किसने लिखवाई Priyanka Gandhi के गायब होने की खबर ?

प्रियंका गांधी के अपने कॉन्स्टिट्यूएंसी वायनाड से गायब रहने की शिकायत आजकल चर्चा में है ,केरल में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं और हर दल इसको लेकर अभी से दूसरे की टांग खींच रहा है। अभी थोड़े दिन पहले सुरेश गोपी को इस मामले में निशाने पर लिया गया था जब उनस प्रश्न किया गया था कि सुरेश गोपी जो हैं वो अपने चुनावी क्षेत्र से लापता हैं क्योंकि वो केंद्र में मंत्री हैं। इसलिए और भी बहुत सारी जिम्मेदारियां हैं उनके पास। लेकिन उन्होंने समझदारी बरतते हुए , एक्स प्रोफाइल पर जाकर के बताया कि वो कहां पर हैं और वो किस तरह से कॉन्स्टिट्यूएंसी में काम कर रहे हैं। इसकी उन्होंने एक्स पर जानकारी दी। लेकिन इसके बाद ही प्रियंका गांधी वाड्रा को लेकर के खबर आई जब उनके खिलाफ मुकुंद पलियार ने जो बीजेपी एससी मोर्चा के नेता हैं उन्होंने एक पुलिस शिकायत दायर की दाखिल की उनकी उनके लापता होने की, क्योंकि वायनाड कास्टीटसी से वो लोकसभा सांसद है जहां से राहुल गांधी जीत के आए थे और उन्होंने रायबरेली रिटेन किया और त्यागपत्र दे दिया वहां से तो अब प्रियंका गांधी वहां से सांसद है लेकिन उनके गायब होने की खबर पर भी चर्चा का विषय बन गई है।वैसे जो बाहरी नेता हैं। चाहे वह राहुल गांधी रहे, चाहे वो प्रियंका गांधी वाड्रा रहे या कोई नेता है। ज्यादातर केसेस में बहुत कम जस्टिस कर पाते हैं और वो अपनी कॉन्स्टिट्यूएंसी नर्चर नहीं कर पाते हैं। क्योंकि ये लोग बड़े नेता हैं। गांधी परिवार के नेता हैं इसलिए चुनाव जीतते रहते हैं। लेकिन अपने संसदीय क्षेत्र नें न्याय नहीं कर पाते और यही शायद प्रियंका के साथ हो रहा है तभी मुकुंद पलियारा ने उनकी गुमशदगी की रिपोर्ट दाखिल कर दी।

America क्यों हो रहा पाकिस्तान का दीवाना

अब बात करें पाकिस्तान की तो , आसिम मुनीर अपनी अमेरिका यात्रा पर हैं और अमेरिका यात्रा के दौरान उन्होंने एक बार फिर अमेरिका से ही भारत को परमाणु हमले की धमकी दी। लगता है आसिम मुनीर जो हैं उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर से कोई सबक नहीं सीखा। हालांकि आसिम मुनीर की धमकी का भारत ने बहुत माकूल तरीके से जवाब दिया। धमकी नहीं उनकी किसी भी योजना का किसी भी हमले का भारत माकूल तरह से ही जवाब देता है। लेकिन इसमें जो दुखद और महत्वपूर्ण बात है उस पर चर्चा की जानी चाहिए। क्या अमेरिका अपने देश की जमीन को किसी दूसरे देश के नेता को इस्तेमाल करने के लिए दे सकता है। एक तीसरे सोबवरन राष्ट्र पर परमाणु हमले की धमकी को लेकर के क्या ऐसा होना चाहिए और क्या ये एथिकली पॉलिटिकली किसी भी दृष्टि से उपयुक्त है उचित है या सही है ये इसकी जवाबदेही जो है वो अमेरिका की है। भारत को पाकिस्तान से असीम आसिम मुनीर से कैसे निपटना है? भारत इस मामले में पूरी तरह से सक्षम है। अमेरिका अपनी रेपुटेशन कैसे बना के रखना चाहता है? क्या वो अपने बिजनेस इंटरेस्ट के लिए अपने एक मजबूत अलायंस पार्टनर को लगातार आहत तकलीफ देना चाह रहा है और धीरे-धीरे संबंध में तीखापन ले आना चाह रहा है। यह अमेरिका का निर्णय है। आसिम मुनीर की ये धमकियां जो है वो चलती रहेंगी। खैर निर्णय अमेरिका का है।

