Up —क्या इस बार भी प्रियंका गांधी सुलझाएंगी सीटों का मामला
सीट साझेदारी को लेकर किए जा रहे दावों के बीच समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों अपने-अपने तैयारियों में लग गए हैं और दावा अपना-अपना है। हम पहले बता चुके हैं कि समाजवादी पार्टी 350 सीटों पर लड़ने की तैयारी कर रही है। अब कांग्रेस भी इसमें पीछे कैसे रह सकती है? कांग्रेस के नेता राजेंद्र पाल सिंह गौतम, वह 200 सीट का दावा पहले करते थे। फिर वह 150 पर आए और प्रियंका गांधी की जो एक दिल्ली में और लखनऊ में जो बैठक हुई, उस बैठक में 175 सीटों पर चर्चा की गई। 175 सीटों पर चर्चा के बाद यह फाइनल किया हुआ कि वह 125 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। अब क्या 125 सीटों पर समाजवादी उनको देने के लिए तैयार होगी या यह प्रेशर टैक्टिक्स है जिससे ज्यादा से ज्यादा सीटें निकाली जा सके। अब प्रेशर टैक्टिक्स में समाजवादी पार्टी कितना दबाव में आएगी? कितना दबाव को दरकिनार कर देगी। ये बड़े प्रश्न हैं। लेकिन एक बात तो तय है कि समाजवादी पार्टी जिस तरह की मांग या जिस तरह की डिमांड या जिस तरह की सीटों पर लड़ने की योजना बना रही है उसमें उसको बहुत फायदा इसलिए नहीं होगा कि जो भी होगा अगर ऐसा करेगी तो जो माइनॉरिटी वोट्स हैं उनका बंटवारा हो सकता है। अब यह एक प्रश्न है। दूसरा ये कि चुनाव में तीन चार महीने हैं और अभी इस बात का ही विवाद चल रहा है कि कौन पार्टी कितनी सीट लड़ेगा। जबकि सीटों पर काम होना शुरू हो जाना चाहिए। अगर अलायंस के कारण अलायंस के साथ लड़ना है और अलायंस का कैंडिडेट होगा। तो यह महत्वपूर्ण बात है। लेकिन सबके अपने-अपने दावे हैं। कांग्रेस ज्यादा से ज्यादा चाहती है। समाजवादी पार्टी चाहती है कि वो कम से कम इतनी सीट लड़े कि वो लगभग अकेले दम पर सरकार बनाने की स्थिति में पहुंचे। आसपास कम से कम रहे। तो अब चुनाव जीतेगी या नहीं जीतेगी समाजवादी पार्टी। यह अलग प्रश्न है। लेकिन अपना जो एक योजना है वह इसी योजना पर है। अह दूसरी तरफ बयानबाजी यह हो रही है कि हम सहमति बना लेंगे और हम एक साथ मिलकर के चुनाव लड़ेंगे और जो बड़े नेता हैं वह इस तरह की बात कर रहे हैं। लेकिन छोटे नेता यह कह रहे हैं कि वो इतनी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के बहुत सारे नेता पहले ही कह चुके हैं कि वह पूरी सीट 403 पर लड़ने की अभी तैयारी कर रहे हैं और जो अभी दो दिन पहले का दावा है उसमें यह कि वो 53 सीटें कांग्रेस को छोड़ने के लिए तैयार हैं। इससे ज्यादा नहीं।
13 देशों में हिंसा फैलाने 101 संगठन सक्रिय
भारत में लंबे समय से प्रोटेस्ट चल रहा है। यह मामला नीट से शुरू हुआ था और अभी पूरा अक्टूबर का आधा अक्टूबर इसी में गया। लेकिन इसी से मिलता जुलता बहुत सारा प्रोटेस्स जो है फ्रांस में स्थिति वायलेंट है और यूरोप के कई देशों में इटली और बाकी कई सारे देशों में ये सारा चल रहा है। लेकिन इसमें जो एक चौंकाने वाली बात चौंकाने वाली खबर निकल कर के ये आई है कि एक न्यूज़ मीडिया का एक वो है। उसने एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट की है। उस रिपोर्ट में 101 संगठनों को आइडेंटिफाई किया गया है। और ये 13 देश में तालमेल के साथ ये