CONGRESS पार्टी पर खत्म होती जा रही है Sonia -Rahul की पकड़ क्या ?

कांग्रेस के अंदर बाहर काफी दिनों से यही चर्चा चल रही है कि कांग्रेस में लीडरशिप बिल्कुल खत्म हो चुकी है, कांग्रेस नेताओं में आलाकमान का डर और अनुशासन में रहना बिल्कुल खत्म सा हो रहा है, कारण कांग्रेस के अंदर बढ़ती गुटबाजी , कौन लीडर है पता ही नहीं चलता जिसके कारण जिस नेता का जो मन कर रहा है वो वही कर रहा है, अब इसका जीता जागता Example बिहार में देखने को मिला , जी हां हाल ये है कि बिहार में जिन कांग्रेस विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं किया उनके खिलाफ कार्रवाई करने से कांग्रेस हिचक रही है। वजह साफ है इन तीन विधायकों ने वफादारी तो नहीं दिखाई पर इनकी गद्दारी कैसे साबित की जाए और कहीं गद्दारी साबित करने का खामियाजा खुद कांग्रेस को ही ना भुगतना पड़ जाए आपको बता दें कि मनोहर सिंह, सुरेंद्र कुशवाहा और मनोज विश्वास कांग्रेस के तीन विधायक जिन्होंने राज्यसभा चुनाव में वोटिंग नहीं की, इन तीनों पर आरोप है कि इन्होंने महागठबंधन के उम्मीदवार एडी सिंह को अपना वोट नहीं दिया। पर इन्होंने क्रॉस वोटिंग नहीं किया। इससे कांग्रेस को साफ लग रहा है कि कारण पूछने पर सभी कोई ना कोई निजी वजह बता कर पीछा छुड़ा लेंगे और उनकी अपनी ही किरकिरी होगी। । ठीक उसी तरह की जैसे RJD के विधायक फैसल अली ने कहा कि मैं अपनी मां के इलाज के लिए बिहार से बाहर था। और अगर कांग्रेस सख्त कदम अपनाकर इन विधायकों को निलंबित भी करती तो ना केवल ये विधायक को मिलने वाले सभी सुविधाओं का उपभोग करेंगे बल्कि निष्कासित होने पर बड़े आराम से ये किसी दूसरे दल में चले जाएंगे और बिहार में कांग्रेस की संख्या 6 से 3 रह जाएगी। यही चर्चा चल रही है कि नेताओं पर कांग्रेस आलाकमान को रौब या डर खत्म हो रहा है क्योंकि सबको पता चल रहा है कि उनके बिना कांग्रेस का गुजारा नहीं पहले से ही सिमटती कांग्रेस अगर ऐसा करती है तो बिल्कुल ही हाशिए पर आ जाएगी।
Congress को डर कही बिहार में विधायक 6 से 3 ना हो जाएं

लेकिन दूसरी तरफ उड़ीसा में कांग्रेस बेफ्रिक नजर आई और क्रॉस वोटिंग करने वाले तीन विधायकों को कांग्रेस ने निलंबित कर दिया। हरियाणा में क्रॉस वोटिंग के चलते कांग्रेस कार्रवाई करने की सोच रही है पर बिहार में कांग्रेस का अलग रूख देख खुद कईं कांगेसी लीडर नाराज हैं और मान रकहे हैं इससे पार्टी में अनुशासनहीनता को बढ़ावा मिलेगा। वैसे कांग्रेस के पास एक दूसरा आप्शन विधानसभा अध्यक्ष को शिकायत करने का हैं जिससे इन तीन विधायकों पर कारवाई हो पर यहां भी कांग्रेस को पता है कि इसमें कुछ नहीं होने वाला है। विधानसभा अध्यक्ष जिस प्रोसेस से कारवाई करेंगे वो प्रोसेस इतना धीरे है उसकी तुलना कई जो राजनीतिक विशेषज्ञ हैं वो कोर्ट से करते हैं कि तारीख पर तारीख डल रही है और कुछ नहीं हो रहा है। तो कांग्रेस को ये भी डर है कि इनकी शिकायत करेंगे वहां पे कुछ होगा नहीं और बदले में ये पार्टी छोड़ देंगे जिससे उनकी जो छह की संख्या है वो सिमट कर तीन पर आ जाएगी और क्योंकि 2024 में आरजेडी के चार विधायकों ने आरजेडी छोड़ी थी तो बकायदा उनकी शिकायत विधानसभा अध्यक्ष को की गई थी लेकिन हुआ कुछ नहीं मामला चलता रहा और हुआ कुछ नहीं तो कांग्रेस ये अच्छी तरह से जानती है कि होने वाला कुछ नहीं है इसलिए वो चुप हो के बैठी है और तर्क यही दिया जा रहा है कि उनके पास एक्सक्यूज है कि क्रॉस वोटिंग तो नहीं किया इसलिए कुछ नहीं हुआ।
Congress में डूबता भविष्य है कारवाई भी हो तो क्या हो जाएगा

लेकिन वास्तव में हालात यही है और जो चर्चाएं चल रही है वो बिल्कुल ठीक है कि आजकल जिस नेता का जो मन कर रहा है वो कांग्रेस में कर रहा है उसको पता है कि कार्रवाई कुछ नहीं होनी और अगर होनी है तो कॉन्सक्वेंसेस के लिए भी कांग्रेस के नेता तैयार बैठे हैं क्योंकि उनको पता है कि कांग्रेस में उनका भविष्य क्या है भविष्य उनका कांग्रेस में सॉलिड नहीं है। बाहर जाएंगे कुछ ना कुछ उनको रास्ता मिल जाएगा।बिहार में बिल्कुल सीधे तौर पर ये देखने में आया कि कांग्रेस में जो डिसिप्लिन है जो अनुशासन है जो डर है वो बिल्कुल खत्म सा हो गया।
