेगा।इस बार में पी के  सहगल का मानना है कि ऐसा शायद ही हो क्योंकि कश्मीर के मुद्दे ने वहां की सेना, सरकार के आस्तित्व को जिंदा रखा है। यही राग गाकर वे अपने देश के लोगों का ध्यान भटकाते हैं, विश्व का ध्यान भटकाते हैं, पर एक्सपर्ट यह भी कहते हैं कि अगर पाकिस्तान नहीं संभला तो   पाकिस्तान में बढ़ता विद्रोह इस देश को विभाजन की ओर ही धकेल रहा है, जे के बंसल  का मानना है कि यहां के लोग सरकार के बहुत ज्यादा खिलाफ हैं और यह लंबे समय तक चला तो पाकिस्तान कईं मुलकों में बंट सकता है। वैसे यह बात ठीक ही है कि  पाकिस्तान जिसमें पनपा आतंकवाद  विश्व के लिए खतरा बना हुआ है पर यही आतंकवाद उसका खुद का आस्तित्व  खत्म करने पर आमादा है।

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