एक और मंत्री का त्यागपत्र —मोदी सरकार में फेरबदल की चर्चाएं एक बार फिर गर्म
केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री ने एल मुर्गन ने त्यागपत्र दे दिया है और उन्होंने राज्यसभा से भी त्यागपत्र देने की बात कही है। अब एल मुर्गन जो हैं वह तमिलनाडु से आते हैंऔर तमिलनाडु में जिस तरह से अन्नामलाई के छोड़ने के बाद से पार्टी लगभग ऑब्लिवियन में चली गई है तो उस दृष्टि से एल मुरगन का त्यागपत्र महत्वपूर्ण है। लेकिन एक और महत्वपूर्ण बात है जो नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वो ये लगातार बहुत सारे केंद्रीय मंत्री जो हैं वो उनको डबल जिम्मेदारी दी गई है या वो त्यागपत्र दिए हैं। जैसे अब मुरगन साहब हो गए। पंजाब के बिटू हो गए। केरल के एक मंत्री उनका राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो गया। बिट्टू का भी वैसे कार्यकाल खत्म हो गया। पंकज चौधरी के पास डबल जिम्मेदारी है। हर्ष महोत्रा के पास डबल जिम्मेदारी है और पीयूष गोयल के पास डबल जिम्मेदारी है। तो ये एक स्थिति है जहां पर अब यह भी बात होने लगी है कि धीरे-धीरे जो है वो केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार का मामला आगे बढ़ता जा रहा है और ऐसी स्थिति में पहुंच गया है जहां पर इसको ज्यादा दिनों तक टाला नहीं जा सकता है। तो क्या दीपावली से पहले या विंटर सेशन से पहले यह होने की संभावना है? बहुत सारे पद खाली हैं। बहुत सारे नए पदों को भरने की जरूरत है। जिनके पास दो-दो तीन-तीन जिम्मेदारी हैं। जैसे सूचना प्रसारण मंत्री जो हैं वो वैष्णव साहब के पास तीन मंत्रालय हैं तो उनका बोझ कम करने की जरूरत है। फिर साथ में क्या तमिलनाडु में मुरगन साहब को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है या इस तरह के लिए उनको भेजा गया है जो वहां पार्टी को संगठित करें और पार्टी को अगले चुनाव के लिए तैयार करें पहले 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए उसके बाद अगले विधानसभा के चुनाव के लिए क्या यह सारी चीजें उसमें निश्चित तौर पर कोई ना कोई स्ट्रेटजी होगी
Congress को महंगा पड़ सकता है अजीत डोभाल पर लगातार आक्रमण करना
कांग्रेस का पूरा नेतृत्व सुरक्षा सलाहकार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभल पर आक्रमण करता रहता है। उनके उनके कार्य को लेकर के या उनके पॉलिटिकल इंटरफेरेंस या पॉलिटिकल मैन्योवरिंग को लेकर के उनकी भूमिका को लेकर के हस्तक्षेप करता रहता है। हालांकि सुरक्षा से जुड़े मसलों पर और विशेष रूप से जो पड़ोस का मामला है पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश का मामला है। हालांकि आतंकवाद मामले में भी उनकी सक्रियता बहुत रहती है और वह उस पर लगातार काम करते रहते हैं जो गप करने वाले या जो जिसको बोलते हैं कि मतलब बहुत सारी इस तरह की चर्चा भी होती है कि जो पाकिस्तान में आतंकवादी आतंकवादियों की जो अन मतलब अननोन गन मैन वाली कहानी है उसके स्क्रिप्ट राइट राइटर अजीत डोभाल है। लेकिन अब यह तो क्या है इंटेलिजेंस में और टेररिज्म में स्टेट क्राफ्ट में बहुत सारी चीजें ऐसी होती हैं जिसका शेड जो होता है वो ब्लैक होता है। उस पर नहीं जाते हैं और जब आप आतंकवादी आतंकवादियों से जिनका कोई मोरल जो रूल ऑफ लॉ नहीं है ब्लड शेड है तो आपको इस तरह की चीजें करनी पड़ती है। लेकिन भारतीय राजनीति में अजीत डोभाल को घसीटना कम से कम डोमेस्टिक पॉलिटिक्स में तो वो एक थोड़ा सा तकलीफ लोगों को देता है। लेकिन अब बीजेपी के जो मुख्यमंत्री हैं उत्तराखंड के क्योंकि अजीत डोभाल उत्तराखंड से आते हैं तो उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि कांग्रेस को इस मामले में जवाब देना चाहिए कि क्या जो बातें उनके उनका केंद्रीय नेतृत्व कहता है उस