उद्वव ठाकरे क्या बदल रहे हैं—नहीं भा रहा congress का साथ 

भगवा राजनीति से सेकुलर  राजनीति की तरफ शिफ्ट होने वाली शिवसेना , मतलब शिवसेना के संस्थापक थे बाला साहब ठाकरे उनके पुत्र उद्धव ठाकरे जो पार्टी लीड कर रहे हैं , उन्होंने  दशहरे के  भाषण में कहा कि  उन्होंने एक बार फिर वापस अपनी आईडियोलॉजिकल जो उनका कमिटमेंट रहा है बाला साहब ठाकरे का उद्धव ठाकरे तो पूरी तरह से सेकुलर  हो गए हैं और जिस तरह से वो बात करते हैं वो पूरी तरह से सेकुलर  पॉलिटिक्स की तरफ है लेकिन एक बार फिर उन्होंने या बात कही कि सैफरन जो है भगवा वो उनकी की आइडेंटिटी है और उस आइडेंटिटी को कोई नहीं चुरा सकता और उसकी बात करते-करते वो एक कदम आगे बढ़े कि उनकी मंशा तो यह है ना केवल  महाराष्ट्र की विधानसभा में भगवा ध्वज लहराए बल्कि लाल किले पर भी भगवा ध्वज लहराए। अब इसमें दो महत्वपूर्ण बातें हैं। पहली बात तो ये कि क्या उनकी इस बात पर जो उनका अलायंस है आईएनडीएआईए वो सहमत है? वो लोग इस बात को स्वीकार करेंगे। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की लगातार इस बात पर आलोचना  की जाती रही कि वो अपना झंड़ा फहराते हैं पर कम लोग ही यह जानते हैं कि  पहले एक फ्लैग कोड हुआ करता था। उसके अनुसार कोई भी कहीं भी झंडा राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहरा सकता है। लेकिन इस बात पर आलोचना होती रहेगी कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जो है वो हमेशा भगवा ध्वज फहराता रहा है। उसको राष्ट्रीय ध्वज से लेना देना नहीं है। अब क्या जो उद्धव ठाकरे ने बात कही है उस पर आईएनडीएआईए के अलायंस की सहमति है या नहीं है? अ ये तो आईएनडीआई अलायंस के लोग ही बताएंगे या बाकी उनके जो अलायंस दल हैं वो बताएंगे। लेकिन भगवा ध्वज राष्ट्रीय ध्वज का रूप लेगा। कैसे लेगा? ये एक बड़ा लंबा प्रोसेस है। और शायद ये एक रटेरिक जैसा ही है कि भारत में जो है वो भगवा ध्वज लाल किले पर फहराया जाएगा। अब लाल किले पर फहराया जाएगा। का मतलब यह कि 15 अगस्त को फहराए जाने की बात है। ये ये अपने आप में सिर्फ यह कि एक बयान दे कर हटने वाली बात है। इसमें इसमें कहीं कुछ होता हुआ नहीं दिख रहा है। और इसमें कहीं से भी कोई उनके अलायंस पार्टनर का साथ नहीं देगा। क्योंकि उनका हिंदुत्व वोट बिखर रहा है।उस वोट को समेटने के लिए इस तरह की बयानबाजी उद्धव कर सकते हैं और वह उनको करने का पूरा अधिकार है।

