BJP नई राष्ट्रीय टीम – दो मुस्लिम नेता-चाणक्य एक तीर से दो शिकार

बीजेपी पर हमला करने के लिए विपक्ष के पास एक मुद्दा तो हमेशा ही बना रहता है और वो है बीजेपी की टाप टीम में मुस्लिम चेहरों की कमी , लेकिन बीजेपी चाणक्य ने वो चक्रव्यूह रच दिया कि अब यह मुद्दा भी अब विपक्ष के हाथ से फिसलता नजर आ रहा है। जी हां जिस तरह से बीजेपी ने अपने राष्ट्रीय संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए 65 पदाधिकारियों की नई टीम घोषित की है और इसमें सबसे खास है कि दो मुस्लिम चेहरों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। डॉ. तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि कुंवर बासित अली को भाजपा के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चे की कमान सौंपी गई है। आपको बता दें कि ये दोनों नेता उत्तर प्रदेश से हैं और काफी लंबे समय से भाजपा के संगठन में सक्रिय हैं। माना जा रहा है कि चाणक्य ने इन नियुक्तियों के जरिए एक तीर से दो शिकार करने की कोशिश की है। सबसे पहले यूपी विधानसभा चुनाव जो सिर पर खड़े हैं वहां इन नेताओं को मुस्लिम समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, मुस्लिम वोटर्स के बीच बीजेपी इन नेताओं के जरिए अपनी पैठ बनाने की कोशिश करेगी, दूसरा मुस्लिम लोगों को संगठन में टाप जगह देकर विपक्ष के लगातार होते हमलों का भी चाणक्य ने सही समय पर जवाब दे दिया है।

UP में आने वाले चुनाव को देखकर इन नेताओं को संगठन में लाना बड़ी रणनीती

लेकिन माना जा रहा है कि यूपी में आने वाले चुनाव को देखते हुए इन मुस्लिम नेताओं को जल्दी ले जल्दी बड़े पदों पर बिठा दिया गया है , जिससे यूपी में इसका पूरा फायदा उठाया जा सके, क्योंकि 403 विधानसभा और लोकसभा की 80 सीटों वाला यह राज्य राष्ट्रीय चुनावों के लिए भी अहम है क्योंकि यूपी की विजय ही तय करती है कि केंद्र में कौन पार्टी सरकार बना रही है। इसी को ध्याने में रखकर बीजेपी चाणक्य सारे गणित -भाग कर रहे हैं, क्योंकि वो भी जानते हैं कि 2019 के मुकबले 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा का प्रदर्शन बहुत ही कमजोर रहा था। ऐसे में बीजेपी चाहती है कि यूपी में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले हर वर्ग के वोटर्स को लुभाया जा सके।

अल्पसंख्यक समुदाय की अलग -अलग बिरादरियों वर्गों तक राजनीतिक संवाद बढ़ाने की कोशिश

चाणक्य की इस नीती के तहत बीजेपी मुस्लिम समाज में अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश करेगी। तारिक मंसूर और बासित अली की सामाजिक पृष्ठभूमि अलग-अलग है। एक ओर तारिक मंसूर का जुड़ाव अलीगढ़, शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र से है, वहीं बासित अली पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुस्लिम राजपूत समाज से आते हैं और लंबे समय से संगठन में सक्रिय हैं। और इसळिए माना जा रहा है कि दोनों को अलग-अलग समाज में बीजेपी का संदेश पहुंचाने वाले चेहरों के रूप में काम सौंपा जाएगा। बीजेपी की यह भी कोशिश है कि मुस्लिम समाज को एकसमान वोट बैंक मानने की बजाय उसमें मौजूद अलग-अलग बिरादरियों और सामाजिक वर्गों तक राजनीतिक संवाद बढ़ाया जाए और इसी के चलते पार्टी की रणनीति में खासतौर पर पसमांदा मुस्लिमों पर भी ध्यान दिया जाने की कवायद चल रही है।