UP में क्या मिलेगा अखिलेश और चंद्रशेखर का हाथ
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं लेकिन जिस तरह की के डेवलपमेंट्स उत्तर प्रदेश में हो रहे हैं, उसने बहुत सारे लोगों की नींद उड़ा दी है। विशेष रूप से आजाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर आजाद रावण और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश जिनकी मुलाकात जिन लोगों की मुलाकात अभी संसद भवन में उनके संसदीय ऑफिस में हुई और उन्होंने उनसे अकेले मुलाकात की और मुलाकात के बाद यह बात निकल कर के आई कि चंद्रशेखर आजाद जो है वह समाजवादी पार्टी के साथ अलायंस में चुनाव लड़ना चाहते हैं और वह चाहते हैं कि उनको पश्चिम उत्तर प्रदेश में जहां दलित बाहुल्य क्षेत्र हैं उनको वहां पर 25 सीटें दी जाए और वो 25 सीटों की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर के उन्होंने अपनी मांग रखी। हालांकि जो सूचना आ रही है कि उसको फौरी तौर पर तो स्वीकार नहीं किया गया है लेकिन उन्होंने उनको धर्मेंद्र यादव से मिलने की नसीहत दी गई और जब धर्मेंद्र यादव से मिलने भी उनकी मुलाकात हुई धर्मेंद्र यादव के जन्मदिन के अभी जो गुजरा उसमें लेकिन वहां पर भी कुछ बहुत पॉजिटिव बात निकल कर के नहीं सामने आई इसलिए कि वो 25 सीट मांग रहे हैं। पर धर्मेंद्र यादव ने उन्हें 10 सीटे ऑफर की और उन्होंने यह भी नसीहत दे डाली कि नगीना जिस क्षेत्र से वह सांसद हैं उसमें लगभग 7 लाख मुस्लिम वोटर्स हैं और सारे मुस्लिम वोटर जो हैं वो समाजवादी पार्टी के वोटर्स हैं और वो चुनाव किस तरह से जीते हैं ये सबको मालूम है। निश्चित तौर पर अगर किसी भी स्थिति में यह समझौता हो जाता है तो सीमित क्षेत्र में ही लेकिन यह कुछ लोगों के लिए विशेष रूप से बीजेपी के लिए चिंता की बात हो सकती है। अब हालांकि समाजवादी पार्टी पीडीए की बात कर रहा है। पिछड़ा दलित और अल्पसंख्यक और भाजपा हिंदुत्व की बात कर रही है। दूसरी तरफ समाजवादी बहुजन समाज पार्टी जो है वो जिस तरह से यूजीसी को लेकर के ब्राह्मण और अपर कास्ट मतदाताओं की नाराजगी है। वह किसी तरह से ब्राह्मण मतदाताओं या अपर मत अपर कास्ट मतदाताओं को अपनी तरफ खींचने की तैयारी में जुगत में लगा हुआ है।
आसाम में Congress की जीत के आसार कम होते जा रहे

कांग्रेस आसाम में लगातार मजबूती से जीत का दावा कर रही है कि अगला चुनाव वह जीतेंगे। लेकिन क्या ऐसा संभव हो पाएगा या नहीं हो पाएगा यह तो आने वाला समय बताएगा। लेकिन जिस तरह की स्थितियां है और जिस तरह से लगातार हेमंता विश्व शर्मा आक्रामक हो रहे हैं कांग्रेस के खिलाफ लिए वो निश्चित तौर पर मुश्किल वाली स्थिति हो रही है।