अब चाय के कप पर राहुल गांधी की झूठ की गूंज—बीजेपी नेताओं का हमला
राहुल गांधी बेतुके बयान बीजेपी नेताओं को उनपर हमला करने का अपने आप मौका दे देते हैं, अब हाल ही में राहुल ने चाय के कप पर ही एक बहुत विचित्र और हास्यपद बयान दे डाला जिसपर बीजेपी नेताओं ने उन्हें आड़े हाथों ले रखा है, जी हां राहुल जी ने चाय के कप में भी टू कप सिस्टम का आरोप लगा दिया , उन्होंने कहा कि चाय के कप में भी जातिगत भेदभाव किया जाता है, राहुल गांधी ने कहा कि देश की कुछ चाय की दुकानों दलितों को डिस्पोजेबल कप में और अन्य लोगों को कांच या सिरेमिक के दोबारा इस्तेमाल होने वाले कप में चाय दी जाती है। बस फिर क्या था बीजेपी के बडबोले नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने तुंरत राहुल पर हमला बोलते हुए उनकी सोशल मीडिया पर दो तस्वीर पोस्ट कर दी जिसमें राहुल गांधी चीनी मिट्टी वाले कप और पेपर वाले कप में भी चाय पीते नजर आ रहे हैं। और लिखा कि देखिए यहां भी मिक्स मैच हो गया। ये ना ब्राह्मण है ना दलित है। ना इसकी जात का पता है ना इसकी बात का। वहीं संबित पात्रा ने इस वीडियों पर राहुल पर वार करते हुए हुए कहा कि राहुल गांधी की ‘झूठ की गूंज’, जनता अब भाषण नहीं, सच देख रही है।
Congress की कोशिश बने ए टीम पर कहीं लेने के देने ना पड़ जाएं
हालांकि झारखंड़ में कांग्रेस ने वहां की क्षेत्रीय पार्टी झारखंड़ मुक्ति मोर्चा को सपोर्ट देकर सरकार बनवाई है, पर कांग्रेस की पैठ यहां इतनी नहीं हैं और वो बी टीम के रूप में ही जानी जाती है पर हाल-फिलहाल में 1 परिसीमन मुद्दे पर जिस तरह से कांग्रेस यहां सक्रिय हो रही है उससे साफ लग रहा है अब कांग्रेस भी यहां अपनी पैठ बढ़ा रही है और बी की बजाय ए टीम बनने की तैयारी में लग गई है और चर्चाओं का बाजार गर्म है कि इस बार यहां ।त्रिकोणीय मुकाबला होने वाला है मतलब झारखंड़ मक्ति मोर्चा और बीजेपी के साथ इस बार कांग्रेस भी पूरी दमखम से मैदान में उतरेगी, इसके लिए कांग्रेस अभी से तैयारी में जुट गई है , हाल ही में रांची के मोरहाबादी मैदान में कांग्रेस के कद्दावर नेता बंधु तिर्की ने एक बड़ी जनसभा का आयोजन किया और यहां की राजनीती में एक नया संदेश सामने आया कि क्या कांग्रेस अब झारखंड में आदिवासी राजनीति के बड़े हिस्से पर अपनी दावेदारी मजबूत करने की तैयारी कर रही है ,जिसके बलबूते पर झारखंड मुक्ति मोर्चा लंबे समय से अपनी राजनीतिक चमका रहा है। आपको बता दें कि झारखंड में सत्ता पाने की सीधा रास्ता आदिवासी मतदाता हैं।राज्य की 81 सदस्यीय विधानसभा में 28 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए सुरक्षित हैं। माना जा रहा है कांग्रेस आदिवासी समुदाय को लगातार अपनी तरफ लुभाने की कोशिश कर रही है क्योंकि कांग्रेस को लगता है कि जनसंख्या के बदलते स्वरूप और डेमोग्राफिक बदलावों का सीधा असर इसकी राजनीती पर पड़ सकता है। कांग्रेस लंबे समय से राज्य में झामुमो की सहयोगी रही है, पर अब अपनी जमीन बनाने में जुट गई है. , दूसरी तरफ कांग्रेस नेता का यब बड़ा शक्तिप्रदर्शन बीजेपी के लिए भी खतरे की घंटी है, पर माना जा रहा है कि फिलहाल भाजपा के पास इस क्षेत्र में खोने के लिए कम और पाने के लिए काफी कुछ है, क्योंकि 28 सुरक्षित एसटी सीटों में से उसके पास बहुत कम प्रतिनिधित्व है ,और वो लगातार यहां डेमोग्राफिक बदलाव, घर्म मतांतरण, बांग्लादेशी घुसपैठ और कथित लव-लैंड जिहाद जैसे संवेदनशील मुद्दों के जरिए आदिवासी समाज में अपनी पैठ बनाने की कोशिश में जुटी है।
