चार साल नेवी में नौकरी के बाद बाहर आएंगे अग्निवीर
सितंबर में अग्निवीर के चार साल पूरे हो रहे हैं, ये वो हैं जिन्होंने नेवी में सर्व किया और अब समय पूरा हो गया और उसको लेकर एक बार फिर वही प्र्शन की अब इनका क्या होगा। क्योंकि बहुत से एक्सपर्ट्स शुरू से इस योजना को बिल्कुल गलत बता रहे हैं, उनना मानना है कि इससे सेना के moral पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। युवाओं को सेना में लर्निंग में पूरा टाइम लगता है और जब एक युवा कुछ सीखेगा उसके बाहर जाने का समय आ जाएगा, ये देश की सुरक्षा से भी खिलवाड़ है, साथ ही युवाओं को बाहर निकलकर क्या नौकरी मिलेगी इस पर भी बड़ा सवाल खड़ा किया हुआ है. और अब चार साल हो गए और अब असली परीक्षा सामने आ गई है। अभी नेवी का बाहर एक दल बाहर निकल निकल रहा है, उसके तीन चार महीने आर्मी और एयर फोर्स में जो अग्निवीर एडमिट हु थे जो जिन्होंने जॉब की थी वो भी उनका एक बैच बाहर निकलेगा।
25 फीसदी रहेंगे नेवी में बाकी को कहां मिलेगी नौकरी बड़ा सवाल—-एक्सपर्ट शुरू से इस योजना के खिलाफ -देश की सुरक्षा से खिलवाड़
अब इनके लिए सबसे बड़ी समस्या नौकरी की है, जैसा कि अग्निपथ स्कीम में प्रावधान है कि 25 फीसदी अग्निवीरों को रखा जाएगा, जो बेस्ट होंगे, बाकी को बाहर कर दिया जाएगा। इस स्कीम को लेकर काफी हंगामा हुआ था और अभी तक एकस्पर्ट इसको गलत मान रहे हैं, सेना में तरह के प्रयोग के वो खिलाफ हैं ,हमारी नेशनल सिक्योरिटी पर असर और साथ ही सेना में चार साल का करने के बाद इन युवाओं को कहां नौकर मिलेगी और इसको लेकर काफी हंगामा हुआ था अब एकजेक्टली इस योजना की समीक्षा धरातल पर नजर आएगी । वैसे कईं राज्य सरकारों ने यह भी घोषणा की थी कि अगिनपथ से निकले युवाओं को वह अपने राज्यों में सुरक्षा एजेंसियों में कोटा देंगे, अब समय आ गया है उन दांवों को भी देखा जाएगा, देखना है कि ये कितना प्रैक्टिकल हो पाता है।
इससे बेस्ट युवाओं के चयन में मदद मिलेगी-सरकार पर अतिरिक्त बोझ कम होगा
लेकिन दूसरी तरफआपको बता दें अग्निपथ को सपोर्ट भी किया जा रहा है, कई बाहर देशों के भी एग्जांपल दिए जा रहे हैं, जहां हर युवा को voluntary आर्मी में सर्व करना जरूरी होता है , वहां भी युवा बाहर निकलते हैं और अलग-अलग सेक्टर में उनको जॉब मिल जाती है। सरकार के जो एक्सपर्ट थे जो इस योजना को सपोर्ट कर रहे थे वो इस तरह का तर्क दे रहे हैं कि बाहर देशों में ये योजना बहुत ही सफलतापूक चल रही है, इससे सरकार पर अतिरिक्त वेतन और पेंशन का बर्डन बचेगा, साथ ही बेस्ट युवाओं का भी चयन होगा। इस बचे हुए बजट का इस्तेमाल सेना के विकास के लिए ही किया जाएगा। अग्निपथ योजना के पक्ष में लोगों का यह भी कहना था कि क्योंकि हमारे देश में रोजगार का बहुत बुरा हाल है तो ज्यादातर युवा जो सेना में आते हैं कोई प्रोफेशन या देशभक्ति का माध्यम नहीं होती। उनके लिए सेना एक नौकरी होती है और यह सच है। आज भी देश के बहुतसे गांव ऐसे हैं जहां के पूरे के पूरे गांव के जो युवा है वो सेना में भर्ती होते हैं क्योंकि उनको और कहीं रोजगार के अवसर नहीं मिल पाते हैं। सेना में भर्ती होते हैं। रोजगार के अवसर मिलते हैं। तो इन एक्सपर्ट्स का ये कहना है कि जो ऐसेयुवा जो इस तरह से सेना में भर्ती होते हैं। चार साल का जो पीरियड दिया जाता है उससे यह पूरा साबित हो जाता है कि कौन से युवा वास्तव में फोर्स के काबिल हैं।
अग्निवीरों का कोटा 25 फीसदी को बढ़ाकर 50 फीसदी तक करने की मांग
वैसे एक मांग जो है वो अग्निपथ को लेकर लगातार बनी हुई है और सरकार भी इस दिशा में ये सोच रही है कि 25% रिटेंशन की जाएगा अगर उसको 50% रिटेंशन कर दिया जाए। कईं फॉर्मर मेजर आर्मी जनरल कहते भी हैं कि आपको योजना लागू भी करनी है तो कम से कम 50% टू 70% रिटेंशन रखा जाए। 30% को आप बाहर कीजिए। उनको बाहर रोजगार के अवसर दीजिए। ऐसे में नेशनल सिक्योरिटी के साथ भी किसी भी तरह की कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं होगा और ज्यादातर युवाओं को सेना में सर्व करने का मौका मिलेगा। वैसे हाल फिलहाल में मोदी जी ने एक भाषण में कुछ इसी तरह का बयान दिया था। कुछ इस तरह के संकेत देने शुरू किए थे कि सरकार इस दिशा में सोच रही है। तो परीक्षा की घड़ी है। सरकार के लिए भी है और उन लोगों के लिए भी है जो चार साल नौकरी करके बाहर निकल रहे हैं। यंग एज में बाहर निकल रहे हैं। उको नौकरी कहां मिलेगी? यह भी बहुत एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। और इस सब के बीच एक बात और भी हुई थी जिस पर चिंता व्यक्त की जा रही है कि नेपाल के लोग जो गोरखा हमारी सेना में आते हैं उन्होंने हमारी सेना में आना बंद कर दिया है उनक एक्सपर्टाइज हमको मिलनी बंद हो गई है जो सेना के लिए एक बहुत बड़ा लॉस है और ये भी खतरा महसूस किया जा रहा है कि भारत में अगर उनको जगह नहीं मिली सेना में वो तो चीन की तरफ जा सकते हैं।