असम के मुख्यमंत्री हैं उन्होंने खुलकर वहां के नेता और लोकसभा में उपनेता और प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगई के और उनकी पत्नी के खिलाफ कैंपेन चला रखा है , और उस कैंपेन में बता रहे हैं कि किस तरह से उनकी पत्नी के पाकिस्तान के साथ मतलब वो पाकिस्तान में और जॉर्ज शोरस की कंपनी और इस तरह के रिश्तों की बात हो रही है और यहां तक बात आ गई है कि किस तरह से जो उनका परिवार है उसने भारत की नागरिकता छोड़ दी। उनके बच्चे जो है वह भारत की नागरिक भारत के नागरिक नहीं और यहां तक कि जो उनका ब्रिटिश पासपोर्ट उन लोगों ने ले लिया है। भारतीय पासपोर्ट सरेंडर कर दिया है और वो लोग जो है वो भारत में राजनीति करना चाह रहे हैं। और यहां तक कि गौरव गोगोई की जो बेटी है उसके पासपोर्ट में उसका धर्म जो है वो ईसाई लिखा है। ये इस तरह की चीजें निकल कर के आई हैं। और इसको लेकर के बहुत अग्रेसिव हो गए हैं हेमंत विश्व शर्मा। बहुत सारे आरोप हैं कि किन-किन लोगों से उनकी मुलाकात हुई? क्यों 11 बार विजिट की? क्यों गौरव गोगोई एक घंटे के 11 दिन के लिए लापता हो गए? क्यों वो हवाई जहाज की बजाय वो रोड के के रास्ते गए? यहां तक कि ये भी बात आ गई कि पासपोर्ट का खो जाने का बहाना करके वो इजराइल से पाकिस्तान बाय रोड आए। इस तरह के बहुत सारे आरोप हैं जो कांग्रेस के लिए मुश्किल पैदा कर रहे हैं , और ये जो है वो एक बड़ा संकट होता जा रहा है कांग्रेस के लिए।
प्रियंका गांधी क्यों नहीं उठाया पप्पू यादव का फोन


बिहार में कांग्रेस कि लगातार खराब स्थिति में होती जा रही है। अब वहां पर उसका एकमात्र मजबूत जो स्तंभ था पप्पू यादव वो भी बहुत खुश नहीं है गांधी परिवार को लेकर के। बिना कांग्रेस के सपोर्ट के वो अपना इंडिपेंडेंट चुनाव जीत करके आए हैं और जिस तरह से उनको पप्पू यादव को प्रियंका गांधी का हनुमान कहा जाता था। वो खासे नाराज नजर आ रहे हैं। पूर्णिया से सांसद हैं और बिहार इलेक्शन में भी उनको तवज्जो नहीं दी गई थी और उसका परिणाम यह हुआ कि बहुत बुरी तरह से कांग्रेस हारी और छह पर सिमट गई है। मसला यह है कि अब प्रियंका गांधी जो है वो पप्पू यादव का फोन नहीं उठा रही। अभी उनकी गिरफ्तारी हुई। गिरफ्तारी के बाद उनको जेल भेज दिया गया। इन सब के बीच जो है उनका फोन प्रियंका गांधी नहीं उठा रही है और तब जब उनकी पत्नी रंजीता रंजन जो है वो कांग्रेस की महासचिव हैं। बड़ी विषम परिस्थिति है। मतलब ये संसद में भी ऐसा नहीं मतलब संसद में भी जब मुलाकात हो रही है तो उनको समय नहीं मिल रहा है और तेजस्वी यादव या जोआरजेडी है वो पहले से ही आक्रामक है पप्पू यादव को वो किसी और यादव लीडरशिप को बिहार में नहीं उभरने उभरने देना चाह रहा है। इसलिए वो किसी तरह से पप्पू को पप्पू यादव को उभरने नहीं देंगे। अब चूंकि पूर्णिया में उनका एक छत्र राज्य है इसलिए वह इंडिपेंडेंट भी अपनी सीट जीत सकते हैं। लेकिन पूर्णिया बिहार नहीं है। वह अपना दायरा बढ़ाना चाह रहे थे और उसमें कांग्रेस की मदद चाह रहे थे। लेकिन कांग्रेस ने अब तक उनको कोल्ड शोल्डर ही दिखाया। तो क्या एक और जो बड़ा स्तंभ कांग्रेस के लिए साबित हो सकता था, वो भी उसका भी मोह भंग हो रहा है।
