Power -पैसा -पद या डर क्यों टूट रहे छोटे दल

 

दिल्ली की इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी, यह पार्टी अपना बीजेपी में विलय करना चाह रही है। इस तरह की चर्चाएं चल रही है। कौन है यह इंद्रपस विकास पार्टी? ये वही पार्टी है जिसके 16 पार्षदों ने आम आदमी पार्टी से अलग होकर इन्होंने अपनी एक पार्टी बनाई थी। 2025 में इन्होंने यह पार्टी बनाई थी और अब इतनी जल्दी यह विलय की सोच रहे हैं बीजेपी में और कारण जो है बहुत हद तक समझ में आ रहा है कि जल्दी ही एमसीडी के चुनाव होने वाले हैं। चुनाव होने वाले हैं। 12 चेयरमैन, डिप्टी चेयरमैन और छह स्टैंडिंग कमेटी के जो पद हैं उसके चुनाव होने वाले हैं। और जाहिर सी बात है जब इस समय 16 पार्षद विलय करना चाह रहे हैं तो पद की लालच तो होगा ही।सुनने में आ रहा है कि बड़े आलाकमान नेताओं के साथ बातचीत हो गई और बहुत जल्द ही इसकी घोषणा भी कर दी जाएगी यह कोई बड़ी बात नहीं लगती है। पार्षद है 16 पार्षद हैं। इन्होंने विलय कर लिया बीजेपी के साथ तो कोई बड़ी बात नहीं है। लेकिन अगर देखा जाए जो ट्रेंड बढ़ रहा है कि जो छोटे-छोटे दल हैं अपने दल बना तो लेते हैं, अपनी पार्टी खड़ी कर लेते हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से जो ट्रेंड बदलता जा रहा है राजनीति में कि छोटे-छोटे दल अब बड़ी पार्टी के साथ विलय करना पसंद ज्यादा कर रहे हैं। अपनी पार्टी बनाने की जगह छोटे दल बनाने की बजाय छोटे दल जो है बड़ी पार्टी के साथ विलय कर रहे हैं और आने वाले जो समय की राजनीति होगी उसमें ये माना जा रहा है कि छोटे-छोटे दलों का अस्तित्व अब देश की राजनीति में खत्म सा होने वाला है और इसके कई वजह मानी जा रही है।

Cut Throat Competition है नैतिकता नहीं बची राजनीति में

राजनीति में अब कोई नैतिकता या परंपरा या भाईचारे की बात नहीं रह गई। बिल्कुल कट थ्रोट कंपटीशन की राजनीति हो गई है और ऐसे में छोटे दल जो हैं वो लंबे समय तक इसमें सर्वाइव नहीं कर पाते और राजनीति में अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए यह दल चाहते हैं कि वो बड़े दल में विलय कर ले और यही कारण है एक बड़ा कारण है कि बड़े दल में विलय हो रहा है दूसरा एक कारण जो समझ में आता है जो का जो कारण समझ में आ रहा है कि एमसीडी चुनाव से ठीक पहले 16 पार्षद सोच रहे हैं कि विलय कर ले विलय क्यों कर ले क्योंकि पद की लालसा है। ये सोच रहे हैं विलय करके कोई ना कोई पद जरूर मिल जाएगा क्योंकि अपनी पार्टी में रहकर तो कोई पद नहीं मिल सकता। बड़ी पार्टी का दामन थामेंगे। चाहे जल्दी ना मिले लेकिन देर सवेर आस लगी रहती है कि कोई ना कोई पद मिलेगा। इसके साथ-साथ अगर ज्यादा पैसा भी नहीं है तो बड़ी पार्टी के कंधे पर बंदूक रखकर अपनी राजनीति की रोटियां पकाते रहते हैं। छोटे-छोटे दल के नेता जब बड़ी पार्टी में इनका विलय हो जाता है फिर रुतबा बढ़ता है। आप आप जिस समाज में घूमते हैं, जिन लोगों में घूमते हैं, ये तीन बड़े कारण हैं जो नजर आ रहे हैं राजनीति में कि छोटे दल जो हैं वो चाह रहे हैं कि उनका विलय बड़े दल में हो।और एक बड़ा कारण
जो आजकल देखने में आ रहा है कि जो चिंता सताती है छोटे दलों को कि वो चाहते हैं कि मनमर्जी से विलय हो जाए। तो उसके पीछे कारण यह है कि आजकल टूट बहुत हो रही है। अब टीएमसी की एक बहुत बड़ी जो एक आप देख सकते हैं टीएमसी में ऐसा हुआ कि बहुत बड़ी एक फूट पड़ी। टीएमसी बिल्कुल बिखर गई। उसके बाद आप महाराष्ट्र में जाकर के शिंद ग्रुप को देख सकते हैं। उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंद जो अलग हुए तो पार्टी में ही बिखराव हो जाता है। पार्टी ही अलग हो जाती है और इसके पीछे किन लोगों का हाथ होता है। क्यों होता है आम आदमी को सब पता चलता है कि ऐसा हो रहा है।

