पिछली बार की गलती इस बार नहीं दोहराएंगे अखिलेश यादव
समाजवादी समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव लंबे समय से राज्यसभा चुनाव को लेकर बयानबाजी कर रहे थे कि वह तीसरा कैंडिडेट उतार सकते हैं। तीसरा कैंडिडेट उतारने का मतलब यह था कि क्रॉस वोटिंग होती। अब क्रॉस वोटिंग अगर होती तो वो मुश्किल या तो भाजपा के लिए होती या अखिलेश यादव के लिए होती। अगर क्रॉस वोटिंग नहीं करा पाते तो मुश्किल होता। कि दूसरी महत्वपूर्ण बात ये थी कि अगर अखिलेश यादव तीसरा कैंडिडेट खड़ा करते और जीता नहीं पाते और भारतीय जनता पार्टी अपने कैंडिडेट को जिता ले जाती और वो निश्चित तौर पर क्रॉस वोटिंग के थ्रू ही होता है। इसलिए कि कुछ दूसरे मत दूसरे पार्टी के कैंडि वोटर्स की जरूरत थी। बीजेपी भी आठवें कैंडिडेट के लिए उनके पास पूरा नंबर नहीं था। तो दोनों स्थिति में अगर अखिलेश यादव अपना कैंडिडेट नहीं जीता पाते और भारतीय जनता पार्टी उनके कुछ लोगों से क्रॉस वोटिंग करा पाती तो उससे अखिलेश यादव की बड़ी किरकिरी होती और यह किरकिरी अगर उनकी 2027 के चुनाव से पहले होती इसलिए कि इसके पहले भी राज्यसभा का जो जो चुनाव हुआ था उसमें अखिलेश यादव की किरकिरी हुई थी। तो अगर उसमें भी इस चुनाव में भी उसमें भी और इस चुनाव में भी दोनों में अखिलेश यादव की किरकिरी होती तो 2027 के चुनाव में उसका परिणाम स्पष्ट तौर पर नजर आता। एक बड़ा सेक्शन अखिलेश यादव से नाराज है। उसमें ओबीसी है जो पीडीए की बात लगातार कर रहे हैं। बड़ा कंफ्यूजन है। पीडीओ को कभी पंडित और दलित और अल्पसंख्यक बता देते हैं। कभी पिछड़ा बता देते हैं। अगर पी को आप पंडित बताइएगा तो पिछड़ा पूरी तरह से छूट जाएगा। अगर पिछड़ा बताते हैं तो आप का अपर कास्ट छूट जाएगा। तो ये सारी इस सारे कंफ्यूजन के बीच अगर अखिलेश यादव राज्यसभा के चुनाव में उनका कैंडिडेट हार जाता तो मुश्किल होती। अब एक और महत्वपूर्ण बात है। उन्होंने ऐसा नहीं कि कोशिश नहीं की। उन्होंने कोशिश की। उन्होंने शेरवानी साहब जो इंडस्ट्रलिस्ट हैं सलीम शेरवानी साहब उनसे बात की कि वो कैंडिडेट वो दावेदारी अपनी करें। वो ये भी चाह रहे थे कि सलीम शेरवानी साहब जो धन बल का अपने उपयोग करके अपना अपना कैंडिडेटर मजबूत बनाए और जीत लें। लेकिन सलीम शेरवानी साहब ने बोला कि वो जब तक उनकी जीत निश्चित नहीं होगी तब तक वो नहीं जाएंगे और जो अखिलेश यादव की पूरी योजना थी वो धरी की धरी रह गई।
औवेसी को पता है इन इलाकों में वोट मिलेंगे ही मिलेंगे
असदुद्दीन ओवैसी जो हैं वो अभी जो राहुल गांधी या कांग्रेस याआईएडीआई अलायंस का चुनाव आयोग या मुख्य चुनाव आयुक्त के त्यागपत्र को लेकर के घेरने को लेकर के प्रदर्शन चला। उसमें उन्होंने दूरी बनाई वो एक बात है। लेकिन दूरी बनाने के बाद जो उन्होंने स्टेटमेंट दिया कि बेगानी की शादी में मेरा क्या काम? ये एक महत्वपूर्ण बात है। मतलब ये वो स्पष्ट तौर पर ये कह रहे हैं कि ये जो मुहिम है ये जो लड़ाई है ये मेरी नहीं है। ये कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की और विशेष रूप से वो समाजवादी पार्टी के साथ या कांग्रेस के साथ उसी शर्त पर आने के लिए तैयार हैं जहां पर उनको अलायंस में जगह दी जाए और अलायंस में उत्तर प्रदेश में जगह देने के लिए समाजवादी किसी भी तरह से तैयार नहीं है। समाजवादी पार्टी तो उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को अकोमोडेट करने के लिए मुश्किल तैयार हो रही है और उनकी 200 150 सीटों पर वो 50 से आगे बढ़ने के लिए नहीं तैयार हैं। उन परिस्थिति में असदुद्दीन ओवैसी को कितनी जगह मिलेगी? तो ये यही कारण है कि असदुद्दीन ओवैसी जो विरोध प्रदर्शन है उस विरोध प्रदर्शन में साथ जाने के लिए नहीं तैयार हैं और वह नहीं गए और उन्होंने इस तरह की बयानबाजी की। अब सबको मालूम है कि उत्तर प्रदेश में लगभग 60 सीटें ऐसे हैं जहां पर मुसलमान मतदाता जो हैं दो 403 में
60 ऐसी सीटें हैं जहां पर मुसलमान मतदाता निर्णायक होता है और वो चुनाव के फैसले करता है और इसी कॉन्फिडेंस के साथ अखिलेश यादव को लगातार ओवैसी चैलेंज कर रहे हैं। अपने मतलब उनके जो मुस्लिम मतदाता हैं उनसे कह रहे हैं कि अह आप 19% 20% उत्तर प्रदेश में हो। आप 9% वाले को क्यों मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाते हो? तो ये एक बयानबाजी उत्तर प्रदेश में चल रही है और ये इस बार इसका प्रभाव होने वाला है। इसलिए कि केवल असदुद्दीन ओवैसी नहीं और बहुत सारे नेता मुस्लिम नेता जो मुस्लिम स्कॉलर्स के तौर पर उत्तर प्रदेश में जाने जाते हैं। उनका यह कहना है कि मुख्यमंत्री मुसलमान उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं हो सकता है? अगर 20% उनकी जनसंख्या है और अगर उत्तर प्रदेश में मुसलमान मुख्यमंत्री नहीं तो अखिलेश यादव भी मुख्यमंत्री नहीं और इस तरह के के नारेबाजी लगातार चल रही है। जगह-जगह चल रही है। पूरे प्रदेश में चल रही है। तो यह एक बड़ी समस्या चैलेंज समाजवादी पार्टी के लिए होने वाला है और उसका मैसेज लगातार दे रहे हैं असदुद्दीन ओवैसी और इस जो विरोध प्रदर्शन में भागीदारी ना करना भी उसी का एक हिस्सा है।
