PM मोदी का करीबी ना योगी का करीबी ये बने नए अधिकारी राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का नया सीईओ नियुक्त हो गया है। अब ये लंबे समय से चला आ रहा था कि नया सीईओ अपॉइंट होगा। वहां भ्रष्टाचार का जिस तरह से मामला उजागर हुआ था उसके बाद ये पूरी प्रक्रिया चल रही थी। लेकिन जो नाम निकल कर के आया है वो बहुत महत्वपूर्ण है। वैसे केंद्र की सरकार, बहुत सारे सरप्राइजेस करते रहते हैं। लेकिन ये केंद्र सरकार के या किसी सरकार के हस्तक्षेप में नहीं था। यह मामला दूसरे तरह का था और अभी जो नाम निकल कर के आया है वह है एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का। अब जितेंद्र मिश्रा सामान्यत यह कहा जा रहा था कि किसी ब्यूरोक्रेट को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है और पूर्व जो दो आईएएस अधिकारी हैं एक तो प्रिंसिपल सेक्रेटरी प्रधानमंत्री के हैं निरपेंद्र मिश्रा उनका नाम चल रहा था और दूसरा अवनीश सिन्हा अवनीश अवस्थी का नाम चल रहा था। वो एडिशनल चीफ सेक्रेटरी के पद से रिटायर हुए और उनको बहुत योगी आदित्यनाथ का नजदीकी माना जाता है। लेकिन इन सबको अलग करते हुए जितेंद्र मिश्रा को ये जिम्मेदारी अहम जिम्मेदारी दी गई है। और जितेंद्र मिश्रा का fame वो ऑपरेशन सिंदूर का नेतृत्व एयरफोर्स का वाला ये यही कर रहे थे और जिस तरह से प्रसेशन के साथ एयर फोर्स ने कामयाबी ऑपरेशन सिंदूर में दिखाई थी तो वो काबिले तारीफ थी। लेकिन उसके बाद उनको यह जिम्मेदारी सौंपना यह निश्चित तौर पर सरप्राइजिंग है। कुल मिलाकर के 5800 एप्लीकेशनेशंस एप्लीेंट्स आए थे। जिनमें से 16 को फाइनललाइज किया गया था। 16 को फाइनललाइज किए जाने के बाद उसमें से तीन फाइनली शॉर्टलिस्टेड हुए थे। जिस पर जो तीन सदस्य कमेटी बनी थी जिसको फाइनलाइज करना था। जस्टिस प्रमोद कोहली लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और एक न्यूक्लियर साइंटिस्ट इस टीम में थे डॉक्टर सुरेश हवारे। तो यह तीन सदस्य समिति ने जितेंद्र मिश्रा एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम पर मोहर लगाई और उनके दूसरा ये कि सामान्यत ऐसा माना जाता है कि कोई व्यक्ति हो अगर वो सेना से होगा तो वो प्रोफेशनलली बेहतर काम करता है और नो नॉनसेंस वाले एटीट्यूड का होता है। इसलिए भी एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का को ये भूमिका दे दिए जाना महत्वपूर्ण है।

 

UP के 63% लोग अभी भी योगी आदित्यनाथ को चाहते अपना cm 

2027 में यूपी में विधानसभा चुनाव होने हैं तो उसमें बहुत सारे सर्वेज आ रहे हैं और ज्यादातर सर्वे यह बता रहे हैं कि अभी जो समाजवादी पार्टी और के मुखिया अखिलेश यादव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच जो पॉपुलरिटी का गैप है वो अच्छा खासा बड़ा है। और एक सर्वे आया है जिस सर्वे पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। वो सर्वे यह बताता है कि ऑनलाइन वोटर का सर्वे है। वो बताता है कि लगभग 63% लोग अभी योगी आदित्यनाथ के साथ बहुत मजबूती के साथ अपना उनको विश्वास जता रहे हैं और ये योगी आदित्यनाथ का उत्तर प्रदेश में तीसरा टर्म होगा जब वो मुख्यमंत्री पद के लिए हालांकि नाम घोषित उनका किया जाएगा या नहीं किया जाएगा ये एक बड़ा प्रश्न है। लेकिन जो बात निकल कर के आ रही है वह यही कि 63% से ज्यादा लोग जो है वह योगी में अभी भी विश्वास कर रहे हैं तीसरे टर्म में। दूसरी तरफ लगातार चुनाव हारने वाले और हालांकि 2024 के चुनाव में बीजेपी को हराया है अखिलेश यादव ने। ज्यादा सीट लेकर के आए हैं। अपने पिताजी से भी ज्यादा सीटें समाजवादी पार्टी को दिलाने का उन्होंने एक रिकॉर्ड कायम किया है। उनको 37% लोगों का ही विश्वास हासिल है। अब इस बीच अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ के बीच में वाक विवाद भी शुरू है। मतलब जिसको बोलते हैं कि जवाबी वो है। एक अगर अखिलेश यादव कोई बात कहते हैं तो योगी आदित्यनाथ उसके जवाब में कुछ कहते हैं या योगी आदित्यनाथ कोई बात कहते हैं तो अखिलेश के पास तुरंत जवाब रहता है और केवल भाषणों में नहीं ये Twitter पर सोशल मीडिया पर हर जगह निकल कर के आ रहा है। इसका महत्वपूर्ण कारण अखिलेश यादव के लिए ज्यादा जिसको बोलते हैं चर्चा के लिए या ज्यादा इशू वाला है। वो इसलिए कि अगर यह तीसरी बार ऐसे ही परिणाम आते हैं जिस तरह का सर्वे बता रहा है तो अखिलेश यादव के लिए मुश्किल वाली स्थिति होगी क्योंकि वो तीसरी बार चुनाव विधानसभा का हारेंग और तीसरी बार हारने का मतलब यह है कि लंब समय से जब आप सत्ता में नहीं रहते हैं तो बहुत सारे आपके ऐसे लोग जो बहुत मजबूती के साथ आप होते हैं वो धीरे-धीरे आप में विश्वास खोने लगते हैं और आपकी राजनीति में विश्वास खोने लगते हैं और आपसे दूरी बनाने लगते हैं और पार्टी बिखरने लगती है। कांग्रेस के पार्ट बिखरने का यही कारण था और अखिलेश कोई अल्टरनेटिव पेश कर पाते हुए नहीं नजर आ रहे हैं।

