12 साल में विपक्ष को समझ में नहीं आई एक छोटी सी बात

हाल फिलहाल में मलिकार्जुन खरगे ने जो पीएम मोदी के को लेकर के पिता की जो टिप्पणी की है उस पर देश भर में बवाल मचा हुआ है और कहीं ना कहीं इससे कांग्रेस पूरी तरह से बैकफुट पर आती नजर आ रही है क्योंकि जिस तरह से बीजेपी के कार्यकर्ता नेता प्रदर्शन कर रहे हैं विरोध कर रहे हैं कांग्रेस को घेर रहे हैं , और यही नहीं बीजेपी के छोटे से लेकर बड़े नेता भी इस बात की निंदा कर रहे हैं क्योंकि एक बड़ा व्यक्तिगत हमला पीएम मोदी पर किया है मलिकार्जुन खरगे ने और मलिकार्जुन खरगे जिनकी उम्र खुद ही 80 साल को पार कर चुकी है। ऐसे में उनका इस तरह की टिप्पणी करना सच में एक विवाद का विषय बन गया है और बीजेपी के कई नेता जिसमें राजनाथ सिंह भी शामिल है। बहुत ही शालीन नेता है। सबको पता है उनको गुस्सा नहीं आता है और बहुत कम बोलते हैं, कम मुद्दों पर बोलते हैं। लेकिन उन्होंने भी इस बात की निंदा की है कि यह जो कहा गया है गलत है। और इससे एक तरफ जो कांग्रेस बैकफुट पर आ गई है , क्योंकि अभी कुछ समय पहले तक एसआईआर के मुद्दे को लेकर राहुल—- प्रियंका गांधी प्रदर्शन कर रहे थे धरने कर रहे थे और देशभर में इसकी चर्चा बन गई थी, खुद ये दोनों जंतरमंतर पर फेस बने हुए थे और सारी जगह सुर्खियां बटोर रहे थे लेकिन अचानक कांग्रेस के ये मुद्दा बिल्कुल बैकफुट पर आ गया और बड़ा मुद्दा बन गया पीएम मोदी पर की गई व्यक्तिगत टिप्पणी सबके बीच एक सवाल बड़ा सवाल यहां सामने आ जाता है जिस पर चर्चा करनी जरूरी है कि क्या विपक्ष को अभी तक 12 सालों में यह पता नहीं चल पाया है कि पीएम मोदी पर की गई कोई भी व्यक्तिगत टिप्पणी हमेशा उनको उल्टी ही पड़ती है और यह जो पिछले समय से जो टिप्पणी की जा रही है और उसके बाद जो जो चुनाव हुए हैं उसमें बीजेपी को काफी अच्छे वोट मिले हैं। अच्छे वोट मार्जिन से वो जीती है। यह बात विपक्ष को अभी तक समझ में नहीं आ रही है कि जो अगर पीएम मोदी पर कोई टिप्पणी करता है तो पीएम के चाहने वाले जो है जो उनके समर्थक हैं उनको तो बुरा लगता ही है। लेकिन साथ ही बहुत से ऐसे लोग हैं जो बीजेपी को पसंद नहीं करते हैं। उनको भी यह टिप्पणियां जो है वो इन टिप्पणियों से खुश नहीं होते। इसकी निंदा करते हैं क्योंकि कहीं ना कहीं उन्हें लगता है कि देश के प्रधानमंत्री हैं, हमारे प्रधानमंत्री हैं। चाहे हम किसी भी दल को सपोर्ट करते हैं और इतने बड़े हैं, उम्र में इतने बड़े हैं। उनको इस तरह से टारगेट करना गलत है। और ये कहीं ना कहीं हमारी हमारी जो इंडिया की संस्कृति है, संस्कार है, उसी का नतीजा है कि लोग यहां पर अभी भी बहुत से ऐसे लोग हैं जो कोई उनसे धोखा देता है, कोई उनके बारे में बुरा बोलता है। लेकिन वो उसको जबाव देते समय ,गुस्सा करते समय एक लिहाज रखते हैं , लेकिन यहां पर विपक्ष को यह बात समझ में नहीं आ रही और यही कारण है कि विपक्ष जो देश के