क्या विदेशी ताकतें Modi Govt को दे रही परेशानियां
भारत में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं एसआईआर को लेकर के और प्रदर्शन के लिए अब जो आयातित या विदेश से बुलाए आए लोग जो हैं वो ज्यादा बढ़-चढ़कर के हिस्सा ले रहे हैं। नीट के प्रदर्शन के समय अभिजीत दीपके जो सीधे अमेरिका से पहुंचे थे और उन्होंने प्रदर्शन चालू किया था। अब कोई व्यक्ति जो अपना अपनी पढ़ाई कर रहा हो अमेरिका में वो नीट का विरोध में प्रदर्शन क्यों कर रहा है? इसको लेकर के बहुत चर्चा हो गई है। लेकिन ध्रुव राठी जो जिसको भारतीय राजनीति से कितना लेना देना है, क्या लेना देना है या कुछ लेना देना नहीं है। जो यूरोप में अह सेटल हो चुका है, वह भारत पहुंच गया है। और बेंगलुरु में प्रोटेस्ट में भाग ले रहा। होने वाला है, वो अपील भी कर रहे है कि 10 तारीख को जो दिल्ली में प्रोटेस्ट होने वाला है अभिजीत दीप के जिसको लीड करेंगे उसमें लोगों को ट्रेन, बस जिनसे भी साधनों रिजर्वेशन करा के फ्लाइट करा के वो पहुंचे। जी और ध्रुव राठी ने ट्वीट भी किया है। इट्स डन ब्रो। अब यह एक अलग तरह की भाषा चल रही है। अभिजीत दीपके ने सरप्राइज गिफ्ट बताया। लेकिन उससे महत्वपूर्ण बात यह है कि क्यों किसी ऐसे व्यक्ति को जो फ्रांस में सेटल हो चुका है जिसका कोई लेना देना नहीं है भारतीय राजनीति से। वो शिरकत करें। अब इसमें प्रकाश राज जो हमेशा से एंटी बीजेपी जिनका जिनका एजेंडा है वो भी इस बैठक में थे। जो सबसे ज्यादा इंट्रिगिंग या जो सबसे ज्यादा चिंता या जो सबसे ज्यादा चर्चा का विषय है कि कोई अभिजीत दीपके क्यों अमेरिका से आता है भारत में एनर्की फैलाने। कोई ध्रुव राठी क्यों यूरोप से आता है भारत में एनआरकी फैलाने या सरकार बदलने की मुहिम में ये बड़ा प्रश्न है।
West Bengal – तसलीमा नसरीन को भी मिली बोलने की आजादी
बंगाली लेखिका और एक्टिविस्ट तसलीमा नसरीन कोलकाता में हैं। क्योंकि अब दुर्गा पूजा का समय आ रहा है। और दुर्गा पूजा के हालांकि यह उनकी दूसरी कोलकाता की यात्रा है लेकिन वो कोलकाता पहुंच रही हैं। कोलकाता पहुंच जाने से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि वो वहां पर लोगों से कम्युनिकेट कर रही हैं। लोगों से बातचीत कर रही हैं। तो यह एक महत्वपूर्ण बात है जो हो रहा है। यह हुआ क्यों? यह हुआ इसलिए कि बदलाव वहां पर आ गया है। बदलाव की जो है वो संभावना वहां पर नजर आने लगी है। बल्कि बदलाव होता हुआ दिख रहा है। तो इसलिए वहां पर ममता बनर्जी के सरकार में जो नहीं पहुंच पाई थी। यहां तक कि हैदराबाद में भी उनको नहीं जाने दिया गया था। अब वह कम से कम इन सब जगहों पर पहुंच पा रही हैं। तो एक तो यह बात हो गई। दूसरी बात यह और वो उन्होंने बोला है कि वो अगले महालय मतलब अगले दुर्गा पूजा में वो होंगी कहां पर? पश्चिम बंगाल में कोलकाता में सेलिब्रेट करने के लिए। अब दूसरा जो डेवलपमेंट हुआ है वह यह कि मिथुन चक्रवर्ती जिन्होंने जिनको राज्यसभा भेजा गया था कभी तो उन्होंने राज्यसभा से राज्यसभा की सदस्यता छोड़ दी थी। अब उनको पश्चिम बंगाल सरकार में कल्चरल एंबेसडर बनाया गया है जो कैबिनेट मिनिस्टर के रैंक का है। ये अपॉइंटमेंट जो है इंफॉर्मेशन एंड कल्चर अफेयर डिपार्टमेंट ने किया है और इसको तुरंत ही लागू कर दिया गया है। अब ये