क्या देश की आर्थिक ग्रोथ पर हमला करने की हो रही साजिश

सारे राजनीतिक दल और सीजेपी प्रदर्शन को लेकर एक प्लेटफार्म पर नहीं नजर आ रहे हैं। सबके अपने-अपने कैलकुलेशंस हैं। सबके अपने-अपने प्रोटेस्ट के तरीके हैं। सबके अपने-अपने टारगेट्स हैं। लेकिन इन सब के बीच जो सबसे बड़ी चिंताजनक बात है वह यह कि फेस्टिव सीजंस आ रहे हैं। त्यौहार शुरू हो गए हैं। नवरात्र है। नवरात्र दशहरे के साथ खत्म होगा। दशहरे का सेलिब्रेशन भारत में बड़ा होता है। पूरे देश भर में होता है। और पॉकेट्स की अगर बात करें अगर हिमाचल में कुल्लू है। कर्नाटक में मैसूर का है। प्रयागराज का दशहरा है। और पूरे पश्चिम बंगाल में पूजा है। और यह त्यौहार के अलावा इकोनॉमिक एक्टिविटीज की गतिविधियां हैं , आर्थिक गतिविधियां उनका केंद्र है और ये जाएगा न्यू ईयर सेलिब्रेशनंस तक। मतलब पूरे दो महीने जो हैं वो काम के साथ-साथ त्यौहार और सेलिब्रेशन का टाइम है। और इसमें सारे लोग शामिल हैं। अगर क्रिसमस पड़ेगा तो क्रिश्चियन शामिल होंगे। दशहरा और बीच-बीच में बहुत सारे सेुलर फेस्टिवल्स हैं। दशहरे में सब लोग जाते हैं। दीपावली सब लोग सेलिब्रेट करते हैं। पूजा ना करे लेकिन अब इसके पीछे कारण क्या है? कहीं ऐसा तो नहीं जो इकोनॉमिक ग्रोथ भारत की है उसको रोकने की एक बड़ी साजिश है और यही वो समय है जब बहुत सारी जो खरीद फरोख्त है मतलब जिसको बोलते हैं वो इकोनमिक गतिविधियां बहुत तेजी से बढ़ती है और ये बात लगातार दिल्ली के और बहुत सारे और केंद्रों के व्यापारीइसलिए कि दिल्ली तो एक मार्केट हो सकती है लेकिन उसको सप्लाई जो है बहुत कुछ बाहर से आता है। तो क्या ये एक ऐसी साजिश है जो भारत की अर्थव्यवस्था को रोकने की अंतरराष्ट्रीय योजना है और उस योजना में भारत के कुछ लोग टूल जिनका कोई लेना देना नहीं है। चाहे वह अह सीजेपी मतलब चाहे वह मुख्य चुनाव आयुक्त हो या नीट वाले मामले में रहे हो। यह अव्यवस्था फैलाने का एक वो है। बड़ी जो जिसको बोलते हैं ज्यादातर लोगों का मानना यही है कि ये उसी तरह का किया गया उठाया गया कदम है।

 

यूपी का भूमिहर वोटर Congress से होगा मोह भंग क्या

अजय राय जो कांग्रेस अध्यक्ष थे। अब उनकी जगह प्रमोद तिवारी की सुपुत्री को मोना मिश्रा को अध्यक्ष बनाया गया है। अब वो पद ग्रहण करने पहुंची थी। तो वहां पर बवाल हो गया। बवाल क्या हो गया? कुछ लोगों ने जो पुराने अध्यक्ष हैं उनके साथ अभद्रता की गाली गलौज की भी बात आई जो सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हो रहा है कि अजय राय को गाली दी गई। अजय राय ब्राह्मण ही है। भूमिहार ब्राह्मण है। और अजय राय को जब से लोकसभा का टिकट बनारस से डिनाई किया गया था उसके बाद से वह बागी हो गए थे। लेकिन जिस तरह से अजय राय को अध्यक्ष पद से हटाया गया है और अजय राय के साथ अब दुर्व्यवहार किया गया है। उससे कहीं ऐसा ना हो कि भूमिहार वोटर जो है एक बार फिर बीजेपी की तरफ चला जाए और वो बहुत भूमिहार वोटर के साथ वो है तो डेढ़ से 2.5% के बीच उत्तर प्रदेश में वो वो बहुत प्रभावी मतदाता होता है। के साथ बहुत बड़ा वर्ग जिसको बोलते हैं अटैच रहता है। तो यह एक महत्वपूर्ण बात है। दूसरी बात यह है कि कांग्रेस अपने पार्टी को कंटेन नहीं कर पा रही है। वहां पर लड़ाई जब दो विधायक हैं तब है तो आगे और क्या होगा?