उड़ीसा के लोगों में अच्छी खासी नाराजगी धर्मेंद्र प्रधान की होगी वापसी

धर्मेंद्र प्रधान पूर्व शिक्षा मंत्री हैं ,उनकी मंत्रालय में वापसी हो सकती है क्योंकि अब जो भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं नितिन नवीन उनकी टीम बन करके आ गई और उसमें बहुत सारे इशारे बहुत सारे बदलाव ऐसे हुए हैं जो यह इशारा कर रहे हैं कि बहुत जल्दी ही कैबिनेट में बदलाव आ सकता है और वह होने वाला है। लेकिन इसमें जो सबसे महत्वपूर्ण बात है कौन जा रहा है इसमें भी पांच छह नाम स्पष्ट हो गए हैं। लेकिन धर्मेंद्र प्रधान को वापसी की बात हो रही है कि उनको कोई ऐसा मंत्रालय दूसरा दिया जा सकता है। अब सरकार का या सरकार से जुड़े लोगों का तर्क यह है कि जो युवा है उसकी डिमांड यह थी कि धर्मेंद्र प्रधान को त्यागपत्र देना चाहिए। क्योंकि उनके रिजीम में इस तरह की बातें हुई। बावजूद इसके कि सीधे तौर पर धर्मेंद्र प्रधान का किसी भ्रष्टाचार के मामले में होने का आरोप उन पर नहीं था। उनका त्यागपत्र मोरल ग्राउंड पर था। अब वो शर्त पूरी हो गई। उनका त्यागपत्र हो गया। तो एक ऐसा व्यक्ति जो दोषी ना हो फिर भी उसको इनकारसेसरेट करना उसको दोषी ठहराना यह उचित नहीं है और धर्मेंद्र प्रधान ने भारतीय जनता पार्टी को बहुत सारे चुनाव दिए जिता करके दिए जब तक संगठन की टीम नहीं आई थी तब तक ऐसा कहा जा रहा था कि उनको शायद महासचिव बनाया जा सकता है लेकिन अब टीम आ गई है तो इस तरह की खबरें हैं कि उनको फिर से मंत्रालय में कहीं कहीं ना कहीं हो सकता है कोई बहुत महत्वपूर्ण मंत्रालय ना दिया जाए लेकिन उनको कहीं ना कहीं अकोमोडेट किया जा सकता है। अब वो किस तरह से अकोमोडेट किया जाएगा ये तो प्रधानमंत्री ही बता सकते हैं। लेकिन ये बात बहुत जोर शोर से निकल कर के आ रही है कि उनकी वापसी लगभग तय है, उसके पीछे कारण ये है कि वो एक ओबीसी से आते हैं। ओबीसी की नाराजगी होगी। दूसरी ये कि उड़ीसा में बहुत दिनों के बाद भारतीय जनता पार्टी अपनी सरकार बना पाई है। वहां से अच्छे एमपीज जीत करके आए हैं। वो खुद भी लोकसभा जीत करके आए हैं उड़ीसा से। तो वो उड़ीसा के लोगों को नहीं नाराज करना चाह रहे। इसलिए कि उड़ीसा में इस बात को लेकर के अच्छी खासी नाराजगी है। जहां यह बताया जा रहा है कि लोग धर्मेंद्र प्रधान के हटाए जाने से नाराज हैं और उनको कहीं ना कहीं अकोमोडेट करना पड़ेगा और इसलिए लगता है कि उनके मंत्रालय में वापसी होगी।