Punjab के मुख्यमंत्री पार्टी के लिए परेशानियां ही खड़ी कर रहे 

पंजाब के मुख्यमंत्री फ्रांस की यात्रा पर थे। उन्होंने कहा कि  पंजाब के लिए इन्वेस्टमेंट लाने के लिए फ्रांस की यात्रा पर थे। इस पर उनकी आलोचनाएं हुई। लेकिन अब जब वो वापस दिल्ली पहुंचे तो उनको एयरपोर्ट पर तीन घंटे रोक लिया गया। तीन से चार घंटे। ऐसा आम आदमी पार्टी का आरोप है और यह भी आरोप है कि उनसे 50, 000 रूपए वसूले गए। अब ये दोनों बातों के जो मतलब निकल कर के आ रहा है। पहला पहली बात तो यह कि उनको तीन चार घंटे रोका गया। बहुत सारी चीजें थी जो जांच की गई और फाइनली यह पाया गया कि उनके पास बहुत सारा ऐसा सामान था जिसकी कस्टम ड्यूटी नहीं पे की गई थी और इस कारण से उनसे ₹00 जो कस्टम ड्यूटी उन्होंने चुराने की या बचाने की कोशिश की थी। मुख्यमंत्री के तौर पर वह किया गया। अब इसमें दो चीजें हैं। एक तो ये कि मुख्यमंत्री के तौर पर उनको ये सब चीजों करने से बचना चाहिए। इसलिए और दूसरा ये कि जब पॉलिटिकल आदमी हैं तो ये निश्चित तौर पर उन पर सबसे ज्यादा स्कैनर होगा तो वो क्यों एंबैरेस करना चाह रहे थे पार्टी को अपने? ये ये एक महत्वपूर्ण बात है। हालांकि  भगवंत मान के यह स्टेप्स हैं  लगातार आम आदमी पार्टी को नुकसान ही पहुंचा रहे हैं। हालांकि आम आदमी पार्टी की बाकी सब एक्टिविटीज भी कुछ बहुत अच्छा पंजाब में करती हुई नहीं दिख रही है। क्योंकि वहां पर कांग्रेस आपस में लड़ रहा है और भारतीय जनता पार्टी शिरोमणि अकाली दल का अलायंस टूटा हुआ है। इसलिए अह आम आदमी पार्टी शायद वहां मज़बूत दिख सकती है। लेकिन अगर  कांग्रेस एकजुट हो कर के चुनाव लड़े तो या भारतीय जनता पार्टी अपने एनडीए वाले पुराने कॉम्बिनेशन के साथ लड़े तो। तो आम आदमी पार्टी का वहां इस बार टिक पाना मुश्किल है। बहुत सारे ऐसे मामले हैं जो उनके खिलाफ जा रहे हैं और ये सारी चीजें अभी जो ड्रग को लेकर के मामला फैला है जिस तरह से किलिंग्स हो रही हैं। वहां पर जो लोग नशाखोरी के खिलाफ एक्टिविज्म कर रहे हैं। कन्वर्जन को लेकर के सिखों में भयानक नाराजगी है कि किस तरह से उनका धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। पैसे बाहर से आ रहे हैं। यह सारी चीजें पंजाब में हो रही हैं। और जो आम आदमी पार्टी का पूरा नेतृत्व है वो उन चीजों में उलझा हुआ है जिससे पंजाब को कोई फायदा नहीं होने वाला है। एसआईआर को लेकर के वो लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और अपने यहां एसआईआर को वो ठीक बता रहे हैं। तो कुल मिलाकर के स्थिति ऐसी है और यह सारी चीजें इनसे 3 घंटे रोकने और ₹00 का फाइन लगाने से शायद पॉलिटिकल माइलेज नहीं मिलेगा।

Rss और कांग्रेस नेता फिर आमने -सामने   

विजय दशमी का सालाना कार्यक्रम  उसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संचालक का नागपुर में भाषण होता है। उसके अलावा पूरे देश में जहांजहां भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का के कार्यकर्ता प्रचारक और स्वयंसेवक हैं वो एक शोभा यात्रा निकालते हैं। ड्रम और परेड मार्ग जिसको बोलते हैं और उसको लेकर के हर जगह परमिशन लेकर के वह काम किया जाता है। अब क्योंकि जो गृह मंत्री हैं कर्नाटक के प्रियांक खडगे वो लगातार आरएसएस पर हमला कर रहे हैं,   उनके पिताजी मल्लिकार्जुन खड़गे वो भी हमलावर रहे हैं। तो अब 25 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने बेंगलुरु में विजय दशमी के प्रोसेशन के लिए परमिशन मांगी है। अब ये जो है क्या इसको स्वीकृति मिलेगी या नहीं मिलेगी इसको लेकर के संदेह इसलिए है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर के प्रियंक खडगे  ने पहले ही बोला था कि उनको अपने रजिस्ट्रेशन की बात बतानी होगी। उनको अपने फंड की बात बतानी हो। इसको लेकर के उन्होंने चिट्ठी लिखी थी और पब्लिक स्पेस पर आरएसएस की गतिविधियों को रोकने के लिए पहले से ही उन्होंने कह रखा है कि हम कोई भी कार्यक्रम आरएसएस का नहीं होने देंगे। उनको जो एक प्रिस्राइब्ड प्रोसीजर है उसको फॉलो करना पड़ेगा। पब्लिक में कोई कार्यक्रम आयोजित करने के लिए। अब यह जो मार्च है 9:00 बजे से लेकर के 12:00 बजे तक है जिसके लिए परमिशन मांगा है और यह मार्च जो है अपोलो नेशनल स्कूल ग्राउंड के गेट नंबर एक से शुरू हो के और श्रीनिवास रोड पर पाइपलाइन ब्रिज टीवीएस स्कूल रोड वहां तक जाने पास होता हुआ और अपोलो नेशनल स्कूल पर खत्म होगा। यह एक योजना है। अब इसमें निश्चित तौर पर होम मिनिस्ट्री को पुलिस को अपनी सहमति देनी है। इसलिए कि पुलिस का बंदोबस्त भी होना होता है इस मार्च के साथ-साथ। अब इस पर खडगे साहब ने कहा है कि जब तक पूरा जो प्रोसीजर है उसको फॉलो नहीं किया जाएगा तब तक इसकी अनुमति नहीं मिलेगी। अब वह प्रोसीजर क्या है , सरकार बताएगी और सरकार जो है वो है उसको लेकर के एक  चिट्ठी भी खड़गे साहब ने लिख दी है वो जो है वो जो बात उन्होंने कही जो चिट्ठी आई है जो ट्वीट कह लीजिए प्रियांक खड़गे का है वो इस तरह से है कि नॉट टू बी वेट ब्लैंकेट बट जेंटल रिमाइंडर मेयरली इनफॉर्मिंग और टेलिंग द डिपार्टमेंट टू कोपरेट और मेक नेसेसरी अरेंजमेंट इज नॉट सेम एज ऑब्टेनिंग परमिशन। अब वो उन्होंने एक चिट्ठी लिख के लंबा चौड़ा दिया है कि ये ये चाहिए होगा।

