क्या विकास करने के लिए अब सत्ता में होना जरूरी-बड़ा Question छिड़ी बहस
अभी तक यही समझा जाता था जो दल बदलते हैं, चाहे वो विधायक हो चाहे वो सांसद हो और उस पार्टी में जाना पसंद करते हैं जिसकी सत्ता में चल रही है जो सत्ता में काबिज है चाहे वो राज्य सरकार हो चाहे वो केंद्र सरकार हो उसके पीछे मकसद यही होता था कि लोगों को लगता था कि ज्यादा अधिकार मिलेंगे पावर मिलेगी पैसा कमाने का ज्यादा मौका मिलेगा और कई बार अपनी पार्टी में नैतिक विचारधारा है उससे नहीं पटती है। लेकिन हाल ही में जो हुआ महाराष्ट्र में जो हुआ उद्धव ठाकरे के छह सांसदों ने उद्धव ठाकरे को छोड़कर एकनाथ शिंद का दामन थाम लिया और सबसे बड़ी बात है उनके जो सांसद है नागेश पाटिल उन्होंने जो बयान दिया उससे राजनीतिक गलियारों में बहुत जबरदस्त चर्चा शुरू हो गई है। बयान छोटा सा था लेकिन उनके मायने बहुत ज्यादा थे और चर्चा ये शुरू हो गई कि क्या आज का लोकतंत्र है वो खतरे में पड़ गया है। क्या अब विपक्ष के सांसदों को काम करने का अधिकार ज्यादा नहीं मिल पाता है। उनको पैसा नहीं मिल पाता है। उनको सहयोग नहीं मिल पाता है। नागेश पाटिल के बयान से यही बात सामने आई, उन्होंने कहा कि वो विकास कार्य करना चाहते हैं इसलिए वो सत्ता पक्ष में गए हैं यानी एकनाथ शिंद के पास, और उद्धव ठाकरे के साथ उनका कोई मतभेद नहीं है। उनके बयान से यही कयास लगाए जा रहे हैं कि वो अपने क्षेत्र में विकास कार्य करवाना चाहते हैं।
लोकतंत्र क्या खतरे में है? क्या पक्ष और विपक्ष के बीच का समन्वय बिगड़ रहा है
अब जो सांसद है उसके जो अधिकार हैं चाहे वो विपक्ष का सांसद हो और चाहे वो सत्ता पक्ष का सांसद हो सभी को समान अधिकार, समान बजट मिलता है। उनका काम होता है अपने क्षेत्र में सड़कें बनाना, बिजली पानी की व्यवस्था देखना, अस्पताल बनाना, सुरक्षा व्यवस्था के मुद्दे संसद में उठाना, अपने क्षेत्र की समस्याओं को संसद में उठाना। तो पाटिल जी के इस बयान से यह लगने लगा क्या ऐसा हो रहा है कि विपक्ष के सांसदों को विकास कार्य करवाने में कोई ना कोई प्रॉब्लम आ रही है और साथ ही एक बड़ा प्रश्न , चर्चा छिड़ गई है कि लोकतंत्र क्या खतरे में है? क्या पक्ष और विपक्ष के बीच का समन्वय बिगड़ रहा है ।
गैर भाजपा सरकारें तो लगातार भेदभाव का आरोप लगाती रही हैं
इससे पहले भी लगातार गैर बीजेपी राज्यों की सरकारें यही आरोप केंद्र पर लगाते रहते हैं कि सरकार से उनको सहयोग नहीं मिल रहा है। उन राज्यों को ज्यादा पैसा ज्यादा सहयोग मिलता है जहां पर बीजेपी की सरकार है। सबसे पहले टीएमसी की जो मुखिया है ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री रही हैं और उन्होंने दो मुद्दों पर मोदी सरकार को लगातार घेरा है, एक तो जीएसटी को लेकर वो लगातार यही कहती थी कि हम पैसा ज्यादा देते हैं केंद्र सरकार को लेकिन हमको रिटर्न