क्षेत्रीय दल टूट रहे Congress को मिलने वाला है बड़ा फायदा
क्षेत्रीय दल लगातार टूट रहे हैं। चाहे तृणमूल कांग्रेस की बात कर लें, चाहे राष्ट्रवादी कांग्रेस की बात कर लें, चाहे शिवसेना उद्धव बाला साहब ठाकरे की बात कर लें या समाजवादी पार्टी में के टूटने की लगातार खबरें आ रही हैं। अब इन सब में निश्चित तौर पर यह आरोप भारतीय जनता पार्टी पर लग रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी इसके पीछे है और ऑपरेशन लोटस चलाया जा रहा है और तर्क यह भी आए कि जो महिला रिजर्वेशन बिल है उसको पास कराने के लिए भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी इस तरह की बात कर रहे हैं। अब इसमें एक और महत्वपूर्ण पक्ष है जिसको लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। वो यह है कि इस सब मामले में कांग्रेस चुप्पी साधे हुए है। उसका क्या कारण है? उसका कारण यह है कि इन सबके विघटन में एक बड़ा जो वर्ग वो है वोटर का जो सेकुलर अपने आप को तथाकथित कहता है वो कांग्रेस के खेमे में गिरेगा। अब कांग्रेस खेमे में गिरेगा इस बात को कांग्रेस भी जानती है और इसीलिए इन सब के बावजूद कांग्रेस इस सब मामले में ना केवल चुप्पी साधे हुए है बल्कि चाह रही है कि ये जो रीजनल पार्टीज हैं जिनके प्रभाव है और इसीलिए वो डीएमके के साथ स्ट्रेटेजिकली अलग हुई और टीवी के साथ ये जानते हुए कि टीवी जो है विजय की पार्टी उसका राजनीतिक भविष्य बहुत ज्यादा दिन तक नहीं चलने वाला है। उसके बहुत सारे कारण है तो चाहे उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के विघटन की खबरों की बात हो, चाहे तृणमूल कांग्रेस की बात हो या बाकी जिन राजनीतिक रीजनल फोर्सेस की बात कर रहे हैं। अभी जो निकल कर के आया है राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का जो पवार वाला खेमा है वो भी शिवसेना के जो नेता हैं श्रीकांत शिंदे साहब एकनाथ शिंद उनके साथ संपर्क में है। लेकिन अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का मुस्लिम मतदाता ना तो शिवसेना के साथ जाएगा ना भारतीय जनता पार्टी के साथ जाएगा। तो जो हिंदू वोटर मराठा वोटर है वो तो चले जाएंगे शिवसेना और भाजपा के साथ लेकिन मुस्लिम वोटर जो हैं या सेक्युलर वोटर जो है वह चले आएंगे किन के पास? कांग्रेस के पास। तो कांग्रेस को यह कहिए कि बिल्ली के भाग से छींका टूटने वाली स्थिति है। इसीलिए कांग्रेस इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए हैं और इंतजार कर रही है कि ऐसा हो।
TMC – अपने ही खोल रहे हैं Corruption की पोल

इनफोर्समेंट डायरेक्टेट ने तृणमूल कांग्रेस के अकाउंट्स में एक सर्च एंड सीजर ऑपरेशन चलाया है। अब यह मनी लॉन्ड्रिंग का पूरा मामला है। मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर के लगातार तृणमूल कांग्रेस जो है वह जो सुरक्षा जो जांच एजेंसियां हैं उनके निशाने पर हैं और ये अभी जो कोलकाता समेत कई इलाकों में कोलकाता साल्ट लेक और न्यू टाउन में जो है इसमें इन इलाकों में रेड की गई और इसमें कुल पूरा जो एलिगेशन है वो वो 150 करोड़ का मामला है जो इन बैंकों में है। इन बैंकों में पहुंचा था और ये हवाला के थ्रू इर्रेगुलर ट्रांजक्शन के थ्रू आया था। अब इस मामले में जो सर्च ऑपरेशन हुआ है इसमें बहुत सारा और मामला है जिसमें चार्टर फ्लाइट का इस्तेमाल किया गया है अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी के द्वारा इलेक्शन कैंपेन के द्वारा इस तरह के बहुत सारे एलिगेशंस हैं। इसको लेकर के एक रेड ईडी की है और ईडी की पी पीएमएलए के द्वारा और यह जो है कब हुआ जब अरूप विश्वास जो तृणमूल कांग्रेस के पूर्व ट्रेजर हैं उन्होंने लिखित 12 जून को दिया था कि अकाउंट को फ्रीज कर देना चाहिए। ये ये सब किए जाने ये सब के बाद यह सारी प्रक्रिया