बात से उनकी सहमति है और ध्यान रखिए 2027 में उत्तराखंड में भी चुनाव होने हैं और तीसरी बार बीजेपी मैंडेट खोज रही होगी लगातार सरकार बनाने के लिए और जो अभी की स्थिति है। उस स्थिति में कांग्रेस कहीं पर भी उत्तराखंड में नजर नहीं आ रही और उसके बाद इस तरह के भावनात्मक मसले अगर उठाए जाएंगे तो और सभी राजनीतिक दल के पास ये पूरा अधिकार है कि वो भावनात्मक अगर एसआईआर पर कांग्रेस इस तरह की बयानबाजी कर सकती है और उसमें अजीत डोबाल का नाम घसीट सकती है तो क्या बीजेपी को ऐसा नहीं करेगी? बिल्कुल करेगी और यह सेंटीमेंटल मामला है। उसको उठाएगी और वही काम पुष्कर सिंह धामी ने करना शुरू कर दिया है कि क्या वो जो सेना में या भारत देश की सुरक्षा में उत्तराखंड के लोगों का की जो भूमिका है उत्तराखंड लोगों का जो सहयोग है उसको कांग्रेस जो है ना केवल नजरअंदाज करती है बल्कि उसको नीचा दिखाने की कोशिश करती है।
Congress 99 सांसद चले सरकार बनाने——अभी भी संभल जाना चाहिए
एक तरफ जहां एसआईआर को लेकर के कांग्रेस प्रदर्शन कर रही है। हालांकि दावा तो यह है कि पूरे देश में प्रदर्शन करेगी और ये एक ऐसी मुहिम है जो रुकने वाली नहीं है जब तक कल का जो राहुल गांधी का बयान है जब तक वो जो चाहते हैं उसको अचीव नहीं कर लेते हैं। हालांकि उसमें चाहने में बहुत सारी चीजें हैं। जैसे शुरू में वो चाहते थे कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा हो। उसके बाद फिर वो मामला और आगे बढ़ गया अमित शाह के इस्तीफे का और फिर मुख्य न्यायाधीश के इस्तीफे का और अल्टीमेटली जो गोल है जो बातें निकल कर के आती है वो ये है कि इस सरकार को हटाना है। अब इस सरकार को मान लीजिए कि इतना कॉस या इतना ऐसी स्थिति कांग्रेस पैदा करने में कामयाब हो जाती है। संभावना जिसकी लगभग जीरो है। लेकिन आप कुछ कह नहीं सकते हैं। जिस तरह से इंडोनेशिया समेत बाकी बांग्लादेश और नेपाल में जो घटनाएं घटित हुई उसके बाद कुछ कहा नहीं जा सकता। इसलिए कि जो सामने से जॉर्ज सोरोस जैसे लोग या और चाइना जो भारत को डिस्टेबलाइज करना चाहता है भारत की बढ़ती इकॉनमी को देख के वो कुछ भी करने के लिए तैयार है और कुछ कितना भी फंड पंप इन करने के लिए तैयार है भारत को डीस्टेबलाइज करने के लिए तो मान लीजिए वैसी स्थिति हो गई तो क्या राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बना दिया जाएगा अगर प्रधानमंत्री या सरकार ये गिर जाती है कुछ होता तो सीधे राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बना दिया जाएगा और राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बना दिया जाएगा तो जो वह 99 एमपी के साथ इस तरह के चैलेंजेस वो कर रहे हैं तो क्या उनके खिलाफ चैलेंजेस नहीं होंगे? क्या तब इन्हीं डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूशंस को राहुल गांधी को सरकार के तौर पर डिफेंड नहीं करना पड़ेगा? तो यह कुछ बड़े प्रश्न हैं। लेकिन इस बीच हो क्या रहा है? हो ये रहा है कि भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल में चुनाव जीतती है। भारतीय जनता पार्टी आसाम में चुनाव जीतती है। लोकसभा और विधानसभा के बाय इलेक्शंस। भारतीय जनता पार्टी राजस्थान में काउंसिलर्स जो लोकल बॉडी इलेक्शंस होते हैं वह जीतती है। भारतीय जनता पार्टी गुजरात में लोकल बॉडी इलेक्शंस जीतती है और टीवी जीतती है तमिलनाडु में। इन सब में कांग्रेस कहीं नहीं है। तो कांग्रेस को क्या इससे चुनावी फायदा हो रहा है? बिल्कुल नहीं हो रहा है। तो कांग्रेस को अपनी स्ट्रेटजी रिवजिट करनी चाहिए। जब उनके आसपास लोग हैं वह उनकी सलाह मानने के लिए नहीं तैयार है तो मेरी सलाह तो बेमाने रखती है। लेकिन कुल मिलाकर के ये जो विरोध प्रदर्शन है इससे कांग्रेस को कोई फायदा हुआ होता हुआ नहीं दिख रहा है।
