अजब Demand  जातीय जनगणना सिर्फ हिंदूओं की हो 

कर्नाटक में एक बार फिर मुस्लिम लीग की विचारधारा यानी  जिन्ना वाली डिमांड फिर शुरू हो गई है। लगभग 48 मुस्लिम संगठनों ने जिस तरह की बात की है, वह सीधे तौर पर विभाजन के पहले की जो मुस्लिम राजनीति थी, उसकी याद दिलाता है। जो मोटे तौर पर 48 संगठनों ने बेंगलुरु में बैठक करके मांग की है। उसमें  रिजर्वेशन को रिस्टोर करने की मांग है। पॉलिटिकल रिप्रेजेंटेशन है। मतलब यह कि जो सेपरेट इलेक्टोरेट वाला मामला या एससी एसटी के तह तौर तर्ज पर मुसलमानों को भी आरक्षण और पॉलिटिकल रिजर्वेशन उसके अलावा अलग बजट जैसे पहले रेलवे और यूनियन बजट होता था ऐसे अब मुस्लिम बजट चाहिए। उसके अलावा वक्फ प्रॉपर्टीज को जो है उनको उनके लिए एक अलग योजना बनाने की मांग की गई है प्रॉपर्टीज को बचाने के लिए। इसके अलावा मुस्लिम छात्रों कोउनको शिक्षा में उनको मदद करने के लिए सुधार की बात कही गई है। कैटल स्लॉटर का पर जो प्रतिबंध है उसको हटाने की मतलब यह कि जो गौ हत्या या गो मांस को लेकर के बहुत सारे जगहों पर बैन है उसको हटाने की बात की गई है। कन्वर्जन लॉ को भी हटाने की बात कही जा रही है कि जो कन्वर्शन से संबंधित कानून है उसको हटाया जाए और 1000 करोड़ जो है वो मुसलमानों को ग्रांट के रूप में दिया जाए। इसके अलावा  वोटर लिस्ट को लेकर के जो रिवीजन प्रोसेस चल रहा है लगभग आधे देश में हो गया है। अब इस प्रक्रिया को पूरी तरह से रोकने के लिए  असेंबली में रेज़ोल्यूशन लाने की बात की जा रही है। और  जातीय जनगणना करने की बात की जा रही है मुसलमान मांग कर रहे हैं कि जातीय जनगणना जो है वो सिर्फ हिंदुओं की की जाए। मुसलमानों की ना की जाए। ये एक इंटिमीडेशन टैक्टिक्स है जो जिन्ना ने किया था। जैसे जिन्ना ने कांग्रेस को हिंदू हिंदुओं की पार्टी बता करके वो किया गया है। अब यही बात सेम बात मुस्लिम ऑर्गेनाइजेशंस कर्नाटक सरकार पर लगा रहे हैं कि वो सॉफ्ट हिंदुत्व पैडल कर रही है। जबकि सबको मालूम है कि किस तरह से कर्नाटक की सरकार हिंदुओं के खिलाफ और हिंदुओं के खिलाफ जिस तरह की काम करती हुई नजर आ रही है।

SIR  —  काम लगातार —लोगों का विरोध भी लगातार 

लगभग 16 या 18 मतलब यूनियन टेरिटरी और स्टेट्स मिलाकर के एसआईआर की घोषणा की है चुनाव आयोग ने। अब ये महत्वपूर्ण मामला है अब ये जो तीसरा फेस का एसआईआर है ये घोषित किया जा चुका है। इसमें 16 स्टेट और तीन यूनियन टेरिटरी हैं। अब ये 16 स्टेट तीन यूनियन टेरिटरी हैं। इनमें एसआईआर होगा। लेकिन इसके पहले जो एसआईआर हुआ था उसमें लगभग 12 राज्यों में अब तक 13 करोड़ से ज्यादा वोट हालांकि 12 राज्यों से ज्यादा एसआईआर हो चुका है। लेकिन लगभग 13 से 14 करोड़ वोट कट चुके हैं। और यह जो नए राउंड का एसआईआर होना है ,जिसमें 16 स्टेट और तीन यूनियन टेरिटरी है जहां पर ये किया जाना है। अब ये स्टेट्स एक बार जल्दी से गिन लेते हैं। हिमाचल प्रदेश है, जम्मू कश्मीर है, लद्दाख है। यह यूनियन टेरिटरी है। इसके अलावा जो स्टेट्स हैं वो उड़ीसा है, मिजोरम है, सिक्किम है, मणिपुर है, दादरानगर हवेली है, उत्तराखंड है, आंध्र प्रदेश है, अरुणाचल प्रदेश है, हरियाणा है, चंडीगढ़ है, तेलंगाना है, पंजाब है, कर्नाटक है, मेघालय है, महाराष्ट्र है, झारखंड है, दिल्ली है, नागालैंड और त्रिपुरा। इसमें दिल्ली, महाराष्ट्र, झारखंड ये वो स्टेट हैं तेलंगाना, हरियाणा उसके अलावा अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड इनसब जगहों पर सबकी नजर रहने वाली है। इसलिए कि यहां पर घुसपैठियों को लेकर के लंबे समय से जो उड़ीसा भी है उसमें  लंबे समय से विवाद हुआ है और वह  ज़रूर निकल कर के आएगा। जहां पर नाम कटेंगे तो लोग विरोध भी करेंगे और जिनके वोट बैंक जाएंगे वो लोग विरोध भी करेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *