RSS प्रमुख की सुरक्षा – बन रहा बढ़ा मुद्दा
बिहार सरकार की ओर से लालू परिवार की सुरक्षा की समीक्षा के बाद लालू और राबड़ी की सुरक्षा घटाए जाने का मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है, आपको बता दें कि हाल ही में लालू यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा घटाने के बाद उन्होंने अपनी पूरी सुरक्षा लौटा दी थी, समीक्षा के बाद लालू के बेटे तेज प्रताप को एक अंगरक्षक की और rjd सांसद मीसा भारती को दो सुरक्षाकर्मियों की सुरक्षा दी गई है जबकि तेजस्वी यादव की सुरक्षा व्यवस्था को नहीं छेड़ा गया। अब RJD के नेता लालू और राबडी की सुरक्षा खत्म करने को एक बड़ा मुद्दा बनाकर लगातार बिहार सरकार पर हमला कर रहे हैं, RJD Spokesperson कंजन यादव ने तो यह तक कह दिया कि बीजेपी सरकार जानबूझकर लालू-राबड़ी की जान खतरे में डाल रही है, यही नहीं कंचन यादन ने सरकार पर तीखा तंज कसते हुए यह तक पूछ डाला कि RSS Chief मोहन भागवत को किस हैसियत से Z प्लस सिक्योरिटी मिली हुई है , कंचन यादव ने सोशल मीडिया अकाउंट पर यह भी पूछा कि मोहन भागवत न कभी सांसद रहे हैं, न विधायक रहे हैं, न ही किसी संवैधानिक पद पर रहे हैं। वो केवल आरएसएस के प्रमुख हैं जिसे खुद PM MODI एक गैर-सरकारी संगठन यानी NGO मानते हैं, फिर सरकार को बताना चाहिए कि दुनिया में किस NGO के प्रमुख को इतनी ज्यादा सुरक्षा दी जाती है, उनकी सुरक्षा व्यवस्था केंद्रीय मंत्रियों जैसे अमित शाह के बराबर है , आपको बता दें कि मोहन भागवत बिहार दौरे पर हैं और RJD ने यही मौका लेकर पूरी सरकार को सुरक्षा व्यवस्था पर घेर लिया है।
अचानक सोनिया गांधी को क्यों याद किया अशोक गहलोत ने

राजस्थान में लगता है एक बार फिर अशोक गहलोत और सचिन पायलेट के बीच अंदर ही अंदर कोई विवाद पनप रहा है और शायद यही कारण है कि अशोक गहलोत गड़े मर्दें उखाड़ कर इस बात का दावा कर रहे हैं कि राजस्थान कांग्रेस को कोई भी विधायक सचिन पायलेट को मुख्यमंत्री बनाने को तैयार नहीं था। अब सभी को पता है कि साल 2020 में अशोक गहलोत का नाम कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए जोर शोर से उछल गया था तो सोनिया गांधी से करीबी के चलते लग भी रहा था कि अशोक गहलोत अघयक्ष बन जाएंगे, पर अचानक एक खबर आई कि अशोक गहलोत मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ना चाहते हैं और इसी खबर पर आज अशोक गहलोत सफाई दे रहे हैं और कह रहे हैं कि मुझे कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से रोकने की बाकायदा साजिश हुई थी। मैं तो राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना चाहता था,मैं क्यों मना करता।’अगर सोनिया गांधी प्रस्ताव दें, तो क्या मैं मना कर दूंगा , उन्होंने कहा कि जानबूझकर ’स्थितियां ऐसी बना दी गई और अचानक मैं बदनाम हो गया कि मैं सीएम पद नहीं छोड़ना चाहता। पर वास्तव में यह इसलिए हुआ कि सचिन पायलट को कोई CM बनाने को तैयार नहीं था, विधायकों ने साफ कद दिया था हम में से किसी भी विधायक को सीएम बना दो, लेकिन पायलट CM नहीं बनने चाहिए। अब सवाल यही है कि इतने सालों बाद अशोक गहलोत को यह सफाई देने की क्या जरूरत पड़ गई, चर्चाओं का बाजार गर्म है कि उनके और सचिन के बीच अब भी पावर का गेम चल रहा है, अब मुख्यमंत्री पद के लिए ना सही पर कांग्रेस आलाकमान के चहेते बनने और पार्टी में अच्छी पोस्ट के लिए यह चल रहा है।