में ज्यादा टैक्स का पैसा नहीं मिलता है और दूसरा मनरेगा को लेकर जबरदस्त आरोप ममता बनर्जी लगातार केंद्र सरकार पर लगा रही थी कि उनका पैसा रिलीज नहीं किया जा रहा है। खैर अब तो इस योजना में काफी फेरबदल हुआ है। फिर आम आदमी पार्टी अरविंद केजरीवाल का केंद्र सरकार पर लगातार आरोप लगा कि जो ट्रांसफर पोस्टिंग हो रही होती हैं, उनमें उनका हित नहीं देखा जाता, केंद्र सरकार की योजनाओं के लिए समय पर पैसा नहीं दिया, विकास के लिए फंड्स उपलब्ध नहीं करवाए जाते हैं। जिससे दिल्ली सरकार जो है विकास कार्य नहीं कर पा रही। ये लगातार आरोप सुनते आए हैं इसके अलावा जो दक्षिण के राज्य हैं कर्नाटक , तमिलनाडु , तेलंगाना की सरकारें भी आवाज लगातार उठती रहती हैं कि उनके साथ हर चीज में भेदभाव किया जाता है, यही नहीं कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया है ने तो बकायदा अपने विधायकों को लेकर जनपद में प्रदर्शन भी कर दिया था कि जीएसटी का जो हिस्सा उनको मिलना चाहिए वो हिस्सा नहीं मिल पा रहा है और सरकार हमको सहयोग नहीं दे रही है। विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं। तो केंद्र सरकार पर ये आरोप लगातार लगते ही रहते हैं कि गैर भाजपा सरकारों के साथ भेदभाव किया जाता है।
Modi JI विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब विपक्षी नेता-सरकार खुल कर बिना रूकावट काम कर सकेंगे
लेकिन सांसद नागेश पाटिल के बयान ने एक नया विवाद छेड़ दिया है कि अब विपक्ष के सांसदों और विधायकों के हाथ भी बांघ दिए गए हैं वो खुलकर अपने क्षेत्र में विकास काम नहीं करवा सकते। तो मतलब ये निकाला जाए कि जो विपक्षी सांसद हैं उनको भी जो विकास कार्य करने के लिए सत्ता पक्ष का दामन पकड़ना पड़ रहा है और यह जो मैसेज जा रहा है आम जनता के बीच में यह मैसेज ठीक नहीं है क्योंकि लोग उन्हीं को वोट देते हैं अपने क्षेत्र में जो उनके क्षेत्र में विकास कार्य करता है और जब इस तरह का मैसेज जाएगा तो वोटर्स भी यह सोच कर वोट देगा। वो उस आदमी को वोट नहीं देगा जो जिसने अब तक उसके क्षेत्र में अच्छा विकास कार्य किया है बल्कि वो उस नेता को वोट देना पसंद करेगा जिसकी राज्य में सरकार बनने की उम्मीद है और ये ट्रेंड बिल्कुल अच्छा नहीं है। कहते हैं लोकतंत्र तभी मजबूत रह सकता है जब उसका पक्ष और विपक्ष दोनों मजबूत हो। लेकिन जिस तरह का हाल चल रहा है उस पर चिंता व्यक्त की जा रही है। और जैसा कि मोदी जी खुद चाहते हैं कि देश में विकास हो। तो विकास तभी संभव है जब विपक्ष के जो सांसद हैं जो विधायक हैं उनको अपने क्षेत्र में विकास काम कार्य करें और उन्हें सरकार से मदद मिले। उनको भी समय पर पूरे अधिकार मिले, पूरा उनको फंड मिले, पूरी सुविधाएं मिले जिससे कि वो अपने क्षेत्र में विकास कर सके। तभी मोदी जी का सपना जो है विकसित भारत का वो पूरा हो पाएगा।