जया बच्चन और सोनियां गांधी फिर आ रहे पास

आजकल सोनिया गांधी और जया बच्चन की बढ़ती नजदीकियां सबके नजर आ रही हैं, सोनिया गांधी और बच्चन परिवार का बहुत पुराना नाता रहा है। अमिताभ बच्चन की माता तेजी बच्चन के जमाने से हरिवंश राय बच्चन के जमाने से यह संबंध चल रहे हैं पर बीच में कुछ डिफरेंसेस आए थे जिसको लेकर के अमिताभ बच्चन ने एक साक्षात्कार में यहां तक कहा था कि हम पर राजा ने दरवाजे बंद कर दिए हैं, उन्होंने कहा था कि रूलर्स हैव शट डोर्स ऑन अस मतलब इस तरह की बात कही थी मतलब ये कि गांधी परिवार ने उनसे संबंध तोड़ा था उन्होंने नहीं तोड़ा था लेकिन इधर कुछ पॉलिटिकल इक्वेशंस इस तरह के बने हैं कि एक मौके पर जब जया बच्चन प्रधानमंत्री और सरकार के खिलाफ बयानबाजी कर रही थी तो पीछे से उनको ना केवल समर्थन देती बल्कि तारीप करती हुई सोनिया गांधी नजर आई। सोनिया गांधी क्योंकि बोल अच्छे से नहीं पाती हैं इसलिए वोकल तो नहीं होती हैं पर अपने हावभाव से सब बोलती हैं और जया बच्चन के लिए उनके भाव आजकल प्रशंसनी ही दिख रहे हैं। एक बैठक में भोजन के दौरान भी जिस तरह से सोनिया और जया बच्चन की बनते दिखी तो दिखाता है कि वो एक बार फिर गांघी परिवार , लोगों को मोदी के खिलाफ लामबंद करने के लिए किस तरह से भी किसी तरह से भी किसी तरह के लोगों से भी समझौता करने के लिए तैयार है और वैसा ही होता नजर आ रहा है।

Rahul Gandhi अब Stray Dogs के लिए कोर्ट की निंदा

राहुल गांधी ने अदालत को आड़े हाथों लिया है वो अभी जो हाल फिलहाल में सुप्रीम कोर्ट का एक निर्णय आया है कि एनसीआर में जितने भी स्ट्रे डॉग्स हैं सड़क पर घूमते हुए आवारा कुत्ते हैं उनको एक शेल्टर में ये जिम्मेदारी है सरकार के म्युनिसिपल कॉरपोरेशंस की कि वो उनको एक शेल्टर में रखें। इसलिए कि शेल्टर में रखने से जो लोगों को काट लोगों को काट लेते हैं वो एक समस्या बना हुआ है। मेनस बना हुआ है। राहुल गांधी ने इसकी आलोचना की है। कार्तिक चिदंबरम ने उसका स्वागत किया है और वो लंबे समय से इसके खिलाफ जो स्ट्रेड्स का मैनेस है उसके खिलाफ कैंपेन करते रहे हैं। तो राहुल गांधी को हर वह चीज जो संवैधानिक और इंस्टीिट्यूशनल तरीके से कही जा रही है उसका विरोध करना है। एक एनार्किक माइंडसेट के साथ वो देश में काम करते हुए नजर आ रहे हैं। वैसे अभी कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी पर बहुत तीखी टिप्पणी की थी। जब उन्होंने भारतीय सेना के खिलाफ उनके एक बयान को लेकर के कि कोई भी राष्ट्रभक्त इस तरह की बात नहीं कर सकता है। तो उसके बाद प्रियंका गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ बयानबाजी की थी। लेकिन जब निशिकांत दुबे कोई बात करते हैं उनके खिलाफ अदालत कोई एडवर्स कमेंट करती है तो वो संविधान जुडिशरीकी स्वायत्तता का पाठ पढ़ाते हैं। अब इसमें दो चीजें हैं। दोनों को समझ लेना जरूरी है कि क्या राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की अदालत के खिलाफ, इलेक्शन कमीशन के खिलाफ और संसद या प्रधानमंत्री के खिलाफ कुछ भी बोल सकते हैं। लेकिन देश का बाकी नेता नहीं बोल सकता है।

