BJP की बगावत क्या Congress को मिलेगा फायदा
भोपाल की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव प्रचार का शोर थम चुका है और यह सीट जीतने के लिए बीजेपी और कांग्रेस ने हर तरह से जोर अजमाइश की है, पर लगता है कि यहां आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार बड़े दलों का खेल बिगाड़ सकते हैं वैसे आपको बता दे कि ये उपचुनाव कांग्रेस के तत्कालीन विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद कराया जा रहा है, अदालत ने उन्हें तीन वर्ष की सजा सुनाई है क्योंकि वो बैंक एफडी धोखाधड़ी मामले में दोषी पाए गए थे उसके बाद उनकीविधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई, माना जा रहा है कि इस सीट पर मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच माना है। पर भाजपा ने यहां से पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह संघ पृष्ठभूमि से जुड़े आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाकर यहां बगावती माहौल बना दिया है , अब देखना यही है कि कांग्रेस इस माहौल का कैसे फायदा उठाएगी, वैसे कांग्रेस ने यहां से पूर्व विधायक और दतिया के पूर्व राजपरिवार से जुड़े घनश्याम सिंह पर को खड़ा किया है, पर इसके बीच में इस सीट पर आजाद समाज पार्टी के दामोदर यादव भी चुनाव मैदान में उतरे हैं , जिससे लगने लगा है कि वो वोट काटने का काम करेंगे, अब ये वोट कांग्रेस के कटते हैं या बीजेपी के ये तो समय बताएगा इस सीट पर 30 जुलाई को मतदान होगा और 3 अगस्त को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।
पेपर लीक—ना आंदोलन की जरूरत – ना संसद में चर्चा ——- बस AI को सौंप दो पूरा केस
देशभर से लेकर संसद तक में पेपर लीक मामले को लेकर चर्चाएं, चल रही हैं बहस हो रही है, शिक्षा व्यवस्था को कैसे दुरूस्त किया जाए इसपर विचार विमर्श हो रहा है, और इन सब के बीच फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने एंट्री ली है और सरकार को suggest किया है कि परीक्षा में छात्रों को AI टूल इस्तेमाल करने की इजाजत मिलनी चाहिए , उन्होंने कहा कि परीक्षा इस आधार पर होनी चाहिए कि वे कितनी तेजी से और कितनी क्रिएटिविटी से AI का इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने सरकार को नसीहत देते हुए कहा है कि दुनिया के बड़े-बड़े CEO चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे हैं कि ai के चलते , एंट्री-लेवल की ज्यादातर नौकरियां जल्द ही खत्म हो जाएंगी, पर हम NEET के विरोध-प्रदर्शनों का जश्न मनाने में व्यस्त हैं। हम एक ऐसे सिस्टम को ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं जो पहले से ही वेंटिलेटर पर है। राम गोपाल वर्मा लिखते हैं कि AI ने सीखने के नियम बदल दिए हैं और समय की मांग है कि पारंपरिक शिक्षा की जगह कस्टमाइज्ड एजुकेशन यानी व्यक्तिगत जरूरतों के हिसाब से शिक्षा लाई जाए। किसी बोर्ड को नहीं, बल्कि छात्र को खुद तय करना चाहिए कि उसका प्रोफेशनल कोर्स कितने साल का होगा – 4 साल, 3 साल या कुछ और – चाहे वह बी.टेक हो, मेडिकल हो या कुछ और – यह उसकी अपनी समझ और काम करने की क्षमता पर निर्भर होना चाहिए। कुछ दिमाग छह महीने में ही वह सीख लेते हैं, जो दूसरे चार साल में भी नहीं सीख पाते। तो फिर दोनों को एक तय कोर्स की जेल में क्यों बंद किया जाए?’
राम गोपाल वर्मा ने AI के पांच फायदे भी गिवनाए हैं
1शिक्षा के समय और लागत में भारी कमी आएगी। माता-पिता का पैसा बर्बाद होना बंद होगा और छात्र अपनी जिंदगी के सबसे अच्छे साल बर्बाद करने से बचेंगे। 2सीखने की क्वालिटी में जबरदस्त सुधार होगा, क्योंकि हर छात्र के पास एक पर्सनल AI ट्यूटर होगा जो कभी सोता नहीं, कभी थकता नहीं और छात्र की पसंद की रफ्तार के हिसाब से ढल जाता है। 3कई विकल्प मौजूद होंगे सिर्फ सिर्फ विषयों के ही नहीं, बल्कि शिक्षकों, तरीकों, रफ्तार और गहराई के भी। 4पहली बार सिस्टम छात्र की मदद करेगा, न कि छात्र को सिस्टम में फिट होने के लिए कुचला जाएगा। 5छोटे शहर के किसी गरीब युवा को भी वही मौका मिल सकता है जो किसी महंगे प्राइवेट कॉलेज में पढ़ने वाले अमीर छात्र को मिलता है। उन्होंने यह भी लिखा कि ”परीक्षा उस दिन होनी चाहिए जब छात्र कहे कि वह तैयार हैं, न कि तब जब यूनिवर्सिटी का कैलेंडर तय करे।
