Bihar तो संभला नहीं तेजस्वी विपक्ष के पोस्टर boy कैसे बनोगे
राजनीती के गलियारों में इस समय तेजस्वी यादव को लेकर काफी तंज चल रहे हैं. टीका टिप्पणी हो रही है और कहा जा रहा है कि तेजस्वी से बिहार में तो RJD संभल नहीं रही पर वो दिल्ली में विपक्षी एकता का ‘पोस्टर बॉय’ बनने के लिए आतुर हैं, दरअसल चर्चा शुरू होने की पीछे बड़ी वजह भी है, जी हां पता चला है कि 27 मई को तेजस्वी यादव अपने पुत्र का जन्मदिन गाजियाबाद में मना रहे हैं , कहने को तो ये उनके पुत्र का पहला जन्मदिन है इसलिए भव्य पार्टी दी जाएगी, पर जब इसमें बुलाए जाने मेहमानों के बारे में खबर आती है तो पता चलता है कि जन्मदिन पार्टी की आड़ में तेजस्वी विपक्ष को जोड़ना चाह रहे हैं और विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन दिखाना चाह रहे हैं क्योंकि इसमें राहुल गांधी, अखिलेश यादव से लेकर अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी तक को आने का न्योता दिया गया है। पता चला है कि लालू को 29 मई को सिंगापुर आंखों के इलाज के लिए जाना है और इसी कारण वो दिल्ली में हैं बस तभी से चर्चा चल निकली है कि लालू और तेजस्वी जन्मदिन के बहाने विपक्ष के नेताओं के साथ भविष्य की रणनीति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वैसे बिहार चुनाव के बाद देखा गया है कि तेजस्वी यादव की अपनी पार्टी यानी rjd पर पकड़ ढीली पड़ती जा रही है और शायद यही कारण है कि वो विपक्षी एकता के बहाने गठबंधन में अपनी पैठ बढ़ाने और पोस्टर बाय बनने का सपना देख रहे हैं, पर जब तेजस्वी यादव अपनी पार्टी को ही नहीं संभाल पा रहे तो देश के बड़े नेताओं की पार्टियां उनकी क्षमता पर कैसे यकीन करेंगी, ये बात तेजस्वी को जितनी जल्दी समझ आ जाए उनके लिए बेहतर है, उन्हें ये भी समझना पड़ेगा जब ममता बनर्जी, राहुल गांधी अरविंद केजरीवाल ने नीतीश कुमार जैसे वरिष्ठ और योग्य नेता को सम्मान नहीं दिया तो तेजस्वी की बात ही क्या है?
तेजस्वी याद करो बैन किया था हरा गमछा-आज इस पर जाति धर्म की बात क्यों
कहते हैं ना राजनीती में नेताओं के विचार, बयान, दोस्ती पलभर में समय के हिसाब से बदल जाती है, बस फायदा होना चाहिए सब कुछ बदल जाता है, अब बिहार में तेजस्वी यादव को ही ले लीजिए , एक समय था जब तेजस्वी यादव ने अपनी पार्टी में ही हरे गमछे को बैन कर दिया था। जी हां, सितंबर 2025 को जब तेजस्वी यादव संवाद यात्रा पर निकले थे, तब कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश था कि वो संवाद यात्रा के दौरान हरे गमछा न पहने, इसके बदले सभी हरी टोपी और बैज लगाएं। साथ ही साथ कार्यकर्ताओं के गमछा लहराने पर भी रोक लगा दी थी।लेकिन आज मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हरे गमछे के बयान को तेजस्वी धर्म से जोड़ कर देख रहे हैं और राजनीती कर रहे हैं, दरअसल हाल ही में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हरे गमछे वालों को पकड़ने की बात कही थी, बस विपक्ष और खासतौर पर तेजस्वी ने मौके को लपक लिया और हरे रंग को जाति, धर्म से जोड़ लिया, साथ ही उन्होंने दी, पुलिस एनकाउंटर को भी जाति विशेष अभियान बताया, तेजस्वी यादव इस बयान को मुस्लिम और यादव से जोड़ से जोड़ कर अपनी रोटियां सेकने में लगे हैं। तेजस्वी कह रहे हैं कि हरा गमछा हो या नीला गमछा, मुख्यमंत्री के अंदर कितना विद्वेष भरा है इसका पता चलता है , ये लोग देश के साथ बिहार में भी लोगों को बांटने का काम कर रहे हैं। वैसे आपको बता दें कि बिहार में गमछे का अलग-अलग रंग अलग-अलग राजनीति के संकेत ले कर चलता है, जैसे गमछा हरा हुआ तो rjd , नीला हुआ तो बसपा या अन्य दलित पार्टियां, लाल हुआ तो वाम दल और तमाम जनवादी संगठन।