शहजाद पूनावाला का यह तंज Congress तिलमिला उठी

शहजाद पूनावाला , कांग्रेस में जा तो सकते हैं लेकिन उनकी शर्त है कि कांग्रेस से सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, वाड्रा को हटा दिया जाए और नेहरू के कृत्यों के लिए माफी मांग ली जाए। मतलब यह कि अभी तक लोग यह कहते थे कि जो सिखों का का दंगा के खिलाफ दंगा हुआ मतलब मसाकर हुआ या जो मुसलमानों के खिलाफ दंगे हुए उन पर माफी मांगी जानी चाहिए। शहजाद पूनावाला कह रहे हैं कि नेहरू के कृत्यों के लिए कांग्रेस को माफी मांगनी चाहिए। अब क्या वो क्योंकि वो खुद पुणे के हैं तो जो पुणे में चित पावन ब्राह्मण का मसाकर हुआ था वो जो उन्होंने चीन को यूएन के परमानेंट सिक्योरिटी काउंसिल के लिए प्लटर पर आया हुआ ऑफर चीन को दे दिया। वो चीन के साथ हार या और इस तरह की असफलताओंके लिए उनको उनकी माफी चाहते हैं या क्या चाहते हैं यह तो स्पेसिफाई नहीं किया लेकिन उनके पास बहुत सारे इस तरह के तर्क होते हैं जो वो बताना चाहेंगे। अब सोनिया गांधी को लेकर के तो मामला अभी राहुल गांधी को लेकर के सामने आ गया। जब उन्होंने वंदे मातरम का अपमान किया। अब उसको राहुल गांधी और पूरा का पूरा कांग्रेस डिफेंड कर रहा है। अब इसको कब तक डिफेंड करेंगे, कैसे डिफेंड करेंगे, वह भी महत्वपूर्ण है। लेकिन यह बात शहजाद पूनावाला ने स्पष्ट कर दी कि इन लोगों की माफी के बाद भी उनकी ही उनकी कांग्रेस में वापसी होगी जो अपने आप में महत्वपूर्ण बात है। हालांकि ये इतने ऐसी चीजें हैं जो सिर्फ इसलिए कही जाती है कि उनको अब कांग्रेस में नहीं जाना है। लेकिन इसके अलावा जो एक महत्वपूर्ण बात यह है कि 15 अगस्त को जो वंदे मातरम को लेकर के सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ है जिसमें अह सोनिया गांधी वंदे मातरम जब प्ले किया जा रहा था तो इसको स्टॉप स्टॉप किया उन्होंने। अब इसको लेकर के प्रश्न भी किए जा रहे हैं और इसके तरह-तरह के बातें निकल कर के आ रही है। जब पहली बार यह मामला आया तो जो अधिकृत लोग हैं मैं किसी का नाम अकेले का नहीं लेना चाह रहा हूं। लेकिन जो अधिकृत लोग हैं उन्होंने यह बोला कि मल्लिकार्जुन खड़गे 83 84 साल के हैं और वो थक गए थे इसलिए सोनिया जी उनके लिए कुर्सी मंगा रही थी। अब इसके बाद एक फिर बयान आया कि जो है कार्यालय में तो पूरा गाया गया। तो क्यों बखेड़ा बनाया जा रहा है? एक वीडियो और आया जिसमें राहुल गांधी ये कहते हुए पाए जा रहे हैं कि हम अपना जो है अब वी हैव आवर ओन वर्जन हम वो गाएंगे हम सरकार वाले उसमें नहीं गाएंगे इसके इसके बाद बहुत सारी जगहों पर मुकदमे दर्ज हुए केस फाइल किया गया राहुल गांधी सोनिया गांधी सबके खिलाफ लेकिन उससे महत्वपूर्ण बात और है जो एक कदम आगे बढ़ती है कि सी डब्ल्यूसी की बैठक बुलाई गई और बैठक 4 घंटे चली और उस बैठक के बाद यह फैसला किया गया कि वंदे मातरम का दो ही स्टैंजा गाया जाएगा। कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम का सिर्फ दो स्टैंजा गाया जाएगा जो 1937 में कांग्रेस के अधिवेशन में पारित हुआ था। अब उसमें बहुत सारे लोगों का गांधी का, नेहरू का और सबका नाम लिया जा रहा है। इसमें दो चीजें हैं। पहला ये कि तब भी मुस्लिम लीग से डर के यह फैसला लिया गया था और अब भी जो है मुस्लिम वोट को लेकर के फैसला ये किया गया है। दूसरी बात यह है कि यह बात इसमें सोनिया गांधी राहुल गांधी आ रहे हैं और सोनिया की ओरिजिन को लेकर के किक चकि उनकी ओरिजिन इटली की है। इसलिए उनका जो देश के प्रति लगाव है वो वैसा नहीं रिफ्लेक्ट होता है। इसको बचाने के लिए यह कांग्रेस वर्किंग कमेटी से पास किया गया कि उन अब कांग्रेस के कार्यक्रमों में वही गाया जाएगा जो संसद से पास किया हुआ है वो नहीं माना जाएगा। अब ये अपने आप में बहुत विवादित बात है। इसलिए इसमें बहुत सारी चीजें निकल कर के आएंगी कि सेकुलरिज्म जो है वो नहीं था जब संविधान बना था। बाद में जोड़ा गया है तो सेकुलरिज्म नहीं माना जाना चाहिए। नहीं हम नहीं मानेंगे सेकुलरिज्म को। ये इस तरह के बहुत सारे विवादित प्रश्न उठेंगे। लेकिन कांग्रेस इसमें एक बार बहुत बुरी तरह से फंसती हुई नजर आ रही है।

