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हाल ही में बांग्लादेश के नए प्राइम मिनिस्टर तारिक रहमान ने चाइना का दौरा किया है। वहां के प्रेसिडेंट से मिले हैं और उसको लेकर भारत में काफी चिंता जताई जा रही है क्योंकि उन्होंने तीस्ता रिवर प्रोजेक्ट पर चीन से मदद मांगी है। तो बड़ा प्रश्न यह है कि जब बांग्लादेश चीन के पास जाकर इस प्रोजेक्ट के लिए हेल्प मांग रहा है तो भारत को किस तरह का खतरा है? इससे जुड़ी तमाम बातों पर चर्चा की है  Former Major Genral P.K Sehigal से . . .

Ques—बांग्लादेश और चीन बात कर रहे हैं तीस्ता नदी को लेकर इसमें भारत को बड़ा खतरा कैसे है?

Ans —— तीस्ता रिवर सिक्किम में ओरिजिनेट होती है , वेस्ट बंगाल जाती है और फिर बांग्लादेश पहुंचती है और इसके पानी को लेकर दोनों देशों के बीच में काफी दिन से डिस्प्यूट है , वास्तव में हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री की जबरदस्त कोशिश रही है इस डिस्प्यूट को रिसोल्व करने के लिए लेकिन ममता बनर्जी ने इसको रिॉल्व नहीं होने दिया लेकिन अभी क्योंकि ममता चली गई थी तो बहुत अच्छा मौका था हिंदुस्तान को बांग्लादेश के साथ मुलाकात करके इस इशू को पीसफुली सुलाझाने का , टू द बेनिफिट ऑफ़ बोथ द नेशंस। लेकिन तारिक रहमान जो है जो बांग्लादेश के नए प्राइम मिनिस्टर है वो पहले चाइना मलेशिया में गए। चाइना में गए और चाइना के ऊपर उन्होंने कुछ इश्यूज के ऊपर संधि की है जिसमें से मैनेजमेंट ऑफ तिस्ता रिवर प्रोजेक्ट भी उसमें शामिल है। हिंदुस्तान काफी ज्यादा चिंतित है क्योंकि ये जो प्रोजेक्ट है ये बड़ा क्लोज क्लोजली लोकेटेड है, इंडिया के सबसे वनरेबल यानी नाजुक जगह से, जो कहलाता है चिकन नेक एरिया है , ये जो कॉरिडोर है जो हमारे ईस्टर्न स्टेट्स को रेस्ट ऑफ़ द कंट्री से अलग कर सकता है, अगर ये ब्लाक हो जाए।

Ques—चिकन नेक का हम जिक्र बार-बार करते हैं और इसको थोड़ा explain करके समझने की जरूरत है एग्जैक्टली चिकन नेक क्या है? जो हमारे आठ राज्य हैं उनको पूरे देश से जोड़ता है?

Ans—— चिकन नेक जो है तकरीबन 100 किलोमीटर लंबा है और जो इसका सबसे चौड़ा हिस्सा है वह 18 टू 20 कि.मी.तक ही है। और ये चुबी वैली के माध्यम से और डोकलाम के माध्यम से पाकिस्तान जो चाइना है बड़ी आसानी से इसको काट सकता है। प्रोवाइडेड बांग्लादेश के साथ हमारे रिलेशंस अच्छे ना हो। जी। जहां तक पहले की सरकार थी पहले की सरकार ने हमको अल्टरनेटिव रूटिंग दी हुई थी जो नई सरकार है वो ये रूटिंग नहीं देगी और ये एरिया जो है हिंदुस्तान के लिए बहुत ही स्ट्रेटेजिकली है क्योंकि सारी रोड और रेल कम्युनिकेशन जो है इसी कॉरिडोर के बीच से जाती है एंड प्रेजेंटली इट्स ऑल ओवर ओवरलैंड कोई अंडर ग्राउंड नहीं है और चिकन नेक हिंदुस्तान का बहुत ही नाजुक एरिया है अगर इसको चाइना कट कर देता है तो आपकी आठ की आठ, सात नार्थन ईस्टर्न स्टेट्स और सिक्किम देश से अलग हो जाएगा और उसको मेंटेन करने के लिए ओनली एयर मेंटेनेंस हैजो हिंदुस्तान की काफी बहुत इंपॉर्टेंट पॉइंट है ।

 

Ques—अगर चाइना उस पर किसी तरह से हस्तक्षेप करता है या कब्जा कर लेता है तो बांग्लादेश तिस्ता के लिए चाइना से मदद मांग रहा है तो इसमें चिकन नेक का क्या रोल आएगा?