गजब का बदला राधव चड्डा को डाला SIR की Shifted list में

राघव चड्ढा जो आम आदमी पार्टी से राज्यसभा गए थे। बाद में उन्होंने अपनी जो विचारधारा कह लीजिए या अपनी राजनीतिक पार्टी बदलते हुए वो भारतीय जनता पार्टी के सांसद हो गए हैं। लेकिन वो पंजाब से सांसद हैं। पंजाब से राज्यसभा गए हुए हैं। लेकिन उनका जो पंजाब में एसआईआर की प्रक्रिया हो रही है। उस प्रक्रिया में उनका नाम जो है वो शिफ्टेड में डाल दिया गया है। जिसको लेकर के वो आम आदमी पर पार्टी पर हमलावर हुए हैं। वह अभी भी राज्यसभा में पंजाब से ही सांसद हैं। तो वो कैसे शिफ्टेड लिस्ट में आ गए ये एक्सप्लेन करना पड़ेगा। और ये है अब ये बात कही जा रही है कि उन्होंने अपना राजनीतिक जो विचारधारा है वो जरूर शिफ्ट की है लेकिन वो वो उनका जो स्टेट का वो है वो अभी भी पंजाब है और वो पंजाब के मोहाली जो है जो ट्विन सिटी है चंडीगढ़ का वहां से वोटर हैं और इस बात को लेकर के उन्होंने आम आदमी पार्टी को आड़े हाथों लेता लेते हुए बोला है कि वह अभी भी पंजाब के वोटर हैं। कैसे उनका शिफ्टेड उसमें डाला जा सकता है। उन्होंने ट्वीट भी किया बोला कि यह जो है आम आदमी पार्टी की बदले की राजनीति है और इस बदले की राजनीति से उनको कुछ हासिल नहीं होने वाला है। उन्होंने बोला कि वह अभी भी वर्तमान में राज्यसभा के सांसद हैं। पंजाब से सांसद हैं। मोहाली में रजिस्टर्ड हैं। शिफ्टेड में उनका नाम डाला गया है। उन्होंने बोला कि ये अभी ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल है। फाइनल लिस्ट नहीं है। नेम नाम में ऑब्जेक्शन वो करेंगे। उसके बाद उसमें बदलाव होगा। लेकिन इस तरह के इस तरह की चीजें जिसको बोलते हैं ना पॉलिटिकल वेंडेटा का है और उन्होंने ये प्रश्न किया कि किसने उनका नाम शिफ्टेड में डाला और वो कौन है पंजाब गवर्नमेंट का अधिकारी जिसने वेरीफाई किया ये क्लासिफिकेशन और पंजाब सरकार के ऑफिसर को और ये इस पर जो है इस पर ना केवल इंक्वायरी होनी चाहिए बल्कि की जो भी यह कर रहा है उस पर कार्यवाही भी होनी चाहिए। इस तरह की बीजेपी की मांग भी निकल कर के आई है। तो कुल मिलाकर के ये जो एसआईआर की प्रक्रिया है इसमें वेंडेटा की बात है और राघव चड्डा ने आरोप लगाया है। अब वह पंजाब में चुनाव प्रचार के लिए भी जाएंगे। इस तरह की चीजें चुनाव प्रचार में भी निकल कर के सामने आएंगी।