पंजाब जल रहा और मुख्यमंत्री पेरिस घूम रहे

पंजाब में चुनाव से पहले भगवंत मान ने  फ्रांस विजिट किया,   अब इस मामले में पहले ही सेंट्रल गवर्नमेंट ने रोक लगाई थी, लेकिन उसके बाद हाई कोर्ट के आदेश पर वो फ्रांस की विजिट कर रहे हैं। 17 तारीख से लेकर के 21 तारीख तक वो फ्रांस में है। लेकिन इस बीच पंजाब में जिस तरह से गड़बड़ियां हो रही हैं, किलिंग्स हो रही हैं। उसको लेकर के विपक्ष ने उन पर निशाना साधा है और यह कहा है कि वह अपने परिवार के साथ फ्रांस में अपना जन्मदिन सेलिब्रेट करने गए हैं। 17 तारीख शनिवार को जिस दिन वह पहुंचे हैं फ्रांस उस दिन उनका जन्मदिन था और उनके साथ उनकी पत्नी है और यह सारी बातें कही जा रही है उनके बारे में और यह एक सीरियस मसला है ना केवल इस दृष्टि से कि पंजाब में लगातार लॉ एंड ऑर्डर को लेकर के विवाद हो रहे हैं और लॉ एंड ऑर्डर की घटनाएं घटित हो रही हैं बल्कि इस दृष्टि से भी कि पंजाब जो है वो उसकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब है और अभी जिस तरह से बारिश और उसके बाद फसलें खराब हुई हैं। उसको लेकर के भी भगवंत मान की आलोचना हो रही है। अब जो लॉ एंड ऑर्डर का है फसल जो धान जो इकट्ठा हुआ था वो भीग गया है। वो मसला है। लेकिन अब जब चुनाव में 6 महीने से भी कम का समय रह गया है। तब क्या इन्वेस्टमेंट लाने गए हैं? यह भी एक बड़ा प्रश्न उनसे पूछा जा रहा है। अब यह सारी चीजें जो है वो हो रही हैं। तो निश्चित तौर पर चाहे वह शिरोमणि अकाली दल हो, चाहे वह कांग्रेस हो, चाहे वह भारतीय जनता पार्टी हो, वह लगातार भगवंत मान से प्रश्न कर रहे हैं और भगवंत मान के पास ना तो इसका कोई उनके पार्टी के लोगों के पास जवाब है ना भगवंत मान स्वयं के पास  इसका जवाब है और यह मामला जो है चुनाव में तो निश्चित उठेगा जब यह उनसे यह पूछा जाएगा। हालांकि वो जो है वो मार्क जो है पंजाब स्टेट कोऑपरेटिव सप्लाई एंड मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड उसके एक उसी संबंध में बेसिकली इन्वेस्टमेंट और इस तरह की चीजें हैं उसको लेकर के गए हुए हैं। लेकिन ये कुल मिलाकर के अभी  इन्वेस्टमेंट को लेकर के जाने वाली बात लोगों को पच नहीं रही है।

राहुल गांधी सिर्फ आरोप ही हैं कोई सबूत नहीं 

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी हैं वो प्रधानमंत्री पर लगातार हमलावर रहे हैं। लंबे समय से रहे हैं। चाहे वो संसद हो, संसद के बाहर हो और इसको लेकर के बहुत सारा उनके खिलाफ केस भी हुआ है। एक बार तो  उनकी सदस्यता भी गई थी जिसको सुप्रीम कोर्ट में बाद में बहाल किया गया। यह सारी चीज़ें हैं।  उसके बाद भी राहुल गांधी इन सब चीजों से बाज नहीं आ रहे हैं। और बाज आने की बात छोड़ दीजिए। वो यह कह रहे हैं कि उन पर इस मामले में कोई केस नहीं है। अब वो चुनाव के लिए  जिन पांच प्रदेशों में चुनाव होने हैं। उनमें गोवा भी एक प्रमुख वो है। मतलब गोवा भी एक स्टेट है। तो गोवा की अपनी यात्रा और एक वहां के कार्यक्रम में उन्होंने बोला कि जो केंद्र सरकार की एक्सपायरी डेट है वो नजदीक आ गई है और अब जो है मोदी शाह और इन सबको जाना पड़ेगा। इन दोनों पर टारगेट करते हुए चुनाव आयोग भी इस उनके निशाने पर है।  उसके बाद उन्होंने यह जो महत्वपूर्ण बात है वो यह कही कि उन पर जो है कोई भी  मामला है नहीं। जो डिफेमेशन वाला मामला है वो है  हीं। बोले कि क्योंकि सुप्रीम कोर्ट उन पर डिफेमेशन का केस हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने उसको स्टे कर दिया है। तो उनका दावा यह है कि कोई भी केस उनके खिलाफ है नहीं जिसमें उन्होंने मोदी को वोट चोर कहा है।  जो उनकी उनका जो ये एलगेशन है उन्होंने जो ये आरोप लगाया है मोदी पर सीईसी मुख्य चुनाव आयुक्त पर और अमित शाह पर या पूरे पूरे गवर्नमेंट पर वो जो सरकार अनिमितताएं कर रही है उसको जनता के सामने ले आएगा। हालांकि जो उन विपक्ष का जो सत्ता पक्ष का कहना है कि राहुल गांधी के सारे आरोप निराधार हैं। वह अपनी अपने अपने कोई भी आरोप को आज तक साबित नहीं कर पाए हैं। चाहे वो बात चुनाव आयोग ने कही हो। सरकार ने उनसे जब मांगा हो उनके पास अपने ही आरोपों के को सपोर्ट करने वाले जो जिसको बोलते हैं प्रमाण नहीं होते हैं और इसीलिए राहुल गांधी शायद अपने आ जो उनके आरोप है उनको अंजाम तक नहीं ले जा पाते हैं और इसीलिए उनको चुनावी फायदा नहीं होता है। अब यह तो  पांच प्रदेशों के चुनाव जो चुनाव होने वाले हैं उनसे पता लगेगा। लेकिन इन सब के बावजूद राहुल गांधी अपना आक्रामक रुख सरकार के खिलाफ बनाए हुए हैं और वो जहां जा रहे हैं वहां इस तरह की बात कर रहे हैं।