कल्चरल एडवाइजर की जो भूमिका है मिथुन चक्रवर्ती की इस भूमिका में उनको कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलेगा और ये ये हालांकि ये घोषणा पहले ही शुभेंदु अधिकारी ने कर दी थी कि मिथुन चक्रवर्ती को वो किया जाएगा। अब मिथुन चक्रवर्ती को यह जिम्मेदारी दी गई है। महत्वपूर्ण इसलिए है कि पूरे चुनाव के दौरान बिना डरे मिथुन चक्रवर्ती ने भारतीय जनता पार्टी के साथ खड़े होकर के वोट किया था। किसी जमाने में ऐसा कहा जाता था कि मिथुन चक्रवर्ती जो है वह नक्सल सिंपथाइजर हैं। मतलब यह इस तरह के हियरसेस होते रहे हैं। लेकिन अब जिस तरह से वो भारतीय जनता पार्टी और सैफरन पार्टी के लिए और बहुत खुल के चैलेंज के साथ वो अपनी बात कहते हैं, रखते हैं और कल्चरल कैपिटल पश्चिम बंगाल के बारे में बोला जाता है कि वो भारत का कल्चरल कैपिटल है। वहां पर अगर मिथुन चक्रवर्ती इस तरह की भूमिका में नजर आते हैं तो निश्चित तौर पर कुछ अच्छा होने की उम्मीद रख सकते हैं। दो बार के राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता हैं। मृगया के लिए उनको पहली बार राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। इसके अलावा भी उनको राष्ट्रीय पुरस्कार मिल मिल चुका है। अच्छे एक्टर हैं। तो ये एक बड़ा डेवलपमेंट होता हुआ दिख रहा है।
Jammu -kashmir क्या चाहे Congress
कांग्रेस के लिए मुश्किलों का सबब है वो यह है कि उनको कोई प्रतिनिधित्व मिलता हुआ दिख नहीं रहा है जम्मू और कश्मीर में बावजूद इसके कि वहां जम्मू कश्मीर में वो उमर अब्दुल्ला सरकार को समर्थन कर रही है। लेकिन इस बात को अ उमर अब्दुल्लाह या उनकी जो राजनीतिक दल है नेशनल कांफ्रेंस जो है वो लगातार नकारती रही है कि ना तो उनकी कोई भूमिका अ जीत में रही है ना बाद में कोई उनकी भूमिका बनती है। लेकिन जो कांग्रेस है वह दबाव बना रही है उमर अब्दुल्ला पर कि उनको भी मंत्रालय में शामिल किया जाएगा जाना चाहिए और लगभग तीन वैकेंसीज हैं मंत्रालय जिनको शामिल किया जा सकता है जितने मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है और अगर उस दृष्टि से देखें तो कांग्रेस को अगर एक दो मंत्र मंत्रालय मिल जाए तो शायद वह जो जिस चीज़ के लिए दबाव बना रहे हैं वह हो जाए। कांग्रेस दो के लिए लगातार दबाव बना रही है और ये ये बात उमर अब्दुल्ला ने स्वीकार भी की है कि कुछ मंत्रिमंडल में फेरबदल किए जाने चाहिए और और ये तभी होगा जब वो दिल्ली आएंगे दिल्ली में उनकी लोकसभा कांग्रेस कांग्रेस के नेताओं से मुलाकात होगी और अभी जो है छह मंत्रालय के साथ जो है वो सरकार काम कर रही है क्योंकि इस जो नया जम्मू एंड कश्मीर रिऑर्गेनाइजेशन एक्ट 1900 2019 का है उसके हिसाब से केवल नौ मंत्री हो सकते हैं। तो अभी छह हैं। तीन की गुंजाइश है। तो तीन में दो की मांग कांग्रेस कर रही है और अगर ऐसा हो पाता है, ऐसा होता है तो कांग्रेस की भागीदारी बढ़ेगी और पावर में नजर आएंगे। उनके लोग भी पावर में नजर आएंगे। लेकिन क्या अब्दुल्ला साहब उनको ऑब्लाइज करेंगे या नहीं करेंगे? और किस बात पर सहमति बनती है? कौन विभाग पर सहमति बनती है। हालांकि यूनियन टेरिटरी के पास इतनी पावर नहीं है कि वह कुछ बहुत ज्यादा कर पाने की स्थिति में हो। लेकिन मंत्री का रुतबा तो मंत्री का रुतबा ही होता है।
