कहीं नहीं जा रहे ये तीन कद्दावर मोदी के मंत्री
मोदी कैबिनेट बदलाव की चर्चा के दौरान तीन बड़े मंत्रियों के नाम हैं , उनकी विदाई हो सकती है। विदेश मंत्री एस जयशंकर, उसके अलावा डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी जिनके पास ट्रांसपोर्ट रोडवे रोड और हाईवेज मंत्रालय। अब ये निश्चित तौर पर इस तरह के कयास लगते रहते हैं, लेकिन क्या इन कयासों में सच्चाई है और क्यों ऐसा किया जा रहा है, इन तीन में कम से कम दो की बात कर रहे हैं एस जयशंकर और नितिन गडकरी की, एस.जयशंकर के बारे में ऐसा है कि विदेश मंत्रालय को लेकर के जिस तरह से उनका काम है वो इंपीकेबल है। उस पर कोई डाउट नहीं और प्रधानमंत्री उनके काम से संतुष्ट हैं। जिस तरह से उन्होंने पूरा डिप्लोमेसी को या भारत की कूटनीतिक स्ट्रेटजी रही है उसमें एक 360° का चेंज किया है। इसलिए उनके जाने को लेकर के बात हो रही है। थोड़ा सा संदेहास्पद वैसा ही हाल जो नितिन गडकरी के बारे में है जिस तरह से उनकी उनके मंत्रालय ने पूरे देश में सड़कों का जाल फैलाया है। अब एथेनॉइल को लेकर उनके जाने की बात हो रही है और लगातार उन पर दबाव बढ़ाया जा रहा है। इसमें दो चीजें हैं। पहला यह कि इन पर दबाव इसलिए बढ़ रहा है कि ये जो दो फैक्टर्स हैं और इसके पीछे पॉलिटिकल पार्टीज का इंटरेस्ट है। पॉलिटिकल पार्टीज ये चाह रही हैं कि किसी तरह से ये जोपरफॉर्मिंग मिनिस्टरर्स हैं। इनको लगातार टारगेट किया जाए और अगर इनमें से कोई चला जाता है तो इसको अपनी जीत के तौर पर देखेंगे और ये एक बड़ा मामला है जिसके कारण बात की जा रही है। अब राजनाथ सिंह के त्यागपत्र की भी मांग हो रही है और उनके जाने की भी मांग हो रही है और सीधे तौर पर उसके पीछे जो है वो ऑपरेशन सिंदूर में झूठ बोलने का बात है। जिसको लेकर के सरकार का अपना ये मानना है कि उनसे पूछा गया था एयर स्ट्राइक के दौरान कोई मारा गया है कि भारतीय सैनिक मारा गया है कि नहीं मारा गया है उसको उन्होंने मना किया लेकिन उस दौरान बाद में जरूर पांच छह लोग मारे गए हैं जिनका नाम शहीद संग्रहालय मतलब वॉर मेमोरियल वहां पर उनके नाम अभी डाले गए हैं। तो ये एक स्थिति है। तो यह टेक्निकल सा मामला है। निश्चित तौर पर अभी जो मानसून सेशन आया है उन सब में यह उठने वाला है। उठेगा भी उठना भी चाहिए। लेकिन जिस तरह से प्रधानमंत्री खुश हैं एस जयशंकर से, संघ की पूरी तरह से बैकिंग है नितिन गडकरी के साथ और अगर रक्षा मंत्री को हटाया जाता है इसका मतलब ऑपरेशन सिंदूर के बहुत सारे मामले पर प्रश्न चिन्ह लगेगा। इसलिए तीनों मंत्री कहीं भी नहीं जा रहे हैं।
ममता बनर्जी कहीं नहीं नजर आ रही हैं डर है भीड़ उन पर भी अंडे ना बरसा दे
तृणमूल कांग्रेस की जब से सरकार गई है उनके सभी नेताओं को जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। अभी तक होता था कि किसी काउंसिलर को, किसी पूर्व एमएलए को, किसी एमएलए को टारगेट किया जाता था। अभिषेक बनर्जी को भी टारगेट किया गया और अभिषेक बनर्जी पर भी अंडे फेंके उनको झापड़ मारने की भी कोशिश की गई। अब एक नया वीडियो सामने आया है जिसमें महुआ मोहित्रा ने यह दावा किया है कि उन वो एक मीटिंग कर रही थी और वो मीटिंग जो है अपने पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ कर रही थी और उन पर पत्थर फेंके गए, अंडे फेंके गए। इसको लेकर के उन्होंने डीजी पश्चिम बंगाल के उनको एक उनको टैग करते हुए एक सोशल मीडिया पर वीडियो डाला और भीउनसे बात भी की, फोन पर बात भी की। लेकिन हो क्यों रहा है ऐसा? अब निश्चित तौर पर तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को लेकर के वहां की जनता में बहुत नाराजगी है। ना केवल इस बात को लेकर के उन्होंने भ्रष्टाचार किया बल्कि इस बार को लेकर के भी कि उन लोगों ने क्रिमिनल्स जो थे उनको प्रोटेक्ट किया और स्पेशली जो क्राइम अगेंस्ट वुमेन के अपराधी थे उनको भी प्रोटेक्ट किया और केवल वो लोग