Karnata -दो congress के नेताओं के बीच अहम की लड़ाई चलती रहेगी क्या 

जो मसला डीके शिव कुमार और सीद्दारमैया के बीच में चल रहा था। अब उसने एक नया मोड़ ले लिया है।  हालांकि उसका जो प्रभाव है या उसका इंपैक्ट जो है केंद्र पर भी चलेगा। डीके शिवकुमार सरकार में एक भी महिला मंत्री को शामिल नहीं किया गया। अब इसको लेकर के सीद्दारमैया ने उनको अपने कैबिनेट में महिला मिनिस्टर को इंडक्ट करने की बात कही गई है। अब यह बड़ी महत्वपूर्ण बात इसलिए है कि एक तरफ जहां वुमेन रिजर्वेशन के लिए भारतीय जनता पार्टी की सरकार जो केंद्र में है वो बिल लाने की बात कर रही है और दूसरी तरफ कर्नाटक जैसे प्रदेश में कैबिनेट में एक भी महिला को रिप्रेजेंटेशन ना देना यह अपने आप में बड़ा आश्चर्य करने चकित करने वाली बात है। तो ये जो है इसको लेकर के एक तो ये मसला हो गया लेकिन इस के माध्यम से इसके सहारे सीद्दारमैया ने डी के शिव कुमार को टारगेट भी किया और यह बताने ये इससे स्पष्ट भी हो रहा है कि दोनों के बीच अभी भी जो है वो इस तरह के संबंध नहीं है और एक दूसरे को पिनप्रिक दोनों करते हुए नजर आ रहे हैं। विशेष रूप से सीद्दरमैया इस बात को वह शायद अब तक नहीं भुला पाए हैं कि उनको मुख्यमंत्री के पद से हटा दिया गया है और गाहे बगाहे जब भी मौका लगता है वो डी के शिवकुमार  की कार्य पद्धति को उनकी पॉलिसीज को उनके कार्यकलाप को टारगेट करते रहते हैं। अब ये भी है और ये बात निश्चित तौर पर केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचेगी। इसलिए कि लड़की हूं, लड़ सकती हूं की बात करने वाले, वुमेन एंपावरमेंट की बात करने वाले हैं। और इस पर पॉलिटिकल बहस भी होगी। इसलिए कि भारतीय जनता पार्टी जहां महिलाओं को आरक्षण दिलाने की बात कर रही है मतलब लेजिस्लेचर में लोकसभा विधानसभा इन सब जगहों पर उन परिस्थिति में कर्नाटक में मंत्रालय मंत्रिमंडल में उनको जगह ना मिलना निश्चित तौर पर एक प्रश्न चिन्ह लगाएगा जो बातें राहुल गांधी प्रियंका गांधी खडगे साहब यह सारे लोग करते तो यह जो कंफ्रेशन है दोनों नेताओं के बीच में यह चलता रहेगा। यह कांग्रेस की एक बड़ी समस्या है जो हर प्रदेश में देखने को मिल जाती है।