क्या जल्द ही JDU  का विलय हो जाएगा BJP  में 

जिस तरह से JDU नेता राजीव रंजन या जिस नाम से उनको जाना जाता है लल्लन सिंह और संजय झा,  दोनों जनता दल यू के नेता हैं। राजीव रंजन केंद्रीय मंत्री हैं। जिस तरह से इन दोनों नेताओं की सक्रियता दिखाई दे रही है। विशेष रूप से बीजेपी की तरफ बढ़ती नजदीकियां ना केवल पॉलिटिकल नजदीकियां बल्कि आईडियोलॉजिकल नजदीकियां। उससे लगता है कि यह दोनों नेता एक एजेंडे के तहत काम कर रहे हैं, और वो एजेंडा है जनता दलियों का भारतीय जनता पार्टी के साथ मर्जर। इस तरह के कयास और इस तरह की बातें ना केवल बिहार में बल्ली बल्कि दिल्ली में भी लगाए जा रहे हैं कि जनता दल यू के नेता नीतीश कुमार मुख्यमंत्री के पद पर हैं। लेकिन उनके स्वास्थ्य को लेकर के बहुत सारे प्रश्न किए जा रहे हैं और उनके स्वास्थ्य को लेकर के प्रश्न हैं। जो  सारी चीजें  निकल कर के आ रही हैं उससे यही साफ होता है कि वो हेल्थ के हिसाब से इस स्थिति में नहीं है कि बहुत सारे निर्णयों को वो कर पाए और एक समझौते के तहत और एक जो पुराना समझौता है जनता दल और भारतीय जनता पार्टी का उसके तहत वो मुख्यमंत्री के पद पर हैं और मुख्यमंत्री का दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। लेकिन यह  लगभग एक तरह से स्थिति बनती जा रही है कि आज नहीं तो कल  दोनों दल मर्ज हो सकते हैं। और जो भारतीय जनता पार्टी की लंबे समय से ख्वाहिश रही है कि बिहार में उनकामुख्यमंत्री हो तो क्या ये उसी दिशा की तरफ बढ़ते हुए दिख रहे हैं ये एक बड़ा प्रश्न है और अगर जो इंडिकेशंस हैं या जो इस तरह की बातें हो रही हैं उससे यह लग रहा है कि कुछ बिहार में बड़ा होने वाला है नीतीश कुमार के बाद कोई ऐसा नेता नहीं है जो जनता दल यू को एक रख पाए संगठित रख पाए और वैसी ही धमक हनक बना करके रखे इसलिए इन सबको देख के ऐसा लग रहा है कि यह आज नहीं तो कल विलय होगा और संजय झा जो राज्यसभा के सदस्य हैं और ललन सिंह जो केंद्रीय मंत्री हैं उससे यह लग रहा है उनकी गतिविधियों से और भाजपा के भी बहुत सारे नेता के बॉडी लैंग्वेज या उनकी बातचीत से विलय का कुछ मामला होता हुआ दिख रहा है।

 

औवैसी अब देंगे यूपी में जाकर योगी को चुनौती 

जिस तरह से बिहार में उसके बाद महाराष्ट्र में ऑल इंडिया मज इत्तहादुल मुस्लिमीन जो अकबरुद्दीन असदुद्दीन ओवैसी जिसके अध्यक्ष हैं लोकसभा सदस्य हैं हैदराबाद से उनकी पार्टी ने सफलता हासिल की है। बिहार विधानसभा में पांच सीटें उन्होंने जीती हैं और लगभग 125 काउंसिल की सीटें उन्होंने महाराष्ट्र में जीती हैं। कुछ जगहों पर तो वह 202 के आसपास जीती है।  नवी  मुंबई  में पिछले चुनाव में उनके पास दो सीटें थी। इस बार वह आठ सीटें जीत के आई और उनकी एक पार्षद ने विवादित बयान भी दिया था। हालांकि विवादित बयान अभी अकबरुद्दीन ओवैसी भी देख रहे हैं।  वह सीधे चैलेंज करते हुए नजर आ रहे हैं योगी को कि हम उत्तर प्रदेश में आएंगे। योगी के राज्य में आएंगे। वहां अपना झंडा गाड़ेंगे। जैसे बाकी सब जगहों पर उन्होंने अपना झंडा गाड़ा है। ये बातें हो रही हैं। अब उत्तर प्रदेश में लगभग 19.5% के आसपास मुसलमान हैं। तो वह कहां पर कहां-कहां पर विधानसभा के चुनाव लड़ेंगे? और उसका अकेले लड़ेंगे या अलायंस के साथ लड़ेंगे। अकेले लड़ेंगे तो निश्चित तौर पर वह बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को नुकसान पहुंचाएंगे। अलायंस के साथ लड़ेंगे तो भारतीय जनता पार्टी को नुकसान पहुंचाएंगे। इसलिए कि मुसलमान तो भारतीय जनता पार्टी को वोट नहीं देता है। लेकिन अगर वह उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ अलायंस करते हैं तो निश्चित तौर पर मुसलमान एक साथ वोट करेगा। लेकिन इसमें एक और महत्वपूर्ण बात है कि अगर अलग-अलग लड़ेंगे तो निश्चित तौर पर वोट का बंटवारा होगा और उस स्थिति में भाजपा को फायदा होगा।

 

विपक्ष नहीं चाहता संसद चले -ओम बिरला के खिलाफ एक सोची समझी चाल 

विपक्ष  चाहे वो कांग्रेस हो, जनता दल कांग्रेस हो, आरजेडी हो, तृणमूल कांग्रेस हो या और जितने भी चाहे वो आईएडीआईए के सभी पार्टनर्स हो वो  हमलावर हो गए हैं लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला पर और उनके खिलाफ एक प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। मोशन ऑफ रिमूवल ऑफ स्पीकर। उनका इन पार्टियों का दावा है कि जो ओम बिरला या स्पीकर ओम बिरला है उनका व्यवहार पक्षपात पूर्ण है और इसको लेकर के वो बहुत सारी बात कर रहे हैं। कुछ अभी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ये दावा भी किया था कि वो लोग उनके चेंबर में मिलने गए थे। उनको ये प्रॉमिस किया गया था कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने दिया जाएगा। जिसको सीधे तौर पर जो संसदीय कार्य मंत्री हैं किरण रिजजू ने बताया क्योंकि झूठ जो है वह असंसदीय भाषा है इसलिए उन्होंने यह बोला कि जो नेता प्रतिपक्ष बोल रहे हैं वो सत्य 100% सत्य नहीं है। मतलब ये कि वो झूठ नहीं बोलना चाह रहे थे। वो असत्य कहना चाह रहे थे। तो ये स्थिति इस तरह की है। लेकिन एक नो कॉन्फिडेंस मोशन लाने की तैयारी हो रही है नेता प्रतिपक्ष पर । निश्चित तौर पर इसका सिर्फ एक मैसेजिंग होगी। इसलिए कि जो बहुमत है वह उनके पक्ष में नहीं है और वह नेता वह स्पीकर को हटा नहीं सकते हैं। लेकिन यह एक डिसरप्टिव जो स्कीम है आईएडीए का या विपक्ष का उसी का हिस्सा नजर आता है। लेकिन ये जो अग्रेशन है ये लगातार जारी है और ये पार्लियामेंट को पार्लियामेंट पर कोई बहस नहीं होने देना चाह रहा है और इस मामले में कई कई बार विपक्ष एकजुट दिखता है। हालांकि बहुत सारे मामले में विपक्ष एक साथ नजर नहीं आता है। इस पर हम आगे भी देखते रहेंगे कि विपक्ष क्या करता है

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