Modi सरकार इस front पर क्यों फेल होती दिख रही मोदी मंत्रीमंडल का विस्तार-बदलाव एक बार फिर जबरदस्त चर्चा में हैं, इसके पीछे दो तीन बड़े कारण माने जा रहे हैं, पहला पंजाब और यूपी चुनाव से पहले वहां के कद्दावर नेताओं को मोदी अपनी सरकार में लाना चाहते हैं जिससे वहां कार्यकर्ताओं में जोश आए और प्रचार-प्रसार के दौरान पलड़ा भारी रहे, दूसरा इस समय इस समय मोदी कैबिनेट में 12 ऐसे मंत्री हैं, जिन के पास एक नहीं कई और मंत्रालय का बार है, आंकड़ों के हिसाब से देखें तो यह संख्या करीब 40 फीसदी बैठती है जो अपने आप में एक बहुत बड़ी संख्या है, दो कैबिनेट मंत्रि तो ऐसे हैं जिनके पास तीन-तीन बड़े मंत्रालयों का जिम्मा है।हाल ही में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा जैसे बड़े और महत्वपूर्ण मंत्रालय को भी संभालना पड़ रहा है। तीसरा मोदी सरकार अपना विस्तार इसलिए भी जल्दी से जल्दी करना चाहती है क्योंकि यूपी और पंजाब जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में चुनाव हैं और मोदी सरकार में अभी एक भी मुस्लिम और क्रिश्चियन चेहरा नहीं है। विपक्ष इस बात को चुनाव में भुनाने की पूरी कोशिश करेगा और ये बात बीजेपी आलाकमान हरगिज नहीं चाहेंगे। यही नहीं इस बार राज्य सभा के लिए पैट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी को भी टिकट नहीं मिला जिससे उनको भी सरकार से बाहर जाना पड़ेगा और उसके बाद मोदी सरकार में सिख प्रतिनिधित्व भी जीरो हो सकता है।वैसे अल्पसंख्यक चेहरों में मोदी सरकार में किरण रिजूज जो बौद्ध हैं। इसलिए माना जा रहा है कि मोदी मंत्रीमंडल का विस्तार करते समय इन सब बातों पर पूरा ध्यान दिया जाएगा जो आने वाले विधानसभा चुनावों में विपक्ष को बीजेपी को टारगेट करने का कोई मौका ना मिले। यूपी के कुछ बड़े चेहरों को मोदी सरकार में जगह मिल सकती है और पंजाब चुनाव को देखते हुए किसी सिख नेता को भी मंत्री बनाए जाने की पूरी संभावना है। इसी तरह से मोदी सरकार किसी क्रिश्चियन नेता को भी जगह दे सकती है। आपको बता दें कि केंद्रीय मंत्रिपरिषद में इस समय मात्र 68 मंत्री रह गए हैं जबकि इसमें ज्यादा से ज्यादा 81 मंत्री हो सकते हैं। इस समय मोदी सरकार में 29 कैबिनेट मंत्री, 5 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और 34 राज्यमंत्री हैं।आमतौर पर केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 75 मंत्री होते हैं, वैसे मोदी जी का तीसरा कार्यकाल जून, 2024 में हुआ, जिसमें दूसरे कार्यकाल के ज्यादातर मंत्रियों को उन्होंने अपनी सरकार में जगह दे दी थी। अब चर्चाएं हैं कि शीतकालीन सत्र से पहले मोदी सरकार में बड़ा बदलाव दिख सकता है। कुछ मंत्रियों के मंत्रालय बदलने की संभावना है और कईं नए चेहरों को भी जगह मिल सकती है Bihar ——इस चुनाव ने खोली पोल दोस्त भी दुश्मन बनकर लडेंगे बिहार में विधान परि‍षद की आठ सीटों के चुनाव के दौरान ये तो पता चल गया कि राजनीति में कोई किसी को दोस्त नहीं, हाल ये है कि इस चुनाव में गठबंधन में बंधे दल भी एक -दूसरे से सीट छिनने में लगे हुए हैं, यहां पर विधान परिषद की 8 सीटों के लिए कुल 164 नामांकन भरे गए हैं और पता चला है कि महागठबंधन के दो बड़े दल यानी कांग्रेस और rjd 5 सीटों पर आपस