मुख्य मंद्दे हैं उनसे भटका रहता है, इस समय देश में मेन मुद्दे क्या है? एसआईआर को लेकर जाने अनजाने बहुत से लोग नाराज हैं। जिनके नाम कट गए हैं। जेन्युइन लोगों के जो है परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बड़ा यह अहम मुद्दा है। महंगाई का मुद्दा है जो चल रहा है। लोग परेशान है। बेरोजगारी का मुद्दा है। ये तमाम मुद्दे हैं जिस पर विपक्ष एकजुट होकर सरकार को घेर सकती है। लेकिन विपक्ष बाज नहीं आती और वह व्यक्तिगत टिप्पणी करके जो जो भी कुछ उसने करा किया होता है उस पर सब पानी भर जाता है। और कुछ बड़ी बात नहीं है। अगर हम पिछली कुछ एपिसोड्स के बारे में आपको बताएं सबको ही पता है कि जब जिस तरह से पीएम मोदी को जब प्रोजेक्ट किया गया तो मनी शंकर अय्यर ने क्या बोला था और उनकी टिप्पणी जो है वो कहा जाता है लोगों के दिल में एक चुभन पैदा हुई लोगों को लगा कि ये गलत है। गरीब आदमी का मजाक उड़ाया जा रहा है। एक आदमी जो चाय बेचता है उसको लोगों ने अपने से कनेक्ट किया कि एक गरीब आदमी क्या नेता नहीं बन सकता है। क्योंकि मनी शंकर अय्यर ने कहा था कि मोदी चुनाव क्या जीतेंगे। कांग्रेस के सामने ही उनको एक दुकान लगा दी जाएगी। चाय वाले चाय बेचने के लिए उनको एक दुकान दे दी जाएगी। मीम बहुत बने थे उसको लेकर के। लेकिन वो मजाक कांग्रेस का बुरी तरह से उल्टा पड़ गया। क्या गरीब आदमी क्या एक गरीब आदमी जो पढ़ा लिखा है क्या वो देश का प्रधानमंत्री नहीं बन सकता? क्या वो राजनीति में नहीं जा सकता? और ये उल्टा साबित हुआ। इसके बाद चौकीदार चौर तो सबके सामने ही है जो राहुल गांधी ने बोला। उसके बाद जितने भी चुनाव हुए उसमें पीएम मोदी जो है अलग-अलग स्टेट में चुनाव हुए। पीएम मोदी के नाम से चुनाव हुए और चुनाव वो जीते। तो यह बात 12 साल में विपक्ष को समझ में क्यों नहीं आ रही है कि इस तरह की व्यक्तिगत टिप्पणी उसको पूरी तरह से खत्म कर देती है और जो अभियान चलाते हैं सरकार के खिलाफ उसमें सफल भी होते हैं लेकिन बीच में कोई ना कोई नेता कुछ ऐसी टिप्पणी कर देता है कि डायवर्जन हो जाता है । आपको याद होगा 2017 का वाक्य है कांग्रेस ने हम अखिलेश यादव की बात करेंगे 2017 में अखिलेश यादव ने यूपी में चुनाव यूपी में कहा था कि अमिताभ बच्चन को गुजरात के गधों की पब्लिसिटी करने की क्या जरूरत जरूरत है। कुछ इसी तरह का बयान दिया था और पता सबको था कि किस पर तंज किया है कि मोदी जी को आप इस तरह का तंज करके बोल रहे हैं और किस तरह से यूपी से अखिलेश यादव का सूपड़ा साफ हो गया था और योगी बहुत ही भारी बहुमत से जीते थे बात साफ है कि व्यक्तिगत टिप्पणी जो करता है विपक्ष वो कहीं ना कहीं उसको उल्टी पड़ जाती है ।
इस राज्य की बागावत कहीं Congress के हाथ से ना चली जाए कमान