जगन मोहन रेड्डी  अब  मोदी से कुछ मिलने वाला नहीं तो बदल दिया स्टैंड

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी जो वाईएसआई वाईएसआर कांग्रेस के प्रमुख मुखिया भी हैं। वो एनडीए में ना होने के बावजूद भी एनडीए के लिए एक मजबूत स्तंभ हुआ करते थे और सपोर्ट करते थे बहुत सारे मामले में लेकिन अचानक उन्होंने भी सरकार के खिलाफ बिगुल बजाना शुरू कर दिया है और अभी जब सरकार सबसे ज्यादा मुश्किल दौर में है उस दौर में जगन मोहन रेड्डी ने ये कहा कि 2023 में जब मुख्य चुनाव आयुक्त और अदर इलेक्शन कमिश्नर के अपॉइंटमेंट कंडीशन और टर्न ऑफिस एक्ट जो है 2023 में पास हुआ था। उसको समर्थन करना उनकी एक बड़ी गलती थी। अब तीन साल बाद इस तरह की बात कहना उसके पीछे जो महत्वपूर्ण बात यह लग रही है कि जिस तरह से आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी की पार्टी हारी है और जिस तरह से चंद्रबाबू नायडू के साथ सरकार बहुत मजबूती की तरह चल रही है और वहां भी लगभग दो ढाई साल की सरकार होने के बावजूद सरकार के खिलाफ कोई कुछ जगन मोहन रेड्डी कर पाने की स्थिति में नहीं दिख रहे हैं।और सारे आरोप प्रत्यारोप या सारे उसके बाद भी टीडीपी जो है वो सरकार के साथ ना केवल बहुत मजबूती के साथ खड़ी है बल्कि हर तरह के समर्थन में नजर आ रही है। ये सारी बातें हुई और यह देख कर के ऐसा जगन मोहन रेड्डी को लग सकता है कि शायद अब उनको मोदी सरकार से या भारतीय जनता पार्टी से कोई ऐसा समर्थन या कुछ इस तरह की चीजें मिलने की संभावना नहीं है तो यह लड़ाई जो है उन्हें अपने स्तर पर ही लड़नी होगी और तब जाकर के वो टीडीपी को हटा पाएंगे। वो अगर भारतीय जनता पार्टी की या केंद्र सरकार के को समर्थन करते रहेंगे और टीडीपी का विरोध करते रहेंगे तो यह कंफ्यूजन जनता के समक्ष जाएगा और इसका चुनावी फायदा या पॉलिटिकल फायदा उनको नहीं होगा। तो उनको एक क्लियर कट स्ट्रेटजी अपनानी पड़ेगी और यह जो नई उनकी नया उनका बयान है वह उसी चीज को क्लेरिफाई करता हुआ दिख रहा है। अब आंध्र प्रदेश में जो है भाजपा मतलब एनडीए वहां पर बहुत मजबूती के साथ है। वहां पर पवन कल्याण भी उतना ही मजबूती के साथ हिंदुत्व का झंडा उठाए हुए हैं। तो आंध्र प्रदेश में अब संभावनाएं बहुत कम दिख रही हैं। ऊपर से जगन मोहन रेड्डी को  बहुत सॉफ्ट तरीके से जो वहां पर इवेंजलिस है या जो क्रिश्चियन कन्वर्जन करने वाले लोग हैं उनको बढ़ावा देने का भी आरोप है। तो ये भी एक बड़ा है। दूसरी तरफ हिंदुत्व वाली बात करने वाले लोग हैं। तो ये एक बड़ा मसला है जिसके कारण ऐसी स्थिति दिख रही है।