बिहार में बड़ी संख्या में वोटर्स कटे

बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन एसआईआर था वो पूरा हुआ। उसकी वोटर लिस्ट फाइनल घोषित करने की जो 30 तारीख थी वो पूरा हो गई। पहले दौर में जब प्रोविजनल लिस्ट जारी की गई थी तो 65 लाख लोगों के नाम कटे थे। जब फाइनल लिस्ट आई तो लगभग 69 लाख लोगों के कुल नाम कटे हैं। नाम काफी जुड़े भी हैं। लेकिन जो फाइनल टैली आई है जो फाइनल लिस्ट आई है वो लोकसभा चुनाव में 7.89 करोड़ मतलब 7.89 करोड़ वोटर्स थे वो घट के 7.42 करोड़ यानी 47 लाख वोटरों की में कमी आई है। अब इसको लेकर के राजनीति हो रही है। राजनीति राजनीति होना लाजमी है। बिहार में बहुत सारे ऐसे हैं जो वोटर्स के नाम हटे हैं। ज्यादातर लोग ऐसे हैं जो माइग्रेट करके दूसरे शहरों में दूसरे स्टेट्स में चले गए हैं। वैसे लोग हैं जो जिनकी मृत्यु हो गई है और ऐसे लोग हैं जिनके दो बार नाम हैं। तो यह कुल मिलाकर ये कारण हैं जिसके कारण वोटर्स के नाम घटे हैं। अब एसआईआर की प्रक्रिया को जो इन प्रिंसिपल आपके जो कहिए वो पूरे देश में किए जाने का जो सुप्रीम जो इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया का इरादा है या उनका जो मैंडेट है उसको सुप्रीम कोर्ट ने मतलब सुप्रीम कोर्ट ने उस पर कोई रोक या ऐसा नहीं लगाया है।

पशिचम बंगाल से भी बहुत ज्यादा माइग्रेशन


अगला चुनाव जो है वो पश्चिम बंगाल का है। उसके बाद फिर तमिलनाडु का है। उसके बाद फिर और बहुत सारे स्टेट्स हैं। लेकिन वो पूरी प्रक्रिया ये जो एसआईआर वाली प्रक्रिया है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन वाली ये पूरे देश में की जाएगी और एक के बाद एक। लेकिन अगला पड़ाव वो पश्चिम बंगाल का है। अब पश्चिम बंगाल पर यह किया जाना या एसआईआर की जो प्रक्रिया है उसको लेकर के महत्वपूर्ण कई कारणों से पहले कारण पर चर्चा कर लेते हैं। उसके बाद जो राजनीतिक बयानबाजी है उस पर भी आएंगे। कारण क्या है? कारण यह है की जो बातें कही जाती हैं कि सबसे ज्यादा माइग्रेशन जो है वो बिहार से के लोगों का होता है नौकरी के लिए जो पलायन है वो बिहार के लोगों का होता है। नौकरी को लेकर के दूसरे शहरों में बेहतर अपॉर्चुनिटीज है। लेकिन लेकिन ये एक बहुत बड़ा मिथ है। केवल बिहार से लोग माइग्रेट नहीं करते हैं। पश्चिम बंगाल से भी लगभग उतने ही लोग माइग्रेट करके दूसरे शहरों में जाते हैं। उसके कई कारण है। पहला यह जॉब अपॉर्चुनिटीज़ अह खत्म हो रही हैं। ख़त्म हो गई है पश्चिम बंगाल में। दूसरा लॉ एंड ऑर्डर एक बड़ी समस्या हो गई है। स्पेशली मतलब ऐसे तो पूरे कोलकाता में भी लॉ एंड ऑर्डर बड़ा इशू है।