में दोस्ताना संघर्ष करने वाले हैं। कुल मिलाकर 8 सीटों पर महागठबंधन के 14 प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे, मतलब साथी दल आपस में ही लड़ बैठेंगे अब चर्चाएं यही चल निकली हैं कि महागठबंधन के इसी गणित मतलब आपस में ही सीटों के लिए लड़ाई से उनका अंजाम वही होने वाला है जो विधानसभा चुनाव में हुआ था मतलब बेड़ा गर्क , दूसरी तरफ एनडीए में भी कुछ खास दोस्ताना दिखाई नहीं दे रहा है पता चला है कि सारण सीट पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के रामपुकार सिन्हा निर्दलीय दावेदार हैं और पार्टी के चार में तीन विधायक रामपुकार का समर्थन कर रहे। वहीं पटना (स्नातक) सीट पर jdu के अंदर ही घमासान चल रहा है। विधान परिषद की आठ सीटों के नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के साथ यह साफ दिख रहा है कि महागठबंधन अगर कागजी है, और साथ साथ का दावा खोखला है तो एनडीए में भी कोई एकजुटता नहीं है। मतलब दोनों ही तरफ अंदर ही अंदर घमासान चल रहा है अब इसका फायदा किसको मिलेगा ये तो समय ही बता पाएगा। युवा कांग्रेस चुनाव में फर्जीवाड़ा का आरोप -क्या करेंगे rahul gandhi लगता है कांग्रेस में अजब-गजब खेल चल रहा है, एक तरफ कांग्रेस वोट चोरी, चुनावों में गडबड़ी का आरोप लगाकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में प्रदर्शन कर रही है, आज दिल्ली में कांग्रेस ने ना केवल जबरदस्त प्रदर्शन किया बल्कि राहुल और प्रियंका गांधी ने पुलिस को भी चकमा देकर कोई और रूट पकड़ लिया, खैर हम बात करना चाह रहे हैं कांग्रेस के दोहरे चरित्र की, जी हां आपको बता दें कि छत्तीसगढ में ही कांग्रेस के ही दो कद्दावर नेताओं ने युवा कांग्रेस के संगठन चुनाव में गड़बडी फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है और इन दोनों सीनियर नेताओं ने तुरंत चुनाव को रद्द करने की मांग की है। वैसे इस मामले की शिकायत कांग्रेस आलाकमान को कर दी गई है लेकिन राहुल गांधी से लेकर प्रियंका और तमाम कांग्रेस के नेता इसपर मुंह बंद किए बैठे हैं, वैसे बोले भी तो किस मुंह से खुद चुनाव आयोग पर चुनाव में गड़ब़ड़ी का आरोप लगाए बैठे हैं। मजेदार बात ये हैं कि राहुल बार बार आरोप लगा रहे हैं कि चुनावों में फर्जी वोटिंग के कारण वो चुनाव हार रहे हैं, वहीं छतीसगढ़ में कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व मंत्री शिव डहरिया और पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने भी संगठन चुनाव की प्रक्रिया पर सवाल उठाए । ये दोनों नेता भी फर्जी वोटिंग का आरोप लगाकर चुनाव रद्द करने की मांग पर अडे हैं। आपको बता दें कि इनका आरोप है कि यूथ कांग्रेस के चुनाव में फर्जी वोटिंग और हैकिंग हुई है अब जाहिर सी बात है कि बीजेपी को इसपर कांग्रेस को घेरना का पूरा मौका मिल गया और केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने कहा था कि कांग्रेस संगठन के बारे में सब जानते हैं। कांग्रेस में कैसे चुनाव होता है ये भी सब जानते हैं। एक दूसरे पर आरोप लगाते हैं, अपने व्यक्तिगत स्वार्थ की राजनीतिक कांग्रेस करती है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एक दूसरे के साथ नहीं बैठ सकते हैं। कांग्रेस के पास कोई रोड मैप नहीं है।

