Parliamentary Board— में इस नेता की एंट्री योगी से भी बढ़ा हो जाएगा कद
चर्चाओं का बाजार गर्म है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एक इतिहास बनाने जा रहे हैं, जी हां पता चला है कि उन्हें BJP की सबसे Powerful कमिटी यानी Parliamentary Board में शामिल किया जा सकता है और अगर ऐसा होता है तो माना जा रहा है कि देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र के तीसरे ऐसे नेता होंगे जिन्हें PM नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बैठकर बीजेपी के बड़े बड़े फैसले लेने का मौका मिलेगा, आपको बता दें कि Parliamentary Board में कुल 12 लोग शामिल होते हैं , अभी उसके पुनर्गठन की बात चल रही है और महाराष्ट्र से इससे पहले केवल प्रमोद महाजन और बाद में नितिन गडकरी को इस बोर्ड में आने का मौका मिला था और अब यदि फडणवीस इस बोर्ड में शामिल किए जाते हैं तो केंद्र में ना केवल महाराष्ट्र का कद बढ़ेगा बल्कि राष्ट्रीय राजनीती में फडणवीस काफी उंचा पहुच जाएंगे, कहा जाता है कि देवेंद्र फडणवीस बीजेपी के तमाम मुख्यमंत्रियों में सर्वाधिक लोकप्रिय हैं। और वह लोकप्रियता के मामले में सीधे योगी आदित्यनाथ को टक्कर देते हैं।उम्र में भी वो योगी के नजदीक खड़े हैं। वह 54 साल के हैं जबकि योगी आदित्यनाथ 56 साल के है।
अखिलेश या योगी —महिलाओं को सब पता है

जैसे-जैसे उत्तर प्रदेश के चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे योजनाओं की प्रॉमिससेस की झड़ी लग रही है। अब उसी क्रम में अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के मुखिया ने एक प्रॉमिस किया है कि वह अगर सत्ता में आते हैं तो महिलाओं को ₹40.000 देंगे। अब ₹40,000 देंगे उसमें उससे क्या हासिल होगा? और उस ₹400 कब देंगे? क्या होगा? महीने में देंगे या साल में देंगे? 40,000 महीने देना तो असंभव है। यही नहीं कहा जा रहा है कि जिसमें सार्वजनिक परिवहन महिलाओं के लिए सुविधाजनक बनाया जाएगा। उसके अलावा महिला सुरक्षा, महिला आरक्षण, शिक्षा, रोजगार यह सब उनके चुनावी एजेंडे का हिस्सा है। लेकिन ये जो पैसे की बात है, यह पैसा ₹40.000 क्या उत्तर प्रदेश के बजट के हिसाब से संभव हो पाएगा या नहीं हो पाएगा ये एक बड़ी समस्या है और इस समस्या का समाधान क्या है समाधान इसका कोई नहीं है ये सिर्फ पोल प्रॉमिससेस से ज्यादा और कुछ नहीं हो सकता। इसलिए कि फाइनशियली यह संभव नहीं है। फिर भी पॉलिटिकल पार्टीज यह बातें करते हैं। चाहे इसके पहले उत्तर प्रदेश में चाहे उत्तर प्रदेश के अलावा बहुत सारे और प्रदेशों में इस तरह के प्रॉमिससेस किए गए थे। लेकिन अभी ना केवल अखिलेश यादव बल्कि भारतीय जनता पार्टी भी वुमेन सेंट्रिक बहुत सारे ऐसे काम कर रही है। इसके कारण दोनों में कंपटीशन वाली बात है और दोनों ये दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि हम महिलाओं के ज्यादा शुभचिंतक हैं। लेकिन इसमें महत्वपूर्ण बात यह है कि समाजवादी पार्टी का कार्यकाल चाहे मुलायम सिंह यादव का रहा हो, चाहे अखिलेश यादव का रहा हो। महिलाओं के लिए बहुत सुखद नहीं रहा है। अब उस सब दृष्टि से कितनी महिलाएं इस प्रॉमिस को स्वीकार करेंगी या कितनी इस लुभावने में आएंगी ये अलग प्रश्न है और वो 27 के चुनाव के बाद निर्भर होगा। लेकिन प्रॉमिससेस करते समय थोड़ा अगर राजनीतिक दल रियलिस्टिक हो तो ज्यादा बेहतर होगा।
BJP का यह कद्दावर नेता क्यों करता पार्टी को बार बार Embarrass
भारतीय जनता पार्टी के नेता और मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एक बार फिर विवाद खड़ा किया है। वो और उनका बेटा दोनों विवाद खड़े करने के लिए विवादों के लिए जाने जाते हैं। अब ये जो विवाद इन्होंने किया है वो है कि चीनी के दाम जो है वो माइनर्स के लिए और मतलब एडल्ट्स के लिए कुछ और होने चाहिए। अब ये कैसे डिसाइड करेंगे कैलाश विजयवर्गीय साहब कि ये चीनी जो खरीदी गई है ये माइनर कंज्यूम करेगा या मेजर कंज्यूम करेगा। मिठाई जो खरीदी जा रही है वह किसके लिए है? हलवाई या जो है वह मिठाई जो है वह यह देख के बनाएगा या उस पे लिखेगा कि ये माइनर कंजमशन के लिए बनाई माइनर के कंजमशन के लिए बनाई गई है या मेजर के कंजमशन के लिए बनाई गई। यह बड़ा बेतुका सा है और जिस तरह की बात इसके पहले भी उन्होंने की थी वो हमेशा से बीजेपी को मुश्किल में डालती है। लंबे समय से कैलाश विजय