चल रही है। अबकि पश्चिम बंगाल में सरकार बदल गई है तो सरकार बदलने के बाद थोड़ा सा ईडी को काम करने में सहूलियत हो रही है। इसलिए यह सारी चीजें हो रही है। नहीं तो पहले त ईडी को जाने पर पश्चिम बंगाल पहुंचने पर उनका उनकी पिटाई होती थी। उनके खिलाफ हिंसा होती थी। यह जो बदलाव हुआ है यह सरकार बदलाव के कारण हुआ है। इसलिए यह इन्वेस्टिगेशन आगे बढ़ रहा है। अब इसमें बहुत सारे लोग हैं। बहुत सारे प्लेयर्स हैं। लेकिन ये जो ये जो पूरा का पूरा मामला है यह 440 करोड़ का है। अभी तो 150 करोड़ अकाउंट में लेकिन ये पूरा का पूरा जो है मनी लॉन्ड्रिंग वाला 440 करोड़ का है। और इसी पूरे मामले में ईडी जो है वह इन्वेस्टिगेशन करती हुई दिख रही है, इसमें अभी लंबा समय लगेगा। बहुत सारी चीजें हैं। प्रूफ जुटाए जाएंगे। उसके बाद मामला अदालत में जाएगा। तो ये ये सारी चीजें लेकिन इसके कारण राजनीतिक तौर पर तृणमूल कांग्रेस को मुश्किल आएगी। पार्टी पहले से ही बिखर गई है। विधायक दल टूट गया है। संसदीय दल टूट गया है और संगठन टूट गया है।
Rahul Gandhi युवा वर्ग को लुभाने की पूरी कोशिश

राहुल गांधी लगातार इस कोशिश में है कि किसी तरह से पार्टी को रिवाइव किया जाए और वो इस कारण से जनजी की बात कर रहे हैं। युवाओं की बात कर रहे हैं और इसके लिए कोशिश भी कर रहे हैं। यह अलग बात है कि उनकी कोशिश कई कई बार जिस तरह से वो चाहते हैं वैसा अंजाम उसका नहीं हो पाता है। लेकिन अब उनकी कोशिश ये है कि जंजी और युवाओं को साधे और हमको लगता है कि चाहे 2027 के विधानसभा उत्तर प्रदेश के चुनाव हो, चाहे 2029 के लोकसभा चुनावों की बात हो। संगठन के तौर पर कांग्रेस लगातार इस कोशिश में है। चाहे केसी वेणुगोपाल के की अपनी तरह की कोशिशें हो, राहुल गांधी की कोशिशें हो, मल्लिकार्जुन खड़गे की कोशिशें हो या पूरा का पूरा जो कांग्रेस का अमला है वो इस कोशिश में है। लेकिन ये जो राहुल गांधी की कोशिश है ये इस कोशिश में कई- बार सीरियसनेस दिखती है। कई-कई बार थोड़ा सा लैक्सिटी दिखती है। लेकिन अभी जो उनका सबसे अगला प्रभावी कदम है वो यह है कि लगभग 700 जिला अध्यक्ष जो हैं उनके उनके साथ राहुल गांधी संवाद करेंगे और उस संवाद की भूमिका में यही है कि जितने युवा वोटर हैं चाहे वो रूरल हो, सेमी अर्बन हो या अर्बन हो या मेट्रोपॉलिटन वोटर हो इन सबको साधने की कोशिश है। कांग्रेस की मुश्किल यह हो गई है कि जो युवा मतदाता है वह भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़ा हुआ है चाहे वो हिंदुत्व के नाम पर हो चाहे वो राष्ट्रवाद के नाम पर हो और इसमें सेंध नहीं मार पा रही कांग्रेस। बावजूद
इसके कि बहुत सारी कोशिशें होती हैं। भ्रष्टाचार की बात होती है। नीट के का मामला उठाया जाता है। कॉकरोच जनता पार्टी जैसे राजनीतिक दल आते हैं। लेकिन इन सबके बावजूद लॉ एंड ऑर्डर को लेकर के बात होती है। इन सबके बावजूद जो भारतीय जनता पार्टी का मतदाता है वो अडिग है और मजबूती के साथ उनके खड़ा है। तब ये युवा मतदाता जो सबसे ज्यादा प्रभावी है, वोकल है और सबसे बड़ा चंक है। उसको कोशिश की जा रही है और इसी कोशिश में और इनमें एक बड़ा वर्ग है जो विदेश से पढ़कर आया है उनको भी साधने की राहुल गांधी कोशिश कर रहे हैं और इस तरह के जो डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट के साथ संवाद है। इस तरह के और कई कार्यक्रम आयोजित करने की कांग्रेस की योजना है और उस सबके पीछे जो की फिगर है वह राहुल गांधी हैं और इसी माध्यम से वह चीजों को आगे ले जाने के लिए प्रयासरत हैं। अब कांग्रेस को इसमें कितनी सफलता मिलती है, कितनी नहीं मिलती है, यह तो आने वाला समय बताएगा। लेकिन, कांग्रेस के लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष कुछ सीरियस प्रयास करते हुए दिख रहे हैं। ऐसा उनकी योजना से लग रहा है।