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ByAnu Jain Rohatgi

Oct 7, 2026

Modi सरकार इस front पर क्यों फेल होती दिख रही

मोदी मंत्रीमंडल का विस्तार-बदलाव एक बार फिर जबरदस्त चर्चा में हैं, इसके पीछे दो तीन बड़े कारण माने जा रहे हैं, पहला पंजाब और यूपी चुनाव से पहले वहां के कद्दावर नेताओं को मोदी अपनी सरकार में लाना चाहते हैं जिससे वहां कार्यकर्ताओं में जोश आए और प्रचार-प्रसार के दौरान पलड़ा भारी रहे, दूसरा इस समय इस समय मोदी कैबिनेट में 12 ऐसे मंत्री हैं, जिन के पास एक नहीं कई और मंत्रालय का बार है, आंकड़ों के हिसाब से देखें तो यह संख्या करीब 40 फीसदी बैठती है जो अपने आप में एक बहुत बड़ी संख्या है, दो कैबिनेट मंत्रि तो ऐसे हैं जिनके पास तीन-तीन बड़े मंत्रालयों का जिम्मा है।हाल ही में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा जैसे बड़े और महत्वपूर्ण मंत्रालय को भी संभालना पड़ रहा है। तीसरा मोदी सरकार अपना विस्तार इसलिए भी जल्दी से जल्दी करना चाहती है क्योंकि यूपी और पंजाब जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में चुनाव हैं और मोदी सरकार में अभी एक भी मुस्लिम और क्रिश्चियन चेहरा नहीं है। विपक्ष इस बात को चुनाव में भुनाने की पूरी कोशिश करेगा और ये बात बीजेपी आलाकमान हरगिज नहीं चाहेंगे। यही नहीं इस बार राज्य सभा के लिए पैट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी को भी टिकट नहीं मिला जिससे उनको भी सरकार से बाहर जाना पड़ेगा और उसके बाद मोदी सरकार में सिख प्रतिनिधित्व भी जीरो हो सकता है।वैसे अल्पसंख्यक चेहरों में मोदी सरकार में किरण रिजूज जो बौद्ध हैं। इसलिए माना जा रहा है कि मोदी मंत्रीमंडल का विस्तार करते समय इन सब बातों पर पूरा ध्यान दिया जाएगा जो आने वाले विधानसभा चुनावों में विपक्ष को बीजेपी को टारगेट करने का कोई मौका ना मिले। यूपी के कुछ बड़े चेहरों को मोदी सरकार में जगह मिल सकती है और पंजाब चुनाव को देखते हुए किसी सिख नेता को भी मंत्री बनाए जाने की पूरी संभावना है। इसी तरह से मोदी सरकार किसी क्रिश्चियन नेता को भी जगह दे सकती है। आपको बता दें कि केंद्रीय मंत्रिपरिषद में इस समय मात्र 68 मंत्री रह गए हैं जबकि इसमें ज्यादा से ज्यादा 81 मंत्री हो सकते हैं। इस समय मोदी सरकार में 29 कैबिनेट मंत्री, 5 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और 34 राज्यमंत्री हैं।आमतौर पर केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 75 मंत्री होते हैं, वैसे मोदी जी का तीसरा कार्यकाल जून, 2024 में हुआ, जिसमें दूसरे कार्यकाल के ज्यादातर मंत्रियों को उन्होंने अपनी सरकार में जगह दे दी थी। अब चर्चाएं हैं कि शीतकालीन सत्र से पहले मोदी सरकार में बड़ा बदलाव दिख सकता है। कुछ मंत्रियों के मंत्रालय बदलने की संभावना है और कईं नए चेहरों को भी जगह मिल सकती है