देशभर में देखा जाए तो कांग्रेस के पास गिनती के ही राज्य बचे हैं और उनमें से एक राज्य हिमाचल प्रदेश है और जिस तरह से वहां अंदरूनी कलह चल रही है कोई बड़ी बात नहीं होगी कि चुनाव से पहले ये बगावत बड़ी बन जाए, जी हां यहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और उससे पहले ही यहां की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। सभी को पता है कि पहले भी जीत के बाद यहां हिमाचल में छह बार cm रह चुके वीरभद्र सिंह के पुत्र विक्रमादित्य सिंह को मुख्यमंत्री बनाने की मांग ने जोर पकड़ लिया था, खुद विक्रमादित्य सिंह भी इसको लेकर अड़ गए थे लेकिन जैसे तैसे उनको मनाकर सुक्खू जी को cm बना दिया गया और विक्रमादित्य सिंह को उनकी सरकार में लोक निर्माण मंत्री पद पर ही संतोष करना पड़ा, लेकिन अब जैसे ही 2027 के चुनिव दस्तक दे रहे हैं, एक बार फिर इस बार विक्रमादित्य सिंह को cm बनाने की मांग जोर पकड़ रही है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महासचिव रजनीश किमटा ने खुलेआम विक्रमादित्य को मुख्यमंत्री चेहरा बता कर यहां की राजनीति में हलचल पैदा कर दी। किमटा ने क्या बयान दिया, किमटा ने यह भी कहा कि विक्रमादित्य परिपक्व नेता हैं और जनता के दिलों में रहते हैं इसलिए सचिन पायलट के बाद दूसरे राज्यों में चुनाव प्रचार के लिए उनकी मांग रहती है। वैसे विक्रमादित्य ने न तो मुख्यमंत्री पद के दावे का समर्थन किया और न ही इसे खारिज किया लेकिन दूसरी तरफ मुखय्मंत्री सुक्खू के समर्थक अंदर ही अंदर इसका विरोध कर रहे हैं।
PM Modi और चाणक्य अचानक इतने एक्टिव क्यों

देशभर के चार राज्यों में MLC चुनाव हुए और उनके जो नतीजे सामने आए तो ना केवल प्रधानमंत्री ने उसको लेकर जबरदस्त पोस्ट क्या बल्कि साथ ही बीजेपी चाणक्य अमित शाह भी पोस्ट करने में आगे रहे, तो ऐसा क्या हुआ कि देश के PM और Home Minister दोनों ही इतने एक्टिव दिखाई दिए , चलिए बताते हैं दरअसल इन चुनावों में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली और ये सभी चुनाव बैलेट पेपर पर कराए गए थे, अब जैसा कि जनता को भी याद होगा कि अभी कुछ समय पहले तक कांग्रेस EVM का जबरदस्त विरोध कर रही थी और चुनाव बैलेट पेपर से करवाने के लिए आंदोलन भी किए, लेकिन अब जब बैलेट पेपर से चुनाव हुए तो कांग्रेस 0 पर ही टिकी रही, और इसपर P M Modi ने एक तंज भरा पोस्ट करके पूछा कि कांग्रेस को कितनी सीटें मिलीं? कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं, यही नहीं साथ ही मोदी ने अपनी पोस्ट में एक मोनोकल यानी एक आंख वाला चश्मा इमोजी का इस्तेमाल किया, मतलब जनता से इस सवाल का जवाब पूछ रहे हों। यही नहीं अमित शाह ने भी पोस्ट किया जिसमें राहुल गांधी को बैलेट बोक्स के आगे बैठा दिखाया गया और लिखा गया है कि बैलेट बाक्स इस्तीफा दें। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र में विधान परिषद यानी एमएलसी की 28 सीटों पर उपचुनाव हुए हैं और इनमें अभी तक कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला है।