सरवर्गीय साहब जो मुख्यमंत्री पद की लालसा पाले हुए थे। लेकिन जब शिवराज सिंह चौहान को केंद्रीय मंत्री परिषद में शामिल किया गया। उसके बाद भी के कैलाश विजयवर्गीय जो हैं वो कुछ कर नहीं पाए। उनको मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया। पश्चिम बंगाल उनको महासचिव के तौर पर भारतीय जनता पार्टी के महासचिव के तौर पर भेजा गया था। लेकिन वहां भी वो कुछ नहीं कर पाए पिछले चुनाव में और जो पार्टी के अंदर के संगठन के लोगों का कहना है कि पिछला वेस्ट बंगाल के चुनाव का जो खराब प्रदर्शन था उसके लिए अगर कोई व्यक्ति एकमात्र जिम्मेदार है तो कैलाश वर्गीय जिम्मेदार है। शायद अगर कैलाश वर्गीय नहीं होते तो पिछला चुनाव ही भारतीय जनता पार्टी जीत गई होती और इसीलिए चुनाव के बाद ही उनको वहां से पूरी तरह से मुक्ति दे दी गई थी पश्चिम बंगाल से और वहां पूरा का पूरा जो प्रबंधन था चुनाव प्रबंधन इस बार अमित शाह ने खुद अपने जिम्मे लिया था। खैर वह एक दूसरा मसला है। लेकिन कैलाश विजयवर्गीय जैसे नेता जो जिनको राजनीतिक समझ तो ऐसा नहीं कह सकते कि अब वो मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे हैं, पार्टी महासचिव तक पहुंचे हैं। तो राजनीतिक समझ के पर तो प्रश्न मैं नहीं कर सकता हूं। लेकिन जो बातें वह करते हैं, वह निश्चित तौर पर भारतीय जनता पार्टी को एंबैरेस करती है और उसने भारतीय जनता पार्टी को कई बार एंबैरेस किया है। पार्टी को इस तरह के लोगों से किस तरह से निपटना चाहिए? यह पार्टी समझे कि क्या वह ए्बरेस होने में उनका कोई पॉलिटिकल नुकसान है। इसलिए कि मध्य प्रदेश में जिस तरह से वहां के मुख्यमंत्री वहां के मंत्री बाकी नेताओं की बयानबाजी सब हो रही है। उसके बाद जिस तरह से वो दमोह वाली जिस तरह से अभी चुनाव हारे हैं और बुरी तरह से हारे हैं। उसको देख के ही लग रहा है कि सब कुछ मध्य प्रदेश में अच्छा नहीं चल रहा है। और कहीं ऐसा ना हो कि शिवराज सिंह चौहान को वहां से हटाने का डिसीजन गलत साबित हो। तो एक बार फिर शिवराज सिंह चौहान को वापस मध्य प्रदेश भेजा जाना चाहिए। अगर मध्य प्रदेश को बचाना है ।
RSS का विरोध USA तक किसने पहुंचाया
न्यूयॉर्क के मेयर ममदानी साहब ने मोहन भागवत के न्यूयॉर्क के कार्यक्रम का विरोध किया है और जो भी बात कहा जा सकता था वो डिविसिव और वननेस के खिलाफ इस तरह की बात जो सेुलर क्रेडेंशियल्स की जो व्यक्ति हमास और मुस्लिम ब्रदरहुड के लोगों को होस्ट करता हो और उस आईडियोलॉजी को सपोर्ट करता हो वो तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में इस तरह की बयान बाजी कर रहा है। तो ये वैसा ही है सूरज को दिया दिखाने जैसा। तो ममदानी लगातार ऐसी कोशिश करते रहे हैं। लेकिन अब ममदानी साहब न्यूयॉर्क के मेयर हैं तो उनको लोग सुनेंगे भी मीडिया में उनका बाइट भी लिया जाएगा। लेकिन इससे महत्वपूर्ण बात है कि क्या ममदानी जैसा व्यक्ति न्यूयॉर्क का मेयर डिसर्व करता है? बनना बिल्कुल नहीं डिसर्व करता है। फिर बना क्यों? बना सिर्फ इस कारण से है कि जैसेसारे बहुत सारे देशों में रिजीम चेंज करने का की मुहिम चलती है वैसे ही लोगों को स्थापित करने की भी मुहिम चलती है। न्यूयॉर्क के मेयर के रूप में ममदानी का बनाया जाना उसी मुहिम का हिस्सा था जिसने एक कैंपेन चलाया और उस कैंपेन में ममदानी को सेुलर प्रोग्रेसिव और इस तरह का एक नेता के रूप में छवि स्थापित करने की कोशिश की और उसके कारण बहुत सारे ऐसे लोग जो प्रोग्रेसिव थॉट वाले हैं जो अमेरिकी सिटीजन हैं उन लोगों ने भी ममदानी के पक्ष में वोट किया और ममदानी को जो व्यक्ति अह इस तरह की बात करता है खुद अपने उसके अपना कम्युनल एप्रोच है। वो इजराइल के बारे में उसका क्या ओपिनियन है?वो किस तरह से इजराइल को समाप्त करने की बात करता है। कौन ऐसा डेमोक्रेटिकली इलेकिटड लीडर होगा जो किसी एक कम्युनिटी को किसी एक रेस को समाप्त करने की बात करता है। कुल मिलाकर के ममदानी साहब का अपना एक कम्युनल एजेंडा है। शुगर कोटेड एजेंडा है जो बहुत तरीके से वो बात करते हैं। और अह उसी एजेंडे के तहत वह अह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संचालक मोहन भागवत जी पर आक्रमक हो रहे थे। लेकिन शायद यह कार्यक्रम रोकना उनके बूते की बात नहीं है। इसीलिए वो कह रहे हैं कि यह प्राइवेट कार्यक्रम है और मेरे जरिसडिक्शन में आता है कि नहीं आता है मुझे देखना पड़ेगा।