Bihar – इस चुनाव ने खोली पोल दोस्त भी दुश्मन बनकर लडेंगे

बिहार में विधान परि‍षद की आठ सीटों के चुनाव के दौरान ये तो पता चल गया कि राजनीति में कोई किसी को दोस्त नहीं, हाल ये है कि इस चुनाव में गठबंधन में बंधे दल भी एक -दूसरे से सीट छिनने में लगे हुए हैं, यहां पर विधान परिषद की 8 सीटों के लिए कुल 164 नामांकन भरे गए हैं और पता चला है कि महागठबंधन के दो बड़े दल यानी कांग्रेस और rjd 5 सीटों पर आपस में दोस्ताना संघर्ष करने वाले हैं। कुल मिलाकर 8 सीटों पर महागठबंधन के 14 प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे, मतलब साथी दल आपस में ही लड़ बैठेंगे अब चर्चाएं यही चल निकली हैं कि महागठबंधन के इसी गणित मतलब आपस में ही सीटों के लिए लड़ाई से उनका अंजाम वही होने वाला है जो विधानसभा चुनाव में हुआ था मतलब बेड़ा गर्क , दूसरी तरफ एनडीए में भी कुछ खास दोस्ताना दिखाई नहीं दे रहा है पता चला है कि सारण सीट पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के रामपुकार सिन्हा निर्दलीय दावेदार हैं और पार्टी के चार में तीन विधायक रामपुकार का समर्थन कर रहे। वहीं पटना (स्नातक) सीट पर jdu के अंदर ही घमासान चल रहा है। विधान परिषद की आठ सीटों के नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के साथ यह साफ दिख रहा है कि महागठबंधन अगर कागजी है, और साथ साथ का दावा खोखला है तो एनडीए में भी कोई एकजुटता नहीं है। मतलब दोनों ही तरफ अंदर ही अंदर घमासान चल रहा है अब इसका फायदा किसको मिलेगा ये तो समय ही बता पाएगा।

 

युवा कांग्रेस चुनाव में फर्जीवाड़ा का आरोप -क्या करेंगे Rahul Gandhi

लगता है कांग्रेस में अजब-गजब खेल चल रहा है, एक तरफ कांग्रेस वोट चोरी, चुनावों में गडबड़ी का आरोप लगाकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में प्रदर्शन कर रही है, आज दिल्ली में कांग्रेस ने ना केवल जबरदस्त प्रदर्शन किया बल्कि राहुल और प्रियंका गांधी ने पुलिस को भी चकमा देकर कोई और रूट पकड़ लिया, खैर हम बात करना चाह रहे हैं कांग्रेस के दोहरे चरित्र की, जी हां आपको बता दें कि छत्तीसगढ में ही कांग्रेस के ही दो कद्दावर नेताओं ने युवा कांग्रेस के संगठन चुनाव में गड़बडी फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है और इन दोनों सीनियर नेताओं ने तुरंत चुनाव को रद्द करने की मांग की है। वैसे इस मामले की शिकायत कांग्रेस आलाकमान को कर दी गई है लेकिन राहुल गांधी से लेकर प्रियंका और तमाम कांग्रेस के नेता इसपर मुंह बंद किए बैठे हैं, वैसे बोले भी तो किस मुंह से खुद चुनाव आयोग पर चुनाव में गड़ब़ड़ी का आरोप लगाए बैठे हैं। मजेदार बात ये हैं कि राहुल बार बार आरोप लगा रहे हैं कि चुनावों में फर्जी वोटिंग के कारण वो चुनाव हार रहे हैं, वहीं छतीसगढ़ में कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व मंत्री शिव डहरिया और पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने भी संगठन चुनाव की प्रक्रिया पर सवाल उठाए । ये दोनों नेता भी फर्जी वोटिंग का आरोप लगाकर चुनाव रद्द करने की मांग पर अडे हैं। आपको बता दें कि इनका आरोप है कि यूथ कांग्रेस के चुनाव में फर्जी वोटिंग और हैकिंग हुई है अब जाहिर सी बात है कि बीजेपी को इसपर कांग्रेस को घेरना का पूरा मौका मिल गया और केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने कहा था कि कांग्रेस संगठन के बारे में सब जानते हैं। कांग्रेस में कैसे चुनाव होता है ये भी सब जानते हैं। एक दूसरे पर आरोप लगाते हैं, अपने व्यक्तिगत स्वार्थ की राजनीतिक कांग्रेस करती है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एक दूसरे के साथ नहीं बैठ सकते हैं। कांग्रेस के पास कोई रोड मैप नहीं है।