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गद्दार कमेंट पर रवनीत बिट्टू ने सच ही बोला कि राहुल देश के दुश्मन बुधवार को राहुल गांधी का बीजेपी नेता रवनीत बिट्टू को संसद परिसर में गद्दार कहने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, सिख समुदाय इसे पूरे सिख समाज का अपमान बता कर गुस्सा है, यही नहीं राहुल के कमेंट पर उऩके साथ बैठे सिख समुदाय के नेताओं का हंसना भी चर्चा का विषय बन गया है और उनके खिलाफ भी कारवाई की मांग जोर पकड़ रही है, शिरोमणि अकाली दल की बैठक से शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों ही सच्चे हैं, आपको बता दें कि राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू को अपना गद्दार मित्र बता दिया था तो जवाब में बिट्टू ने उन्हें देश का दुश्मन बताया। ममता बनर्जी क्यों बन गई वकील ममता बनर्जी में कुछ हो ना हो एक तो कला जरूर है कि उन्हें पता है कि कैसे ,किस तरह हमेशा ही मीडिया की सुर्खियों में बने रह सकते हैं, कभी अपने बयानों से कभी केंद्र सरकार पर लगाए गए अजीबोगरीब आरोपों के कारण दीदी हमेशा सुर्खियों में रहती हैं और जब से ममता दीदी ने सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर खुद जिरह करने की अपील की है वह बंगाल तो क्या देशभर में चर्चा का विषय बन चुकी हैं, हां यह बात अलग है कि ममता के इस फैसले से ना केवल बीजेपी बल्कि कांग्रेस और कम्यूनिस्ट पार्टी ने ममता को घेरा है और कहा कि यह केवल राजनीतिक प्रोपोगेंडा है , राजनीतिक पैंतरेबाजी है। केंद्रीय मंत्री सुकंत मजूमदार ने इस पर तंज किया और कहा कि ममता बनर्जी ने अदालत की गरिमा को ताक पर रखकर वहां केवल राजनीतिक भाषण दिया। यही नहीं मजूमदार ने दावा किया कि Chief Justice of India ने मुख्यमंत्री को बीच में रोककर उनके वकीलों को बोलने की अनुमति इसलिए दी क्योंकि ममता कानून के बजाय राजनीति की बात कर रही थीं। कांग्रेस प्रवक्ता सौम्या आईच राय ने ममता पर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब राहुल गांधी इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे थे, तब ममता चुप थीं और अब केवल ध्यान भटकाने और अपनी वाहवाही के लिए खुद कोर्ट पहुंच गई हैं।दूसरी तरफ माक्सर्वादी कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता सुजन चक्रवर्ती ने सवाल उठाया कि अगरजनता की परेशानी को लेकर ममता बनर्जी इतनी सीरियस थी तो उन्होंने बहुत पहले प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी? वहीं इस बात को तृणमूल कांग्रेस ऐतिहासिक बता कर पेश कर रहा है। pm को घेरा-आरोप -मारने की कोशिश थी संसद में बजट सत्र के दौरान वो सब हो रहा है जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है, अभी तक देखने -सुनने में आता था कि विपक्ष ने नारेबाजी की , संसद से वाकआउट कर दिया, संसद के बाहर धरना -प्रदर्शन किया, लेकिन बुधवार को जो हुआ वो हैरान करने वाला नजारा था विपक्ष ने ना केवल हंगामा करके संसद को ठप किया बल्कि कईं महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी के बोलने से कुछ पहले ही ना केवल प्रदर्शन शुरू कर दिया। बल्कि कईं सीटों, जिसमें पीएम मोदी की सीट भी शामिल थी, की कुर्सियों को ब्लॉक कर दिया। इन सांसदों ने हाथों में एक बैनर थाम रखा था जिसपर लिखा था , जो सही है, वही करो। ये महिला सांसद मंगलवार को आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन को लेकर अपना विरोध कर रही थी। कई मंत्रियों के हस्तक्षेप के ही ये महिला सांसद अपनी जगह लौटी , इन महिला सांसदों में वर्षा गायकवाड़ और ज्योतिमणि समेत कईं और दलों की महिलाएं शामिल थीं। इस हंगामे की कईं बीजेपी के नेताओं ने निंदा की, बीजेपी नेता मनोज तिवारी का कहना था कि जो भी कुछ हुआ वो डरावना था और महिला सांसदों का मकसद पीएम मोदी पर हमला करना था, मनोज तिवारी ने कहा कि महिला सांसदों को पहले से प्लान बनाकर प्रधानमंत्री की सीट के चारों ओर तैनात किया गया था, वो तो मंत्री किरण रिजिजू ने सूझबूझ दिखाते हुए स्थिति को कंट्रोल कर लिया।