Karnatka — कद्दावर नेता खुल कर बोले  Congress में corruption

कर्नाटक में पूर्व मुख्यमंत्री सीधा रमैया और वर्तमान मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच की जो अदावत है वह सबको मालूम है। किस तरह से डीके शिवकुमार ने दबाव डालकर के सीधा रमैया को त्यागपत्र दिलवाया और मुख्यमंत्री पद पर बने रहे। लगातार इस बात की रस्साकसी भी चल रही है कि मंत्रालय में किसको जगह मिलनी चाहिए, किसका डोमिनेंस होना चाहिए। लेकिन इस बीच सीधारमैया ने यह घोषणा की कि 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। अब इसके कई मायने हैं। वह लंबे समय से विधायक रहे हैं और ओबीसी पॉलिटिक्स में है काफी प्रभावशाली है वो और इस बात को कांग्रेस जानती है। इन सबके बावजूद सीधारमैया को अपना पद छोड़ना पड़ा डीके शिव कुमार के लिए। अब डीके शिव कुमार का महत्व कर्नाटक की राजनीति में इसलिए ज्यादा है कि वो फाइनेंससेस संभालते हैं। कांग्रेस का फाइनेंस संभालते हैं ना केवल कर्नाटक में बल्कि सभी जगह पर और इस दबाव के कारण उनको जो केंद्रीय नेतृत्व है उसने हट जाने के लिए कहा। लेकिन अब ये जो चुनाव ना लड़ने की धमकी है, चुनाव ना लड़ने का है, उसके मतलब क्या है? उसके मायने क्या है? उसके सीधे तौर पर मायने ये हैं और वो कह रहे हैं कि चुनाव में भ्रष्टाचार राजनीति में भ्रष्टाचार बहुत हो गया है। मतलब वो भ्रष्टाचार से मुकाबला करने के लिए और वहां पर भ्रष्टाचार किस किसका हो गया? अगर कर्नाटक में भ्रष्टाचार हो गया है तो उन्हीं की सरकार है। मतलब यह कि उनका केंद्रीय नेतृत्व पर दबाव होगा। केंद्रीय नेतृत्व पर दबाव है। उनके बेटे को उप मुख्यमंत्री बनाए जाने की बात थी वह नहीं हुआ। दूसरी तरफ जो राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं मल्लिकार्जुन खड़गे उनके बेटे को प्रियांक खड़गे को बना दिया गया है गृह मंत्री प्रदेश का। तो ये सारी चीजें वहां पर हो रही हैं। लेकिन कुलमिलाकर के चुनाव ना लड़ने की बात कह कर के सीधा रमैया ने ये साफ तौर पर कह दिया कि वो नेतृत्व के फैसले पर खुश नहीं है।

दो मुख्यमंत्रियों का जाना क्या तय है

भारतीय जनता पार्टी ने अपने हिसाब से मुख्यमंत्री कुछ प्रदेशों में चयन किए हैं। जिसको लेकर के लोगों ने आश्चर्य जताया था कि यह मुख्यमंत्री क्या परफॉर्म कर पाएंगे कि नहीं कर पाएंगे। व एक बड़ा प्रश्न है। लेकिन इन सबके बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जो भारतीय जनता पार्टी के सभी प्रदेश हैं उनक मुख्यमंत्री के कार्य परफॉर्मेंससेस पर एक नजर बना करके रखी हुई है। इसलिए कि बहुत सारे मुख्यंत्रियों का जो परफॉर्मेंस है वह बहुत खराब है। विशेष रूप से जो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं मोहन यादव राजस्थान के मुख्यमंत्री हैं भजन लाल शर्मा ये ये दो मुख्यंत्रियों पर कांग्रेस की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नजर है। दूसरी तरफ जो सबसे अ बेहतर स्थिति में है उसमें महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री इन दोनों प्रदेशों के मुख्यंत्रियों का परफॉर्मेंस जो है वो बेहतर है। बेहतर नहीं सबसे अच्छा है। बाकी ज़्यादातर मुख्यमंत्री हो, चाहे आसाम के मुख्यमंत्री हो, चाहे उड़ीसा के मुख्यमंत्री हो, चाहे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री हो, इन सब की स्थिति ठीक है। अह सिवाय दो मुख्यमंत्री हैं और ये दो मुख्यमंत्री जो हैं वो सरप्राइज नाम थे। मतलब इनके नाम की दूर-दूर तक कहीं से चर्चा नहीं थी। लेकिन शायद भारतीय जनता पार्टी ने कुछ कास्ट इक्वेशंस, कासस्ट कैलकुलेशंस देख के और दो बड़े नेताओं को वो जिम्मेदारी ना देने के लिए मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान को दिल्ली ले आने के लिए और दूसरी तरफ वसुंधरा राजे सिंधिया को मुख्यमंत्री का पद ना देने के लिए यह सारी की सारी योजना बनी थी। लेकिन इन दो मामले में ये योजना फेल होती हुई दिख रही है। हालांकि छत्तीसगढ़ और उड़ीसा में भी नए मुख्यमंत्री हैं लेकिन उनके परफॉर्मेंस पर कोई प्रश्न चिन्ह नहीं है। ये दो बड़े प्रदेश हैं जहां से बहुत सारा चुनावी भविष्य तय होता है।