 

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Modi सरकार इस front पर क्यों फेल होती दिख रही मोदी मंत्रीमंडल का विस्तार-बदलाव एक बार फिर जबरदस्त चर्चा में हैं, इसके पीछे दो तीन बड़े कारण माने जा रहे हैं, पहला पंजाब और यूपी चुनाव से पहले वहां के कद्दावर नेताओं को मोदी अपनी सरकार में लाना चाहते हैं जिससे वहां कार्यकर्ताओं में जोश आए और प्रचार-प्रसार के दौरान पलड़ा भारी रहे, दूसरा इस समय इस समय मोदी कैबिनेट में 12 ऐसे मंत्री हैं, जिन के पास एक नहीं कई और मंत्रालय का बार है, आंकड़ों के हिसाब से देखें तो यह संख्या करीब 40 फीसदी बैठती है जो अपने आप में एक बहुत बड़ी संख्या है, दो कैबिनेट मंत्रि तो ऐसे हैं जिनके पास तीन-तीन बड़े मंत्रालयों का जिम्मा है।हाल ही में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा जैसे बड़े और महत्वपूर्ण मंत्रालय को भी संभालना पड़ रहा है। तीसरा मोदी सरकार अपना विस्तार इसलिए भी जल्दी से जल्दी करना चाहती है क्योंकि यूपी और पंजाब जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में चुनाव हैं और मोदी सरकार में अभी एक भी मुस्लिम और क्रिश्चियन चेहरा नहीं है। विपक्ष इस बात को चुनाव में भुनाने की पूरी कोशिश करेगा और ये बात बीजेपी आलाकमान हरगिज नहीं चाहेंगे। यही नहीं इस बार राज्य सभा के लिए पैट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी को भी टिकट नहीं मिला जिससे उनको भी सरकार से बाहर जाना पड़ेगा और उसके बाद मोदी सरकार में सिख प्रतिनिधित्व भी जीरो हो सकता है।वैसे अल्पसंख्यक चेहरों में मोदी सरकार में किरण रिजूज जो बौद्ध हैं। इसलिए माना जा रहा है कि मोदी मंत्रीमंडल का विस्तार करते समय इन सब बातों पर पूरा ध्यान दिया जाएगा जो आने वाले विधानसभा चुनावों में विपक्ष को बीजेपी को टारगेट करने का कोई मौका ना मिले। यूपी के कुछ बड़े चेहरों को मोदी सरकार में जगह मिल सकती है और पंजाब चुनाव को देखते हुए किसी सिख नेता को भी मंत्री बनाए जाने की पूरी संभावना है। इसी तरह से मोदी सरकार किसी क्रिश्चियन नेता को भी जगह दे सकती है। आपको बता दें कि केंद्रीय मंत्रिपरिषद में इस समय मात्र 68 मंत्री रह गए हैं जबकि इसमें ज्यादा से ज्यादा 81 मंत्री हो सकते हैं। इस समय मोदी सरकार में 29 कैबिनेट मंत्री, 5 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और 34 राज्यमंत्री हैं।आमतौर पर केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 75 मंत्री होते हैं, वैसे मोदी जी का तीसरा कार्यकाल जून, 2024 में हुआ, जिसमें दूसरे कार्यकाल के ज्यादातर मंत्रियों को उन्होंने अपनी सरकार में जगह दे दी थी। अब चर्चाएं हैं कि शीतकालीन सत्र से पहले मोदी सरकार में बड़ा बदलाव दिख सकता है। कुछ मंत्रियों के मंत्रालय बदलने की संभावना है और कईं नए चेहरों को भी जगह मिल सकती है Bihar ——इस चुनाव ने खोली पोल दोस्त भी दुश्मन बनकर लडेंगे बिहार में विधान परि‍षद की आठ सीटों के चुनाव के दौरान ये तो पता चल गया कि राजनीति में कोई किसी को दोस्त नहीं, हाल ये है कि इस चुनाव में गठबंधन में बंधे दल भी एक -दूसरे से सीट छिनने में लगे हुए हैं, यहां पर विधान परिषद की 8 सीटों के लिए कुल 164 नामांकन भरे गए हैं और पता चला है कि महागठबंधन के दो बड़े दल यानी