चाणक्य की जबरदस्त नीति बिट्टू् को सौंपी कमान राहुल को सैट करने की
इस बार साफ दिख रहा है कि पशिचम बंगाल की तरह बीजेपी पंजाब में अपने बलबूते पर सरकार बनाने के लिए पूरी तरह से मैदान में उतर चुकी है, हाल फिलहाल में बीजेपी की बनाई गई कईं रणनीति बता रही हैं कि बीजेपी पंजाब चुनाव को लेकर बहुत ज्यादा सीरियस है और इस राज्य को जीतना अपनी प्रतिष्ठा ही बना चुकी है.खोलने शुरू कर दिए हैं। सबसे पहले बीजेपी ने नजर सिख जाट वोटरों को लुभाया है और पहले से ही सरदार केवल सिंह ढिल्लों को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी दे दी। आपको बता दें कि ढिल्लों पंजाब में प्रदेश अध्यक्ष बनने वाले पहले जाट सिख नेता हैं। इसके बाद बीजेपी ने पंजाब में सक्रिय कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं से मुकाबले करने के अपने तेजतर्रार नेताओं को मोर्चे पर खड़ा करना शुरू कर दिया है। याद कीजिए अभी हाल ही में जब केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने पद से इस्तीफा दिया था तो वापस उन्हे राज्य सभा से निर्वाचित नहीं किया गया क्योंकि माना जा रहा है इसके पीछे बीजेपी चाणक्य का दिमाग काम कर रहा था, उन्हें पता था कि पंजाब के चुनाव में रवनीत सिंह बिट्टू bjp के लिए बहुत बड़ी asset बन सकते हैं और वही हुआ, जिस तरह से बिट्ट् पंजाब में एक के बाद एक काग्रेस पर हमला कर रहे हैं, उससे साफ दिखता है कि पार्टी ने उन्हें पूरी तरह से खुली छूट दे दी है कांग्रेस की नाक में दम करने की, वहीं आम आदमी पार्टी से आए राधव चड्डा और उनकी पूरी टीम का भी पंजाब में पूरी पैठ है और चाणक्य उसको भी पूरी तरह से भुनाने की रणनिती बना रहे हैं।
खुलकर कहा गांधी परिवार के किसी सदस्य से नहीं मिलाएंगे हाथ
आपको बता दें कि बिट्टू भी सिख जाट हैं और वह पंजाब के पूर्व सीएम सरदार बेअंत सिंह के पोते हैं और मार्च 2024 में ही बीजेपी में शामिल हुए हैं। तब से अब तक बिट्टू अपने तीखे बयानों से कांग्रेस नेताओं को परेशान कर रहे हैं। सितंबर 2024 में उन्होंने राहुल गांधी को देश का नंबर वन आतंकवादी बताकर सबको चौंका दिया था, क्योंकि अभी तक बीजेपी के किसी नेता ने राहुल के खिलाफ ऐसा मोर्चा नहीं खोला था, यही नहीं हाल ही में जब संसद परिसर में बनी सीढियों पर राहुल गांधी ने उन्हें गद्दार दोस्त कहा, तब बिट्टू चुप नहीं बैठे उन्होंने सीधे गांधी परिवार पर ही निशाना साध दिया। उन्होंने राहुल गांधी को देश का दुश्मन बताया यही नहीं उनके एक बयान पर भी काफी हंगामा मचा गया था जिसमें उन्होंने कहा था कि जिस पार्टी और परिवार का इतिहास सिखों के खिलाफ दमन, स्वर्ण मंदिर पर कार्रवाई का गवाह रहा है। वह यानी गांधी परिवार के किसी भी सदस्य से हाथ नहीं मिलाएंगे।
Gandhi परिवार अगर 4 सीटों पर चुनाव लड़ सकता है तो कोई और परिवार क्यों नहीं
और अब पंजाब में बिट्टू एक के बाद एक बयानों से कांग्रेस को हैरान और परेशान कर रहे हैं, वो पूरी तरह से पंजाब विधानसभा चुनाव को जीताने के मोड में आ चुके हैं और इसके लिए उन्होंने सबसे पहले कांग्रेस की एक परिवार, एक टिकट के नीति पर कमेंट किया,यही नहीं उन्होंने अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और सुखजिंदर सिंह रंधावा के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान में उन्होंने रंधावा का समर्थन किया जिसमें रंधावा ने कहा है कि अगर किसी परिवार में चार ऐसे काबिल उम्मीदवार हैं जो चुनाव जीत सकते हैं, तो कांग्रेस उन चारों को टिकट क्यों नहीं दे सकती? टिकट बंटवारे का आधार पारिवारिक संबंध नहीं, बल्कि चुनावी क्षमता होनी चाहिए।बस इसके बाद एक बार फिक रवनीत सिंह बिट्टू ने इस बयान को लपक कर कांग्रेस परिवार को लपेट लिया है, उन्होंने कहा कि अगर गांधी परिवार के तीन सदस्यों को चुनाव टिकट मिल सकते हैं, तो किसी दूसरे परिवार को क्यों नहीं, जिसके पास चार ऐसे उम्मीदवार हों जो जीत सकते हैं?
कांग्रेस के पी. चिदंबरम को भी नहीं छोड़ा और उन्हें दिमागी नक्सलों का हेडमास्टर बताया
हाल ही में वंदे मातरम और दिमागी नक्सली विवाद पर भी बिट्टू ने तीखी टिप्पणी की और कहा कि राहुल गांधी इन बातों को आसानी से नहीं समझते, लेकिन माता जी यानी सोनिया गांधी जल्दी समझ जाती हैं। उन्होंने कहा कि गांधी परिवार के लिए जनता, संसद और लोकतंत्र की कोई अहमियत नहीं है, तभी वो वंदेमातरम का विरोध कर रहे हैं, यही नहीं दिमागी नक्सल कमेंट को लेकर उन्होंने पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम को भी नहीं छोड़ा और उन्हें दिमागी नक्सलों का हेडमास्टर बताया। अब बिट्टू ये सब बयान पंजाब में दे रहे हैं और कांग्रेस को वहां राष्ट्रवाद के मुद्दे पर हर तरफ से घेरने की कोशिश कर रहे हैं, पता ये भी चला है कि चाणक्य ने कांग्रेस के खिलाफ लड़ने के लिए रवनीत बिट्टू को पूरी आजादी दे दी है यानी उनके दोनों हाथ खोल दिए हैं।बीजेपी उन्हें विधानसभा चुनाव में जालंधर कैंट या लुधियाना से मैदान उतार सकती है, जालंधर कैंट से उनके दादा बेअंत सिंह चुनाव जीते थे। खुद बिट्टू आनंदपुर साहिब और लुधियाना के सांसद रहे हैं। वहीं दूसरी तरह पंजाब चुनाव से पहले BJP में कलह निपटाने के लिए केवल सिंह ढिल्लों ने 36 जिला इंचार्ज को बदल दिया। मकसद यही माना जा रहा है कि इससे बीजेपी आपस के समन्वय को मजबूत करना चाहती है, और साथ ही , जमीनी स्तर पर कामकाज बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है। हाल ही में कुछ जगहों पर जिला नेतृत्व में बदलाव को लेकर पंजाब बीजेपी के भीतर मतभेद सामने आने के बाद ढिल्लो ने यह कदम उठाया है। उनकी पूरी कोशिश है कि पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने के लिए बीजेपी को पूरी तरह से तैयार किया जाए।
