बिहार चुनाव  जैसे जैसे करीब आ रहे हैं यहां जबरदस्त हलचल हो रही है , पहले से ही बिहार में कईं छोटे दल चुनाव लड़ रहे हैं और इन सब के बीच केजरीवाल जी ने भी ऐलान कर दिया बिहार में चुनाव लड़ने का। खैर केजरीवाल से शायद ही किसी को परेशानी हो लेकिन औवेसी जिस तरह से बिहार में बहुत ज्यादा रूचि ले रहे हैं उससे कांग्रेस और RJD में बेचैनी है, जाहिर है मुस्लिम वोट काटने में औवैसी माहिर हैं, पर इससे भी ज्यादा औवेसी जिस तरह बार बार  इंडि गठबंधन में अपनी पार्टी को शामिल करने की अपील कर रहे हैं, बिहार का चुनाव लालू के साथ मिलकर लड़ने की उन्होंने कईं बार खुलेआम इच्छा व्यक्त की है  उससे सस्पेंस पैदा हो रहा है कि आखिर आवैसी चाहते क्या हैं, पर जानकार मानते हैं कि इसके पीछे बड़ी वजह है , जी हां पिछली बार बिहार चुनाव में औवैसी अकेले लड़े थे और पांच सीटों पर विजय पाई थी और उसमें सबसे ज्यादा नुकसान RJD यानी लालू का हुआ, पर लालू ने क्या गजब चाल चली कि पांच में से चार विधायक RJD में शामिल हो गए, औवेसी को करारा झटका लगा और इस बार औवेसी इसलिए बिहार में फूंक फूंक कर कदम रख रहे हैं। congress एक बार फिर उनके विधायक तोड़ ही लेगी, इसलिए औवेसी चाहते हैं कि गठबंधन में शामिल हों, और सीट जीते तो उनके विधायक उनके पास ही पार्टी में रहें और बिहार में उनकी ताकत बढ़ाए

गजब कैसी बेज्जती कर डाली BJP  की

कम ही लोग ये जानते होंगे और ये हैरानी की भी बात है कि बिहार एक ऐसा राज्य है जहां अभी तक बीजेपी ने अपने बलबूते पर सरकार नहीं बनाई है, जी हां उत्तर भारत के बाकी सभी राज्यों में बीजेपी कभी न कभी अपनी सरकार बनाने में सफल रही है पर बिहार में अभी तक बीजेपी की दाल नहीं गली और सरकार बनाने के लिए उसे किसी ना किसी दल का सहारा लेना पड़ा साथ ही  बीजेपी का  नेता  मुख्यमंत्री नहीं बन सका।  यही नहीं हैरानी की बात तो ये भी है कि शुरूआत में जब  लालू यादव पहली बार मुख्यमंत्री बने तो  बीजेपी के सपोर्ट के बाद ही लालू जी सरकार बना पाए पर बाद में लालू  ही बीजेपी के सबसे बड़े विपक्ष बन गए। अब बिहार में चुनाव आने वाले हैं और इसी बात को तूल देकर कांग्रेस बीजेपी का मजाक उड़ा रही है, कांग्रेस ने हाल ही में एक मजेदार वीडियो ट्वीट किया जिसमें एक काली  भैंस स्कूटी चला रही है,  बस  कांग्रेस ने भैंस की तुलना बीजेपी से करते हुए कह दिया कि भैंस तक मोटरसाइकिल चला सकती है पर  बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना मुश्किल है।  अब जाहिर सी बात है कि ऐसा  वीडियो और उसपर यह कमेंट बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बन हुआ है। वैसे मानो या ना मानो यह तो  सच्चाई  भी है कि देश में पूरी तरह से राज करने वाली बीजेपी के पते अभी तक  बिहार में पूरे नहीं पड़ पा रहे हैं और शायद यही वजह है कि इस बार बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनने की कुलबुलाहट हर तरफ देखी जा रही है।