कांग्रेस और rjd 5 सीटों पर आपस में दोस्ताना संघर्ष करने वाले हैं। कुल मिलाकर 8 सीटों पर महागठबंधन के 14 प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे, मतलब साथी दल आपस में ही लड़ बैठेंगे अब चर्चाएं यही चल निकली हैं कि महागठबंधन के इसी गणित मतलब आपस में ही सीटों के लिए लड़ाई से उनका अंजाम वही होने वाला है जो विधानसभा चुनाव में हुआ था मतलब बेड़ा गर्क , दूसरी तरफ एनडीए में भी कुछ खास दोस्ताना दिखाई नहीं दे रहा है पता चला है कि सारण सीट पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के रामपुकार सिन्हा निर्दलीय दावेदार हैं और पार्टी के चार में तीन विधायक रामपुकार का समर्थन कर रहे। वहीं पटना (स्नातक) सीट पर jdu के अंदर ही घमासान चल रहा है। विधान परिषद की आठ सीटों के नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के साथ यह साफ दिख रहा है कि महागठबंधन अगर कागजी है, और साथ साथ का दावा खोखला है तो एनडीए में भी कोई एकजुटता नहीं है। मतलब दोनों ही तरफ अंदर ही अंदर घमासान चल रहा है अब इसका फायदा किसको मिलेगा ये तो समय ही बता पाएगा। युवा कांग्रेस चुनाव में फर्जीवाड़ा का आरोप -क्या करेंगे rahul gandhi लगता है कांग्रेस में अजब-गजब खेल चल रहा है, एक तरफ कांग्रेस वोट चोरी, चुनावों में गडबड़ी का आरोप लगाकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में प्रदर्शन कर रही है, आज दिल्ली में कांग्रेस ने ना केवल जबरदस्त प्रदर्शन किया बल्कि राहुल और प्रियंका गांधी ने पुलिस को भी चकमा देकर कोई और रूट पकड़ लिया, खैर हम बात करना चाह रहे हैं कांग्रेस के दोहरे चरित्र की, जी हां आपको बता दें कि छत्तीसगढ में ही कांग्रेस के ही दो कद्दावर नेताओं ने युवा कांग्रेस के संगठन चुनाव में गड़बडी फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है और इन दोनों सीनियर नेताओं ने तुरंत चुनाव को रद्द करने की मांग की है। वैसे इस मामले की शिकायत कांग्रेस आलाकमान को कर दी गई है लेकिन राहुल गांधी से लेकर प्रियंका और तमाम कांग्रेस के नेता इसपर मुंह बंद किए बैठे हैं, वैसे बोले भी तो किस मुंह से खुद चुनाव आयोग पर चुनाव में गड़ब़ड़ी का आरोप लगाए बैठे हैं। मजेदार बात ये हैं कि राहुल बार बार आरोप लगा रहे हैं कि चुनावों में फर्जी वोटिंग के कारण वो चुनाव हार रहे हैं, वहीं छतीसगढ़ में कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व मंत्री शिव डहरिया और पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने भी संगठन चुनाव की प्रक्रिया पर सवाल उठाए । ये दोनों नेता भी फर्जी वोटिंग का आरोप लगाकर चुनाव रद्द करने की मांग पर अडे हैं। आपको बता दें कि इनका आरोप है कि यूथ कांग्रेस के चुनाव में फर्जी वोटिंग और हैकिंग हुई है अब जाहिर सी बात है कि बीजेपी को इसपर कांग्रेस को घेरना का पूरा मौका मिल गया और केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने कहा था कि कांग्रेस संगठन के बारे में सब जानते हैं। कांग्रेस में कैसे चुनाव होता है ये भी सब जानते हैं। एक दूसरे पर आरोप लगाते हैं, अपने व्यक्तिगत स्वार्थ की राजनीतिक कांग्रेस करती है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एक दूसरे के साथ नहीं बैठ सकते हैं। कांग्रेस के पास कोई रोड मैप नहीं है।