जो विरोध है ये ऑर्गनाइज कर रहे हैं। उसको एंपलीफाई कर रहे हैं। और जो भी है इसको और बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं और इसमें ना केवल फ्रांस भारत शामिल है बल्कि इसमें फ्रांस के अलावा और भी कई जो है कई देश शामिल है और हर जगह इसमें इसमें जो है सोशलिस्ट ऑर्गेनाइजेशनंस, लेबर यूनियन, स्टूडेंट, एडवोकेसी नेटवर्क और मीडिया आउटलेट्स ये सब शामिल है इंटरेस्टिंग बात यह है कि इसमें मीडिया भी शामिल है और ये लोग जो है जो मैसेज है उसको सब तरह से फैलाने की कोशिश कर रहे हैं और कुल मिलाकर के ये वही बात है जो भारत में लगातार कही जा रही है रिजीम चेंज वाला मामला। अब इसमें भारत फ्रांस के साथ लिंक होने की भारत और फ्रांस का जो मामला है मतलब दोनों जगह जो विरोध है उसके उसके लिंक होने की बात है। जहां पर भारत में भी zen-g लिखा जा रहा है। फ्रांस में भी जजी लिखा जा रहा है। ब्रावो फॉर टुडे मतलब ये सारी चीजें हो रही है। और कुल मिलाकर के सब जगह वही है। मतलब फ्रांस, स्पेन, इंडिया, अल्बेनिया तो एक ही वो मतलब 13 देशों में और 101 संगठन काम कर रहे हैं। कुल मिलाकर के मसला वही है। रिजीम बदलना और सरकार बदलना, इलेक्टिड गवर्नमेंट को हटाना। इसमें बहुत सारे न्यूज़ बहुत सारे ऑर्गेनाइजेशनंस हैं। जर्नलिस्ट जिसने ये इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट की है न्यूज़ की वो असरा क्यों नोमानी है
Bjp नेता हरदीप पुरी क्या सच क्या नहीं
हरदीप पुरी के मामले में जिस तरह से हरदीप पुरी की एक फोटो वायरल हो रही है जिसमें ये बताया जा रहा है कि उनका जो दावा था कि एपस्टीन से उनकी जो मुलाकात हुई थी वो एक डेलीगेशन में हुई थी लेकिन फोटो कुछ और कह रही है। फोटो में वो इंडिविजुअली मिलते हुए दिखाई दे रहे हैं। अब सरकार क्या ये सरकार को इस बात का आभास था कि ऐसी स्थिति हो सकती है। इसीलिए उनको राज्यसभा का नॉमिनेशन नहीं दिया गया। अभी जो उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजे गए थे। अभी जो उत्तर प्रदेश में आठ लोगों की सूची आई उसमें नाम उनका नहीं है और 24 नवंबर को अगले महीने उनका टर्म खत्म हो रहा है। तो इससे पहले कि बात का बतंगड़ बने वो उनका टेन्योर अपने आप खत्म हो जाएगा , तो सरकार क्या इस बारे में जानकारी थी या सरकार इस मामले पर क्लेरिफिकेशन लेकर के आएगी और यह बताने की कोशिश करेगी या हरदीप पुरी का अपना क्लेरिफिकेशन इस मामले में आएगा। अब हरदीप पुरी का दावा ये था कि वो इंडिविजुअल कैपेसिटी से नहीं गए थे। वो जो है ये इन्वेस्टमेंट खोजने या इन्वेस्टमेंट के लिए गए थे। उससे उससे आगे का कोई मामला नहीं है। लेकिन विपक्ष इस पूरे मामले में हरदीप पुरी के खिलाफ हमलावर है। और हरदीप पुरी क्या उनके पास आगे का क्लेरिफिकेशन है? कहां से बात निकल कर के और आगे जाएगी या ये हरदीप पुरी के त्यागपत्र के साथ ही ये मामला होगा और ये लगातार बहुत सारे मामले में सरकार के साथ होता रहा है। एमजे अकबर का त्यागपत्र हुआ उसके बाद धर्मेंद्र प्रधान का त्यागपत्र हुआ। इस तरह के मामलों को लेकर के अब क्या अगला निशाना जो है वो हरदीप पुरी है जो जिन पर विपक्ष के दबाव में त्यागपत्र होगा। दो जो दबाव में इसके पहले त्यागपत्र ऑलरेडी हो चुके हैं।