नहीं जो मतलब महिला सांसदों ने भी इस पर चुप्पी साध करके रखी और अब चाहे इसको आप सांकेतिक प्रोटेस्ट कहिए कि अंडे उन पर फेंके जा रहे हैं या जो भी है। लेकिन ये प्रोटेस्ट है और अंडे फेंके जा रहे हैं। कम से कम अब तक 10 इस तरह की घटनाएं हो गई जहां तृणमूल कांग्रेस के नेताओं पर अंडे फेंके गए। हालांकि अंडे फेंके जाने को वो तृणमूल कांग्रेस का के नेताओं का दावा ये होता है कि केवल अंडे ही नहीं फेंके गए। पत्थर भी फेंके गए। लेकिन हो रहा है ऐसा। तो नाराजगी तो है और नारा अब ये कहीं से इसको जस्टिफाई नहीं करेगा कि जो ये लोग कर रहे हैं इनको रोका नहीं जाना चाहिए। इनको रोका जाना चाहिए। वो रिप्रेजेंटेटिव हैं। जनता के प्रतिनिधि हैं। जनता से मिलेंगे जो भी तृणमूल के नेता हैं चाहे एमपी हो चाहे एमएलए हो। लेकिन इन सबके बावजूद नाराजगी तो है और नाराजगी पश्चिम बंगाल के लोग एक्सप्रेस करते हैं। वह उसमें चूकते नहीं और मुझे लग रहा है ऐसा ही हो रहा है और स्पष्ट तौर पर ये उनकी पॉपुलरिटी मतलब तृणमूल कांग्रेस की पॉपुलरिटी नीचे जाता दिख रहा है। दिखा रहा है और इन सबके बीच ममता बनर्जी लापता हैं। ममता बनर्जी कहीं नहीं नजर आ रही हैं। शायद उनको भी इस बात का बात का डर है कि वो भीड़ में जाएंगी तो उन पर भी अंडे बरस सकते हैं।
BJP क्या तैयारी कर रहा है एक और पार्टी को विलय करने की
बीजू जनता दल , लोकसभा का चुनाव और विधानसभा का चुनाव भी हारी 2024 में और धीरे-धीरे उनका जो संगठन है वह भी कमजोर होता जा रहा है। संगठन के बहुत सारे लोग छोड़ के जा रहे हैं। यहां तक कि तीन सांसद भी राज्यसभा के अब तक छोड़ के जा चुके हैं। लेकिन ये ऐसा नहीं है कि अभी हुआ। वहां पर चुनाव से पहले ही BJD कमजोर होना शुरू हो गई थी और चुनाव के पहले ही एक आईएएस अधिकारी जो हैं वी के पांडियन उन्होंने जिनके ऊपर ये आरोप लगता था कि उन्होंने पूरी तरह से नवीन पटनायक को अपने जिसको हिंदी में इस्तेमाल किया जाता है कि शीशे में उतार रखा है। जैसा चाहते हैं वैसा नवीन पटनायक करते हैं। पांडयन जैसा चाहते हैं। और यहां तक कि जो संगठन का काम होता था मतलब बीजेडी के ऑर्गेनाइजेशन पार्टी का काम होता था उसको भी पांडयन अटेंड करतेथे। पब्लिक रैलीज करते थे। स्टेट चौपर का इस्तेमाल करते थे। मतलब वो डिफेक्टो चीफ मिनिस्टर की तरह से काम कर रहे थे। अब इसको लेकर के विरोध भी हुआ। यह भी बीजेपी ने उन पर नवीन पटनायक पर आक्रमण भी किया इस बात को लेकर के कि पांडयन तमिल ओरिजिन के हैं इसलिए पूरी की पूरी जो राजनीति है वो बाहरी के हाथ में सौंप दी है नवीन पटनायक ने और इसका फायदा भी हुआ वहां पर बीजेडी चुनाव हार गई भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। एमएलए एमपीज भी वहां पर बड़ी संख्या में जीत करके आए हैं। अब इसमें डेवलपमेंट यह हुआ है कि वीके पांडयन की पत्नी सुजाता कार्तिकेयन उड़ीसा की हैं उनके बैच की ही आईएएस अफसर हैं। उन्होंने भी वीआरएस ले लिया था और फॉर्मली अब पार्टी ज्वाइन कर लिया। तो अब बीजेडी जो है उड़ीसा की पूरी की पूरी राजनीति इन्हीं दो नेताओं के इर्दगिर्द घूमेगी और यही दो नेता अब वहां की राजनीति आगे लेकर के जाने वाले हैं। अभी जब सुजाता जिनका मैडम नेम सुजाता राउत राउत है। उन्होंने जब पार्टी ज्वाइन की तो पूरे प्रदेश के जो ऑफिस बियरर्स हैं, बड़े कार्यकर्ता हैं सब की उपस्थिति में उन्होंने जॉइन की और अब वह आगे भी राजनीति करेंगे। जो वीके पांडयन हैं उनको जब रिजाइन किए थे तो कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया गया था। अब कुल मिलाकर के स्वास्थ्य कारणों से नवीन पटनायक बहुत ज्यादा एक्टिव नहीं नजर आते हैं तो सारा का सारा जो चुनावी दायित्व बीजेडी का है। अब इन्हीं दोनों नेताओं के इर्द-गिर्द घूमेगा। आंतरिक विरोध कला है इस मामले को लेकर के कि एक बाहरी को और पैराशूट किए हुए दो नेताओं के ऊपर बीजेडी की जिम्मेदारी होगी। बीजेपी को यह सूट करता है।