Rss का जाना माना चेहरा-विदाई होने वाली

 

 

भारतीय जनता पार्टी की जो केंद्रीय कार्य समिति है पूरी की पूरी ऑफिस बियरर्स जो हैं उनके नामों की घोषणा किसी भी समय हो सकती है और इस बार इस तरह की खबरें आ रही हैं कि जो संगठन महामंत्री हैं बीएल संतोष उनको बदला जा सकता है। दो महासचिव को छोड़कर के विनोद तावड़े और चुग को छोड़कर के ज्यादातर महासचिव बदले जाएंगे इंक्लूडिंग बीएल संतोष। अब बीएल संतोष जो है वो भारतीय जनता पार्टी का जो संगठन महामंत्री होता है वो आरएसएस का फुल टाइम प्रचारक होता है। तब एक फुल टाइम प्रचारक की जरूरत होगी। हालांकि कहा यह जा रहा है कि राम माधव की वापसी हो सकती है। लेकिन दो तरह की खबरें आती हैं कि राम माधव को उपाध्यक्ष बनाया जाएगा। महासचिव नहीं बनाया जाएगा और अगर महासचिव बनाया भी जाता है तो संगठन महामंत्री या संगठन महासचिव नहीं बनाया जाएगा। यह तय है। तब अगर ऐसा बदलाव होता है तो कौन से नाम है जिन पर चर्चा हो? कहा ये जा रहा है कि अतुल लिमये जो अभी जॉइंट जनरल सेक्रेटरी हैं उनको लाया जा सकता है। लेकिन इस बारे में थोड़ा सा संदेह का मामला है। दूसरा है कि शिव कुमार जी जो अभी उप संगठन महामंत्री हैं उपसंगठन महामंत्र उनको एलिवेट किया जा सकता है। तो यह स्थिति है या कोई सरप्राइजिंग नाम भी आ सकता है। लेकिन कुल मिलाकर के जो स्थितिहै उसमें बीएएल संतोष की विदाई हो सकती है और बीएल संतोष की विदाई का कारण यह है कि वो कर्नाटक से हैं। कर्नाटक में सरकार चुनाव बीजेपी चुनाव हार गई। उसके बावजूद वहां पर उनका लगातार इंटरफेरेंसहोता रहता है। जिसको लेकर के संघ थोड़ा सा असंतुष्ट है। एक बात और दूसरा ये कि कर्नाटक में निश्चित तौर पर संघ बहुत मजबूत है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी वहां बहुत बेहतर अब तक नहीं कर पाई ह दो-तीन बार सरकार बनाई है। लेकिन उस सरकार बनाने में इवन सिंपल मेजॉरिटी नहीं मिली है। तो किसी ऐसे व्यक्ति को संगठन में ले आया जा सकता है जो बहुत मजबूती के साथ जो काम करता हो और जो डिलीवर कर पाए अब वैसे तो जो बंसल साहब हैं उनका नाम भी हो सकता है लेकिन क्या बंसल साहब होंगे अतुल्यमय होंगे या जो तीसरा नाम है वो होंगे ये ये तो जल्दी ही क्लियर हो जाएगा। लेकिन बीएल संतोष का जाना भी अपने आप में एक बड़ी बात होगी ।