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गद्दार कमेंट पर रवनीत बिट्टू ने सच ही बोला कि राहुल देश के दुश्मन बुधवार को राहुल गांधी का बीजेपी नेता रवनीत बिट्टू को संसद परिसर में गद्दार कहने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, सिख समुदाय इसे पूरे सिख समाज का अपमान बता कर गुस्सा है, यही नहीं राहुल के कमेंट पर उऩके साथ बैठे सिख समुदाय के नेताओं का हंसना भी चर्चा का विषय बन गया है और उनके खिलाफ भी कारवाई की मांग जोर पकड़ रही है, शिरोमणि अकाली दल की बैठक से शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों ही सच्चे हैं, आपको बता दें कि राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू को अपना गद्दार मित्र बता दिया था तो जवाब में बिट्टू ने उन्हें देश का दुश्मन बताया। ममता बनर्जी क्यों बन गई वकील ममता बनर्जी में कुछ हो ना हो एक तो कला जरूर है कि उन्हें पता है कि कैसे ,किस तरह हमेशा ही मीडिया की सुर्खियों में बने रह सकते हैं, कभी अपने बयानों से कभी केंद्र सरकार पर लगाए गए अजीबोगरीब आरोपों के कारण दीदी हमेशा सुर्खियों में रहती हैं और जब से ममता दीदी ने सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर खुद जिरह करने की अपील की है वह बंगाल तो क्या देशभर में चर्चा का विषय बन चुकी हैं, हां यह बात अलग है कि ममता के इस फैसले से ना केवल बीजेपी बल्कि कांग्रेस और कम्यूनिस्ट पार्टी ने ममता को घेरा है और कहा कि यह केवल राजनीतिक प्रोपोगेंडा है , राजनीतिक पैंतरेबाजी है। केंद्रीय मंत्री सुकंत मजूमदार ने इस पर तंज किया और कहा कि ममता बनर्जी ने अदालत की गरिमा को ताक पर रखकर वहां केवल राजनीतिक भाषण दिया। यही नहीं मजूमदार ने दावा किया कि Chief Justice of India ने मुख्यमंत्री को बीच में रोककर उनके वकीलों को बोलने की अनुमति इसलिए दी क्योंकि ममता कानून के बजाय राजनीति की बात कर रही थीं। कांग्रेस प्रवक्ता सौम्या आईच राय ने ममता पर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब राहुल गांधी इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे थे, तब ममता चुप थीं और अब केवल ध्यान भटकाने और अपनी वाहवाही के लिए खुद कोर्ट पहुंच गई हैं।दूसरी तरफ माक्सर्वादी कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता सुजन चक्रवर्ती ने सवाल उठाया कि अगरजनता की परेशानी को लेकर ममता बनर्जी इतनी सीरियस थी तो उन्होंने बहुत पहले प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी? वहीं इस बात को तृणमूल कांग्रेस ऐतिहासिक बता कर पेश कर रहा है। pm को घेरा-आरोप -मारने की कोशिश थी संसद में बजट सत्र के दौरान वो सब हो रहा है जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है, अभी तक देखने -सुनने में आता था कि विपक्ष ने नारेबाजी की , संसद से वाकआउट कर दिया, संसद के बाहर धरना -प्रदर्शन किया, लेकिन बुधवार को जो हुआ वो हैरान करने वाला नजारा था विपक्ष ने ना केवल हंगामा करके संसद को ठप किया बल्कि कईं महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी के बोलने से कुछ पहले ही ना केवल प्रदर्शन शुरू कर दिया। बल्कि कईं सीटों, जिसमें पीएम मोदी की सीट भी शामिल थी, की कुर्सियों को ब्लॉक कर दिया। इन सांसदों ने हाथों में एक बैनर थाम रखा था जिसपर लिखा था , जो सही है, वही करो। ये महिला सांसद मंगलवार को आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन को लेकर अपना विरोध कर रही थी। कई मंत्रियों के हस्तक्षेप के ही ये महिला सांसद अपनी जगह लौटी , इन महिला सांसदों में वर्षा गायकवाड़ और ज्योतिमणि समेत कईं और दलों की महिलाएं शामिल थीं। इस हंगामे की कईं बीजेपी के नेताओं ने निंदा की, बीजेपी नेता मनोज तिवारी का कहना था कि जो भी कुछ हुआ वो डरावना था और महिला सांसदों का मकसद पीएम मोदी पर हमला करना था, मनोज तिवारी ने कहा कि महिला सांसदों को पहले से प्लान बनाकर प्रधानमंत्री की सीट के चारों ओर तैनात किया गया था, वो तो मंत्री किरण रिजिजू ने सूझबूझ दिखाते हुए स्थिति को कंट्रोल कर लिया।