बिहार से मिलती हैं पशिचम बंगाल की समस्याएं


लेकिन रूरल एरियाज में या उन एरियाज बहुत सारे ऐसे पॉकेट्स हैं जहां पर मतलब जो जहां पर कंगारू कोर्ट्स चलते हैं और अगर किसी कोई व्यक्ति एक्स्ट्रा मैरिटल रिलेशंस में है तो उसका फैसला अदालत में नहीं होता है। वहां के लोग जो वहां का डोमिनेंट व्यक्ति होता है वो पब्लिकली विपिंग करता है। कोड़े मारता है और इस तरह के बहुत सारे केस सामने आए हैं। पॉलिटिकल किलिंग्स महत्वपूर्ण है। चुनाव के बाद कितने लोगों को आसाम में जाकर के शरण लेना पड़ा था। उसके अलावा जो मुस्लिम डोमिनेटेड एरियाज है वहां से लोगों का पलायन होता है। तो यह यह बड़े फैक्टर्स हैं। तो अब जो लोग अपना अब जैसे मुर्शिदाबाद में जब वक्फ वाले मामले पर दंगे हुए थे तो वहां के लोग वहां से भागकर दूसरे जिलों में चले गए थे। तो ये भी एक बड़ा कारण है। तो पलायन केवल बिहार का मसला नहीं है। पश्चिम बंगाल में भी उतना है। उतना ही बड़ा मसला है। लॉ एंड ऑर्डर मैंने बताया। पॉलिटिकल किलिंग्स बताया और जो जिसको आप ये भी कह सकते हैं कि इतनी क्लींजिंग जैसा है जो मुस्लिम डोमिनेटेड एरियाज है वहां से हिंदुओं को खदेड़ा जाता है।

 