Ans—-चीन चिकन लेक में तो नहीं घुसेगा लेकिन ये प्रोजेक्ट चिकन नेक के काफी नजदीक है वेरी फैक्ट की वो चिकन लेक के पास कारवाई कर रहा है इसकी जबरदस्त स्ट्रेटजिक इम्लिकेशन है वो हिंदुस्तान की तमाम फौज की मूवमेंट्स को हमारी लॉजिस्टिक्स है को तमाम इंटेलिजेंस गैदरिंग जो है कर सकता है जो हमारे लिए बहुत ही ज्यादा चिंताजनक है इसको निगाह में रखते हुए हमने हाशीरा में और बडोगा में तो एयर बेस है इसके अलावा हम तीन और नए air बेस बना रहे हैं एक वेस्ट बंगाल में एक आसाम में और एक बिहार में चिकन नेक को मजबूत करने के लिए और उसी को निगाह में रखते हुए हिंदुस्तान ने एक नया स्ट्राइक को भी ईस्टर्न सेक्टर में खड़ा किया था 17 को प्राइमरली चिकन लेक कीबिलिटी को निगाह में रखते हुए और अरुणाचल के हिफाजत के लिए और हिंदुस्तान ने इसके लिए चाइना के साथ प्रोटेस्ट भी ल्च किया है। लेकिन चाइना ने साफ तौर पे उसको प्रोटेस्ट को नजर अंदाज कर दिया है। यह कहकर कि वास्तव में यह केवल और केवल एक सिविलियन प्रोजेक्ट है और बांग्लादेश के लिए बहुत इकोनमिकली है। उनके लिए रिवर मैनेजमेंट जो है उनकी फार्मर्स इनकम बढ़ेगी। उनकी फ्लडिंग फ्लडिंग रुकेगी और उस इलाके में बड़े बड़े पैमाने पर उनके लिए हर प्रकार से उनके फार्मर्स के लिए बेनिफिट होगा। लेकिन चाइना ने कहा कि हमको हम किसी प्रकार से कोई उल्टा प्रभाव नहीं लेकिन जहां तक चाइना का प्रश्न है तो हमेशा यही कहा जाता है कि चीन पे कभी भरोसा नहीं किया जा सकता है। इसको लेकर के भारत चिंतित है कि वो तीस्ता के बहाने चिकन नेक पर कहीं ना कहीं अपनी एक्टिविटीज विजिलेंस की एक्टिविटीज तेज ना कर दे।

Ques—आपको लगता है कि आने वाले समय में तारिक रहमान से इस बारे में बातचीत होगी। जो हमारी फॉरेन पॉलिसी है जो हमारी फॉरेन स्ट्रेटजी है इसको लेकर के तारिक रहमान के पास जाएगी?

ANS—100% अगर तारिक जब भी हिंदुस्तान में आते हैं हिंदुस्तान के एक्स आते हैं तो सबसे मुख्य मुद्दा जो होगा चिकन लेक का मुद्दा ही होगा और हिंदुस्तान साफ तौर पे चाहता था कि चाइना बीआरआई प्रोजेक्ट कर रहा है उनके पोर्ट डेवलपमेंट कर लेकिन चिकन नेक का जो रिवर मैनेजमेंट का है हिंदुस्तान खुद चाहता था कि वो रिवर मैनेजमेंट करे लेकिन उनके पोर्ट को भी डेवलप करने के लिए हिंदुस्तान का ही पहल थी लेकिन इससे पहले जो यूनस थे यूनस ने साफ तौर पे कहा था कि वो हिंदुस्तान को हटा दिया और वो चाइना से मदद मांग रहे है और जब तारिक आए तो हिंदुस्तान को साफ तौर पर नजर आता था कि वो फ्रेंडली रिलेशन हिंदुस्तान के साथ चाहेंगे और इसको निगाह में रखते हुए वो इस माफ की कारवाई नहीं करेंगे लेकिन वास्तव में जब फाइव डे रिजल्ट उनकी चाइना में रही है चाइना बीन एबल टू बम ओवर और हिंदुस्तान को सबसे बड़ा खतरा जो है कि प्रेजेंट इट्स अ प्योरली इकोनमिक प्रोजेक्ट लेकिन इसके स्ट्रेटेजिक इम्लिकेशन स्ट्रेटेजिकेशन क्या हो जाते हैं बिटवीन बांग्लादेश एंड एंड चाइना इज़ समथिंग टू बी सीन इन द फ्यूचर एंड चाइना के पास डीप पॉकेट्स है। चाइना के पास पैसा है। और पैसे के बाद से चाइना ने भी देखो बड़े पैमाने पर इसी माफ़ी के प्रोजेक्ट्स जो है म्यांमार में किए है। जी बांग्लादेश में किए, श्रीलंका में किए है, पाकिस्तान में किए, नेपाल में किए। वो इसी तरह के प्रोजेक्ट के साथ करता है कि मनी इन्वेस्टमेंट करता है चाइना बड़े-बड़े प्रोजेक्ट में और अंदर घुसता है। शायद ये स्ट्रेटजी रही है चाइना की।

Ques— आपने चिकन नेक के बारे में बताया है कि सारी ट्रांसपोर्टेशन उसी रास्ते से होती है जो हमारे आठ राज्य है नॉर्थ ईस्ट के तो उसको मजबूत करने के लिए कि उसके लिए किस तरह से भारत तैयार है?

Ans —- एयरपोर्ट बनाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री एक लॉन्ग टर्म सोल्यूशन चाहते हैं। अभी जैसे कि मैंने कहा सारे के सारे हमारे रोड कम्युनिकेशन एंड रेल कम्युनिकेशन ओवर है। अभी कोशिश की जा रही है कि हम इसको अंडर ग्राउंड बड़े पैमाने पर रेल कम्युनिकेशन रोड कम्युनिकेशन बनाए जिसको किसी प्रकार से कल आने वाले समय में चाइना कट ना कर सके और अगर हिंदुस्तान वो कर लेता है तो चिकन ने को हमेशा हमेशा कोई सिक्योर कर देगा।अंडर ग्राउंड और अंडर ग्राउंड के लिए कम से कम कम से कम पांच से 10 साल लग जाएंगे। प्रोजेक्ट की स्टार्ट शुरुआत हुई।

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