सनातन के खिलाफ बोलना क्या नेताओं ने फैशन बना लिया

सांसद कमल हसन, तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन और शरद पवार की पार्टी में विधायक जितेंद्र आव्हाड में अगर समानता ढंढने को कहेंगे तो आपको लगेगा ये हम क्या कह रहे हैं, इन तीनों में क्या समानता हो सकती है, पर समानता है और वो है सनातन धर्म की निंदा करना , उसके बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने में तीनों ने ही एक दूसरे को पीछे छोड़ दिया। सनातन के विरोध में ताजा बयान अभिनेता से सांसद बने कमल हसन का आया है जिन्होंने सनातन को तानशाह बताते हुए उसकी जंजीरे तोड़ने का आहवान किया, वहीं दूसरी तरफ हाल फिलहाल में शरद पवार पार्टी के नेता जितेंद्र आव्हाड ने अपनी राजनीती चमकाने के चक्कर में सनातन धर्म पर ही एक विरोधी बयान दे दिया और अचनाक ही मीडिया की सुर्खियों में आ गए, उनहोंने कहा कि सनातन धर्म तो कभी था ही नहीं , इससे भारत का पतन हुआ है। बस इसके बाद से ही महाराष्ट्र तो क्या देश की राजनीती गरमाई हुई है।

कब देश की सरकार, कानून व्यवस्था सनातान का विरोध करने वाले नेताओं पर लगाम लगाने में सफल होगी

इससे पहले तमिलनाडू के cm के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू मलेरिया, एचआईवी के मच्छर से करके इसे जड़ से खत्म करने का भद्दा मजाक किया था। इसके बाद कईं और नेताओं ने भी सनातन को बदनाम करने के कुछ बयान दिए , लगता यही है कि नेताओं में सनातन धर्म के बारे में अपशब्द बोलने, उल्टे -सीधे बयान देने का एक फैशन सा बनता जा रहा है या यूं कहिए कि राजनीती में चमकने या अलग-थलग पडें या , गुमनामी में बैठे नेता इस तरह का बयान देकर सुर्खियों में रहना चाहते हैं। सनातन के खिलाफ बोलने पर नेताओं के खिलाफ बयानबाजी तो होती है पर साथ ही शर्मनाक यह भी है कि उनका साथ देने कईं नेता, पार्टी खड़ी भी हो जाती हैं, शुरूआत स्टालिन के बयान से करें तो जब स्टालिन ने सनातन के खिलाफ बोला था तो उस समय एक तरफ धर्मगुरुओं से लेकर राजनेताओं ने उनके बयान पर कड़ी आपति की थी, कई जगहों पर एफआईआर भी दर्ज हुई लेकिन हां शर्मनाक बात यह हुई कि उस समय स्टालिन के बचाव में कईं नेता उतर आए थे, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक खरगे ने यह कह दिया कि कोई धर्म जो आपको समान अधिकार नहीं देता या आपके साथ इंसानों जैसा व्यवहार नहीं करता वह बीमारी के समान ही है। फिर RJD के मनोज झा ने भी उदयनिधि स्टालिन के बयान का समर्थन कर दिया, लेकिन उस समय सरकार या कोर्ट की तरफ से ऐसा कुछ कड़ा कदम नहीं उठाया गया कि कि स्टालिन को सबक मिल सके और यही कारण है कि आज भी कमल हसन, जिंतेद्र जैसा कोई भी नेता जब चाहे मुंह उठाकर सनातन के खिलाफ बोलता है और लाखों-करोड़ों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है। और कोई बड़ी बात नहीं होगी की स्टालिन की तरह जितेंद्र आव्हाड के बयान का समर्थन करने कुछ नेता खड़े हो ही जाएंगे और सनातन के खिलाफ विचार रखने वाले नेताओं को आगे जहर उगलने का एक मौका मिल ही जाएगा, सोचना यही है कि कब देश की सरकार, कानून व्यवस्था ऐसे नेताओं पर लगाम लगाने में सफल होगी जो बोलने की आजादी के नाम पर खुलेआम लोकतंत्र का , धर्म का किसी समुदाय का मजाक उड़ाते नजर आते हैं।

Rahul गांधी कितनी बार सुनना चाहते कोर्ट की फटकार

राहुल गांधी पर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है और उनसे साफ पूछा कि आपको कैसे पता कि चीन ने भारत की जमीन पर कब्जा किया है, सुप्रीम कोर्ट ने यह तक कह दिया कि अगर राहुल गांधी सच्चे भारतीय हैं तो उन्हें सेना के बारे में ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए। कोर्ट ने राहुल गांधी से दो टूक पूछा कि चीन ने भारत की 2000 स्क्वायर किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर लिया है इस जानकारी का आपके पास स्रोत क्या है? क्या कोई ठोस सबूत है , कोर्ट ने राहुल को सलाह भी दी कि संसद में इस मुद्दे को क्यों नहीं उठाते जब सीमा पर विवाद चल रहा हो तो क्या ऐसी बातें करनी चाहिए, आपको बता दें कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने सेना पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए कहा कि लोग भारत जोड़ो यात्रा के बारे में सब पूछेंगे पर लेकिन चीनी सैनिकों ने जो हमारे सैनिकों की पिटाई कर दी उसपर कोई सवाल नहीं पूछेगा, राहुल रूके नहीं और हाथ के हाथ भारतीय जमीन पर चीनी कब्जे का भी दावा कर दिया। हैरानी -परेशानी की बात है कि कोर्ट की ओर से बार बार राहुल गांधी को डांट मिलती है, सलाह मिलती है पर राहुल नहीं सुधर रहे, इससे पहले उन्हें वीर सावरकर पर गलत टिपपणी पर सुप्रीम कोर्ट फटकार लगाई थी और कहा था कि हम स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ किसी को अनाप-शनाप बोलने की इजाजत नहीं दे सकते। इससे पहले भी चौकीदार चोर के बयान पर सुप्रीम कोर्ट ने राहुल को डांट पिलाई और उन्हें बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी थी । सवाल यही है कि विपक्ष के नेता और कांग्रेस के टाप नेता बने राहुल गांधी को कब अक्ल आएगी।

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