Dr Jitendra Nagpal

बच्चे से संवाद- उसके दिल की बात जानने के लिए समय देना बहुत जरूरी
जब बहुत ही बेहतरीन इंस्टिट्यूट्स में, मेंटल हेल्थ की Problems बढ़ती हैं या स्यूसाइज के आंकडे बढ़ते हैं तो पैरेंट्स को सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। फैमिली की तरफ से या पेरेंट्स की तरफ से बच्चों से लगातार संवाद कीजिए क्योंकि आजकल जो माहौल है उसे बच्चा बहुत ज्यादा घबराया, परेशान और अकेला महसूस कर रहा है, हर तरफ कौंपिटिशन है, जॉब्स का है, प्लेस्मेंट का है और कहीं अच्छा Package मिलने का है, और ये सब बहुत बार बच्चे को अकेला कर देती है। isolated कर देते हैं, lonely कर देती, ऐसे में पैरेंट्स के साथ भाई-बहनों का भी फर्ज है, समय पर अपने हाथ उसकी तरफ बढ़ाए, पहुंचिये उनके मन में, पहुंचिये उनके दिल में और खुलकर बात करने की कोशिश करें। बच्चे के मन के गुबार को, Frustration को, जो कुंठा होती है, उसको बोलने का मौका देकर दूर किया जा सकता है, बात सिर्फ यही ना हो कि क्या बनोगे, क्या करोगे, क्या Salary मिलेगी, क्या Job मिलेगा, किस Best Institute में पढ़ना है , इसके अलावा और बातें कीजिए क्या गेम्स खेलते हैं, क्या दोस्त हैं उनके, क्या करते हैं, क्या घुमने गए, कहीं Adventure के लिए गए बाहर, । ये देखा गया है कि रोज की जिन्दगी के जो हमारे पहलू होते हैं, एक उठना-बैठना, खाना-पीना, खेलना-कुदना, इसके बारे में चर्चा नहीं होती है, जरूरी है इस पर चर्चा करें और ऐसा करते करते बच्चा आपसे खुलता है और अपनी समस्या, परेशानी जो मन में छुपा कर बैठा है जो उसे परेशान कर रही है वो आपसे भी शेयर करना शुरू कर देता है। बच्चे के समीप जाने, उसके दिल में जाने की आज बहुत जरूरत है।
Dr Mahipal Sachdeva

रंगों के चुनाव में हो रही परेशानी-नहीं भर पा रहे चित्रों में ठीक से रंग तो —सावधान
कईं बार आपको लगना शुरू हो जाता है कि आप रंगो का चुनाव करते समय बहुत ज्यादा कन्फयूज हो जाते हैं , जैसे की एक चित्रकार यदि पेंटिंग्स बना रहा हैं, और उसमें वो ठीक से रंग नहीं भर पा रहा, वो रंग खो रही है। और आपको जो कि पहले आप एक ब्रश से या दो ब्रश से आप एक कलर डाल सकते थे। वो बार-बार आप उसमें कलर भरने की कोशिश कर रहे हैं। तो क्या यह आप समझ सकते हैं कि किस चीज के सिम्टम है? यह कैटक्ट के सिम्टम हो सकते हैं। यानी कि सफेद मोतिए में। सफेद मोतिए के अंदर कंट्रास्ट आपका सबसे पहले इफेक्ट होता है और कलर परसेप्शन जो है वह धुंधली पड़ जाती है और आप कलर्स को एप्रिशिएट नहीं कर सकते। मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने के बाद आपको फिर दुनिया में रंग बिखर के आएंगे और कैटक के साथ जीने का कोई फायदा नहीं है। अगर आपकी कलर परसेप्शन इफेक्ट हो रही है। आपकी पेंटिंग खराब हो रही है तो आप जरूर चेक कराइए और अगर आपको सफेद मोतिया है तो उसकी शीघ्र से शीघ्र सर्जरी कराइए।
Dr M Wali

महिला-पुरूषों की fertility कम कर रहा है कपड़ों में मौजूद ये जहर
सिंथेटिक फाइबर जो है ना यह बदन के लिए जहर है। पहले एक फैब्रिक आती थी टेरेलीन, रिक्शा वालों से लेकर अमीर आदमी तक सब पहनते थे और धो के फैला दी। कोई काम ही नहीं और प्रेस भी नहीं करना पर टेरेलीन बंद हो गई। पसंद नहीं की गई। सस्ती चीज मानी गई और उसके नुकसान थे लोगों को पता थे। समझदार थे बंद कर दी पर अब हर चीज में जो हमारा अंडरवियर है, पेंटी है, ब्रा है, स्पोर्ट्स ब्रा है, लेगिंग्स है, ट्राउज़र्स है, शर्ट्स हैं, इवन बनियान सिंथेटिक फाइबर मौजूद है। और वो माइक्रोप्लास्टिक हमको मुफ्त में दे रहा है। स्किन से कांटेक्ट है। माइक्रोप्लास्टिक रिलीज होती है। माइक्रोप्लास्टिक की कितनी भी क्वांटिटी हो कम से कम वो भी बदन के लिए हानिकारक है। माइक्रोप्लास्टिक उतना ही हानिकारक है जितना टेफॉन हानिकारक है। माइक्रोप्लास्टिक उतना ही हानिकारक है जितने पेट्रोलियम प्रोडक्ट हानिकारक है। माइक्रोप्लास्टिक एक ऐसा पोइजन है जिसकी हाफ लाइफ नहीं होती। फॉर एवर पोइजन है। सिंथेटिक कपड़ों को खत्म कर दीजिए। पहनने है तो ऊपर से पहन लीजिए। अंडर कॉटन पहनिए। सब चीज कॉटन की पहनिए। शौक के लिए कुछ पहनना है दिखावे के लिए तो ऊपर पहन लीजिए। क्योंकि इससे बहुत नुकसान हो रहा है, लड़कियों में प्री प्रोबर्टी हो रही है। ब्रेस्ट बड़े हो रहे हैं। 11- 12 साल की लड़कियों के पीरियड्स आ रहे हैं। पीसीओडी हो रहा है। बाल निकल रहे हैं। और यह फर्टिलिटी कम कर रहा है मेल्स की भी, फीमेल्स की भी। यह फर्टिलिटी डिजास्टर है। ओवरी में पाया जा रहा है माइक्रोप्लास्टिक।