विलय की राजनीति ज्यादा पसंद कर रहे नेता -अलग पार्टी नहीं बनानी

हाल ही में राघव चड्डा तमाम सांसदों कुल सात सांसद के साथ आम आदमी पार्टी से अलग हुआ। उसने बीजेपी में विलय होना ज्यादा बेहतर समझा। अपोशनिस्टिक थे। उनको पता था विलय होगा तो जल्दी से जल्दी कुछ ना कुछ मिल ही जाएगा। और अगर अपनी अलग पार्टी बनाएंगे तो वही बात है सर्वाइवल की लड़ाई लड़ना मुश्किल हो जाएगा। तो बहुत ही उन्होंने एक सोचा समझा डिसीजन लिया और अपने पूरे सांसदों के साथ बीजेपी में वो उनका विलय हो गया। महाराष्ट्र में जो खेल चल रहा है इस समय शरद पवार की जोर शोर से चर्चा है कि वो अपनी पार्टी का विलय करना चाह रहे हैं। अब इसके पीछे एक कारण यह भी है कि उनको लग रहा है उनकी पार्टी टूट ना जाए, उनके सांसद बिखर ना जाए। जैसा कि उन्होंने टीएमसी का हाल देखा है कि कि विद्रोह ना कर दें। तो चर्चाएं यह भी चल रही है। लेकिन इनके साथ-साथ अंदर ही अंदर शरद पवार को यह पता चल रहा है कि अब पार्टी की जो ताकत है वह खत्म हो रही है और जो उसके सांसद है वो भी कुछ ना कुछ सत्ता पाने की आस लगाए बैठे हैं कि कोई बड़ा पद मिल जाए उनको राज्य सरकार में जहां की सत्ता है। तो ऐसे में जो चर्चाएं चल रही है कि अगर वो बीजेपी का दामन थामते हैं जिसकी चर्चा ज्यादा है। जिसकी उम्मीद ज्यादा देखी जा रही है तो उनको पता है कि थामते ही बीजेपी का कुछ ना कुछ बड़ा पद उनको ना मिले। लेकिन उनकी बेटी सुप्रिया सुनने को मिल सकता है और अगर वह कांग्रेस का भी दामन थामते हैं तो एक बहुत पुरानी नेशनल पार्टी है कांग्रेस, चाहे बहुत हार का सामना कर चुकी हो लेकिन उसके बावजूद देश की पुरानी , बड़ी पार्टी है कांग्रेस। बीजेपी तो इस समय पार्टी बनी है लेकिन कांग्रेस की जो अपनी पैठ है बहुत पुरानी है। हर शहर हर गांव हर जिले का बच्चा-बच्चा कांग्रेस पार्टी को जानता है। तो एक बड़ी पार्टी के साथ जुड़ने से वैसे ही बहुत से फायदे हो जाते हैं। आपका कद जो है ऊंचा हो जाता है।

छोटे दलों का Survival बहुत मुशिकल होता जा रहा है

राजनीति बदल गई है और इस बदलती राजनीति में छोटे दलों का survival बहुत मुशिकल होता जा रहा है, आज सिर्फ पद- पैसा कंपटीशन पावर की राजनीति रह गई है। और इसके चलते हर कोई चाहता है कि उसको भी पावर जल्दी से जल्दी मिले। पैसा कमाने के अवसर जल्दी से जल्दी मिले। अगर वह कमा सकता है और उसके लिए या तो सत्ता में बैठी पार्टी जो है वह उसको पद दे सकती है, तो मानते हैं कि आने वाली राजनीति में जो  छोटे-छोटे दल हैं उनका सर्वाइवल बहुत मुश्किल हो जाएगा और यह जो है बड़े दलों का बड़ी पार्टियों का दामन थाममेंगे। विलय की परंपरा लगातार बढ़ती जाएगी।