पूरे पश्चिम बंगाल में इनफिल्ट्रेशन एक बड़ी समस्या

इन सब के बीच एक सबसे महत्वपूर्ण मसला है वो ये है कि इनफिल्ट्रेशन जो हो रहा है पश्चिम बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल में वो एक बड़ी समस्या है। यह समस्या अगर बिहार के चार जिलों में है जो सीमांचल के चार जिलों में है पूर्णिया और किशनगंज और आसपास दो और जिले पास के वो समस्या बिहार पश्चिम बंगाल में लगभग सब जगह सारे जिलों में है और उसमें मुर्शिदाबाद उत्तर 24 परगना दक्षिण 24 परगना वीरभूम ये सारे इलाके बहुत सारा लगभग पूरे पश्चिम बंगाल में इनफिल्ट्रेशन एक बड़ी समस्या है बांग्लादेश और बिहार कि हिंदी स्पीकिंग एरिया है वहां पर थोड़ा मुश्किल होता है। हालांकि मुश्किल पूरे देश में नहीं है। बांग्लादेश घुसपैठिए पूरे देश में फैले हुए हैं और अपने आप को पश्चिम बंगाल का निवासी बता करके रहते हैं। और ये मैं नहीं कह रहा हूं। ये कांग्रेस के तब के गृह राज्य मंत्री अह जयसवाल साहब ने कहा था। किरण रिजजू साहब ने कहा था। संसद में कहा था। बाहर तो जो बोलते रहते हैं वोबोलते ही रहते हैं। संसद में श्री प्रकाश जायसवाल ने बोला था। किरण रिजूज ने बोला था। अब और उन्होंने एक ने डेढ़ बोला था। दूसरे ने बोला था लगभग 2 करोड़ के आसपास। अब दो करोड़ के आसपास घुसपैठि है और पूरे देश में फैले हुए हैं। लेकिन वो किसी न किसी तरह से अपना जो आधार बनवा लेते हैं पैसा देकर के और लीगल डॉक्यूमेंट्स राशन कार्ड बनवा लेते हैं और उसके आधार पर उनका वोटर आई कार्ड बनवा जाता है। तो उसको अह वीड आउट कैसे किया जा सकता है? उसको वीड आउट इस तरह से किया जा सकता है कि इंटेंसिव अह वोटिंग मतलब इंटेंसिकइंटेंसिव रिवीजन हो। उस रिवीजन के बाद जो लोग इस देश के नागरिक नहीं है उनको वोटर लिस्ट से हटाया जाए। अब बहुत सारे वोटर्स बिहार में हटे हैं ये और ये पूरे देश में किया जाना चाहिए और पश्चिम बंगाल में भी वही किए जाने की लेकिन अब इसमें पहले दिन से विरोध शुरू हो गया जब से यह बात कही जाने लगी कि पूरे देश में किया जाएगा। ममता बनर्जी ने तो यहां तक धमकाया था कि वह एसआईआर बिहार में पश्चिम बंगाल में नहीं होने देंगी। अब संवैधानिक अधिकार जो है चुनाव आयोग का उसको रोकने में बाधा पैदा करेंगी। अब इसका दूसरा बड़ा फैक्टर है। उनको मालूम है कि जिस तरह से लगभग 70 लाख वोटर बिहार में हटाए गए हैं। वैसे ही वोटर्स हटाए जाएंगे पश्चिम बंगाल में। पश्चिम बंगाल में क्या बहुत सारे ऐसे वोटर्स नहीं है जिनकी डेथ हो गई है? क्या पश्चिम बंगाल में ऐसे वोटर्स नहीं है जो माइग्रेट करके दूसरे शहरों में नौकरी करने के लिए जाए आप आप मतलब आप बड़े सॉफ्टवेयर कंपनी से लेकर के और मजदूरी करने वाले तक को आप बंगालियों को आ पूरे देश में कहीं भी पा सकते हैं और ज्यादातर जो लोअर तबका है वो सरकारी जमीन पर झुग्गिया डाल के इललीगल तरीके से रह रहा है और उसमें बड़ी बड़ी संख्या बांग्लादेशियों की है। खैर तो ये जो ये जो सारे लोग हैं जो अवैध नागरिक हैं जिनकी डेथ हो गई है जिनके वोटर कार्ड दूसरी जगह भी बन गए हैं। जैसे कोई पश्चिम बंगाल का नागरिक है और वो बेंगलुरु में रह रहा है। वो चेन्नई में रह रहा है। वो मुंबई में रह रहा है। वो नोएडा में रह रहा है। वो गाजियाबाद में रह रहा है। वो गुड़गांव में रह रहा है। वो हैदराबाद में रह रहा है। वो और किसी बड़े शहर में रह रहा है, वो पुणे में रह रहा है। तो इन लोगों को हटाना पड़ेगा। लेकिन इस पर आक्रमक शुरू एक दूसरे पर पॉलिटिकल वो शुरू मतलब पॉलिटिकल आक्षेप शुरू हो गया है। लेकिनकि ये संवैधानिक मैंडेट है। तो सरकार इसको करने के लिए कटिबद्ध है। जरूर करेगी और बिना इसके नहीं होगा। इसलिए कि सुप्रीम कोर्ट ने भी यह कहा है कि इनफिल्ट्रेशन जो है वो इंटरनल एग्रेशन है भारत पर। एक बात दूसरी बात यह कि क्या यह तर्क कि हमको लीनियंसी बरतनी चाहिए कि यह सही है या यह सही तर्क है कि जिनको वोट देना है जिनको पास वोटिंग राइट है वो केवल भारतीय नागरिक होने चाहिए और इस बात को इंश्योर करने के लिए पूरी सख्ती से काम किया जाना चाहिए इसलिए कि यह भारत के गरीब लोगों के हक पर कब्जा किए हुए लोग हैं। तो यह बहुत महत्वपूर्ण बात है। इस पर विरोध होगा। लेकिन मुझे लगता है कि जिस तरह से रिजोल्व सरकारों का या रिजॉल्व इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया का बहुत मजबूत है। यह वो करा पाएगी।
देने के लिए हमें मेल कीजिए  eyeoftruth.6@gmail.com

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