BJP को दिया झटका-जैसी करनी वैसी भरनी का पढ़ाया पाठ
एक समय था जब बांकीपुर चुनाव के समय बीजेपी ने बिहार की नई पार्टी जनसुराज के काफी नेताओं को तोड़ कर अपनी पार्टी की स्थिति और ज्यादा मजबूत कर ली थी, अब उस समय जनसुराज के नेता प्रशांत किशोर ना कुछ बोल पाए ना कुछ कर पाए क्योंकि चुनावों में लगातार मिलती हार के कारण उन्होंने चुप बैठना ही ठीक समझा, लेकिन हाल ही में जिस तरह बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने पांच बार विजेता रही बीजेपी को हराकर यह सीट जीती, प्रशांत किशोर के हौंसले बुलंद हैं और अब लग रहा है वो bjp से अपना हिसाब चुकता करने में जुट गए हैं, जी हां अब प्रशांत किशोर बीजेपी के कद्दावर नेताओं को तोड़ने की मुहिम में लग गए हैं और इसकी शुरूआत हो चुकी है, पता चला है कि वर्ष 2020 के दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में रनर-अप रहे भाजपा नेता डॉ. सुरेंद्र प्रसाद राय को जन सुराज पार्टी में शामिल कर लिया गया है, बिहार राज्य माध्यमिक शिक्षक संघ के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र प्रसाद राय का पार्टी में आना MLC चुनाव के लिहाज से बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।
Bihar क्या चिराग पासवान और जितिन मांझी की लड़ाई ——– लालू – नीतीश जैसी, 33 साल बाद वही मुद्दा
बिहार में आरक्षण के मुद्दे पर आजकल चार नेताओं की चर्चा चल रही है, पहली चर्चा तो जाहिर तौर पर एनडीए में शामिल दो प्रमुख नेता जीतन राम मांझी और चिराग पासवान के बीच चल रही जुबानी जंग की है, पर इसी जंग के बीच लोग 1993 में लालू यादव और नीतीश कुमार के बीच चली जंग का भी नाम ले रहे हैं क्योंकि दोनों नेताओं में भी उस समय आरक्षण पर ही ऐसे तर्क-वितर्क सामने आए थे। जी हां इस समय जीतन राम मांझी और चिराग पासवान के बीच दलित बनाम महादलित की लड़ाई चलनी शुरू हो गई है और इसी मुद्दे पर ही 1993 में नीतीश कुमार और लालू यादव भिड़ गए थे। 33 साल बाद एक सवाल फिर दोहराया जा रहा है कि क्या आरक्षित वर्ग की मजबूत और सफल जातियां, अपने ही वर्ग की कमजोर और वंचित जातियों का हक हड़प लेती है। आपको बताते है कि 1993 में नीतीश कुमार ने लालू यादव पर आरोप लगाया थी कि वे अति पिछड़े वर्ग को मिलने वाले 12 फीसदी आरक्षण को खत्म करना चाहते हैं। इसी बात पर दोनों नेताओं के रास्ते अलग अलग हो गए थे और अब 2026 में बिहार के दो नेताओं और केन्द्रीय मंत्रियों, जीतन राम मांझी और चिराग पासवान के बीच भी इसी मुद्दे को लेकर बहस शुरू हो गई है। मांझी आरोप लगा रहे हैं कि पासवान और रविदास जैसी मजबूत जातियां, अनुसूचित जाति SC आरक्षण का करीब 90 फीसदी लाभ ले रहीं हैं। वे अंति वंचित मुसहर, भुइंया जैसी कमजोर जातियों का हक मार रही हैं। इसी बात के लिए मांझी SC आरक्षण में भी कोटे के अंदर कोटे की बात कर रहे हैं जबकि चिराग पासवान इसके पक्ष में नहीं लग रहे हैं ।