 

मेरे बाप को नहीं जानते क्या Zen g बोलना इसी बात को दोहराना है

जंतरमंतर में जब से जंजी को सफलता मिली है और उनके आंदोलन के लंबे आंदोलन के बाद जिस तरह से उन्होंने सरकार को मजबूर कर दिया कि वो शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का त्यागपत्र ले उसके बाद से जिनजी में एक अलग तरह का उत्साह दिख रहा है और कई कई बार वह अपनी लिमिट भी क्रॉस कर रहा है जो देश के लिए ठीक नहीं है। अब जंजी को दिमाग में और कई कई बार कुछ लोग यह समझ रहे हैं कि जो विरोध करेगा वही जंजी है। यह एक गलत धारणा लोगों के मन में आ रही है और ये अपने खतरनाक रास्ते की तरफ बढ़ चला है। उसमें जो जनजी आंदोलन में शामिल लोग थे उनकी भूमिका भी ठीक नहीं है जैसे जैन जी के एक प्रवक्ता जो हैं वो झारखंड में पुलिस वालों को हड़काते हुए या बदतमीजी करते हुए नजर आए। अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के एक स्कूल में पहुंच जाते हैं और वहां पर सबसे ऐसे पूछते हैं जैसे वो मुख्यमंत्री हो, डीएम हो या कोई शिक्षा विभाग के अधिकारी हो। इसके अलावा कश्मीर में एक घटना हुई जम्मू कश्मीर में जहां एक आर्मी कॉन्वॉय को रोक दिया के कारण बाकी लोगों को रोक दिया गया था। तो वहां पर एक महिला ने जिस तरह से शोर मचाना शुरू किया वो यह बताता है कि जंजी या जंजी के बारे में जो कंफ्यूजन है पहली तो यह कि कौन जंजी हैं। दूसरा है कि जंजी को क्या कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार है और वो कुछ भी करें, कुछ भी बोले, कुछ भी करता रहे चाहे वह कानून अपने हाथ में ले। हालांकि जंतरमंतर पर भी जंजी के अंदर आंदोलन में घुसे हुए लोगों ने कानून हाथ में लिया था। अब कॉन्वॉय को लेकर के एक नियम है, एक कानून बना हुआ है और कॉन्वॉय गुजरने में टाइम लगता है। प्रधानमंत्री का कॉन्वॉय गुजरता है। दिल्ली में सारे ट्रैफिक रोक दिए जाते हैं और आर्मी तो भारतीय लोगों की सुरक्षा के लिए ही वहां पर अपने कॉनवॉय को लेकर के आती है। जाती है। लद्दाख में जाने वाला कॉनवॉय था। तो जिस तरह से महिला ने यह बोला कि वो जंजी है और उसके बाद जिस तरह से उन्होंने देश के खिलाफ बात की कि जम्मू कश्मीर के लोगों का जीना हराम कर दिया था और अब टूरिस्ट का जीना हराम कर दिया है और उसकी बातें संसद पहुंचेगी। बहुत सारे नेशनलइंटरेस्ट को कॉम्प्रोमाइज करके इस तरह की चीजें संसद में होती हुई दिख रही है। सिर्फ इसलिए कि सरकार को नीचा दिखाना है सरकार से ज्यादा मोदी को। तो क्या यह जो कानून तोड़े जा रहे हैं चाहे अभजीत दीप के चाहे उनके प्रवक्ता या जिनजी के नाम पर कोई एरागरा नथू कह रहा है। क्या यह सरकार अलऊ करेगी या इस तरह के चीजों पर कार्यवाही की जाएगी?