BJP —- यूपी में अखिलेश से निपटने के लिए बनाई गजब रणनीति

अभी हाल ही में योगी कैबिनेट में विस्तार हुआ और साफ लगा कि बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनावों को देखते हुए यह विस्तार किया है क्योंकि इसमें जातियों पर पूरा ध्यान दिया गया और योगी मंत्रिमंडल के विस्तार में ओबीसी और दलित वर्ग को सबसे ज्यादा मंत्री पद दिए गए, माना यही जा रहा है कि यह अखिलेश यादव के पीडीए मंत्र को काउंटर करने की रणनीती थी पर अब चर्चाओं का बाजार गर्म है कि चुनाव को देखते हुए अगले बीजेपी प्रदेश संगठन में जबरदस्त बदलाव करने वाली है और खास बात जिसकी चर्चा है कि इसबार जातियों को किनारे पर रखकर अनुभवी नेताओं को आगे बढाया जाएगा और संगठनात्मक अनुभव को प्राथमिकता दी जाएगी। दरअसल 2024 के लोकसभा चुनाव रिजल्ट से सबक लेकर बीजेपी ने यह कदम उठाया है क्योंकि उस समय बीजेपी के ढांचे में अंदर ही अंदर कुछ हद तक ढिलाई बरती गई और इसका फायदा विपक्षी दलों ने उठाया और वो दलितों, गैर-यादव ओबीसी और मुसलमान वर्ग को बड़े ही प्रभावी ढंग से अपने साथ जोड़ने में कामयाब रही जिससे बीजेपी को मुंह की खानी पडी थी। पता चला है कि बीजेपी इस बार वो गलती नहीं दोहराना चाहती है और पार्टी नेता खुलकर बोल रहे हैं कि नए प्रदेश संगठन में कम से कम 60 फीसदी पदाधिकारी, चाहे वे किसी भी जाति के हों, मुख्य रूप से वे लोग होंगे जो लंबे समय से पार्टी से जुड़े रहे हैं और जिनके पास संगठनात्मक काम करने का अच्छा अनुभव है। और माना जा रहा है कि हाल ही में सीएम योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल विस्तार के फॉर्मूले से बीजेपी का यह कदम बिल्कुल अलग है बीजेपी दोनों ही तरह से अपने को मजबूत करके चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। जिससे इस बार कोई सीट हाथ से ना जा सके।

नीतीश ने सोच लिया करेंगे इस नेता का इलाज Homeopaty तरीके से

हाल ही में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री के बहुत पुराने साथी रहे आनंद मोहन ने जमकर jdu पर भड़ास निकाली और कहा कि अब यहां थैलियों की बात समझी जाती है, अब आप समझ ही गए होंगे कि आनंद मोहन लेनदेन की बात कर रहे थे, यही नहीं उन्होंने यह तक कह दिया कि नीतीश कुमार को जिंदा दफन कर दिया गया, अब उन्होंने शायद यह बात नीतीश को सहानुभूति में कही पर पता चला है कि खुद नीतीश आनंद मोहन के इस वय्वहार से काफी नाराज हैं और माना जा रहा है कि अब वो आनंद मोहन का इलाज भी होम्योपैथी तरीके से करने की सोच रहे हैं, मतलब धीरे-धीरे आनंद मोहन का राजनीति करियर खत्म करने की, वैसे आपको बता दें कि नीतीश कुमार के बारे में यह मशहूर है कि वो अपने खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को ना डांटते हैं, न नाराजगी जाहिर करते हैं, बस उनका ‘होम्योपैथी’ इलाज शुरू कर देते हैं और कब वो आदमी राजनीती से गायब हो जाता है पता भी नहीं चलता , नीतिश की होमयोपैथी का शिकार हुए नेताओं की एक पूरी लिस्ट है, जैसे कि सतीश कुमार , माना जाता है कि नीतीश को इस मुकाम पर पहुंचाने वाले लालू प्रसाद के बाद सतीश कुमार थे। लेकिन एक समय ऐसा आ गया कि सतीश कुमार इधर-उधर डोलते रहे, पर कभी सक्रिय राजनीति में नहीं आ पाए, फिरएक वक्त था जब वृशिण पटेल नीतीश कुमार के दाहिने हाथ थे। शिक्षा मंत्री थे। पर किसी बात से नीतीश कुमार से बिगड़ी तो वे लालू यादव के साथ चले गए पर निरंतर गिरते ही चले गए और राजनीतिक में कभी नहीं उठे, इसी प्रकार आरसीपी सिंह तो बहुत जाना माना नाम है, IAS अधिकारी आर सी पी सिंह कई वर्षों तक नीतीश कुमार के साथ रहे, तमाम विभाग में बतौर ऑफिशियल पदाधिकारी रहे। पर जब नीतीश से बात बिगड़ी तो ऐसी बिगड़ गई कि आज अकेले बैठे हैं, गए। ये लिस्ट काफी लंबी है और अब इसमें आनंद मोहन का नाम जुडने की चर्चाएं जोरों पर हैं, नीतीश कुमार की मेहरबानी से आनंद मोहन जेल तक से बाहर आए और राजनीतिक लाभ भी उठाए। पर अब वो नीतीश की नजरों में उतर गए बताए जाते हैं

 

UP चुनाव क्या राहुल गांधी ने हराने के लिए कमर कस ली है

 

सबको पता है कि यूपी में 2027 में विधानसभा चुनाव हैं और यह भी सबको पता है कि यहां से कांग्रेस लगभग गायब हो चुकी है और जो कुछ सीटे लेकर भी आ रही है उसके पीछे भी समाजवादी पार्टी का पूरा सपोर्ट है, अब चुनाव सिर पर हैं और बीजेपी से लेकर समाजवादी पार्टी अपने अपने ढंग से लोगों को लुभाने का काम जोरों से कर रही है, बीच बीच में वाद विवाद , तीखे हमले भी एक दूसरे पर हो जाते हैं, पर लगता है राहुल गांधी को कोई उल्टी पट्टी पढ़ा रहा है कि जितना मोदी को कोसोगे उतना ही यूपी में दोबारा पांव जमाने का मौका मिलेगा और फिर समाजवादी पार्टी का पिछल्ग्गू बनने की जरूरत नहीं रहेगी , शायद यही कारण है कि राहुल गांधी ने सारी मर्यादा तोड़ते हुए मोदी के साथ अमित शाह को भी लपेट लिया और दोनों के लिए रायबरेली की एक सभा में गद्दार शब्द का इस्तेमाल किया। वैसे राहुल यह बात हमेशा भूल जाते हैं कि जब जब वो मोदी को कोसते हैं, उन्हें गाली देते हैं कांग्रेस का ग्राफ और नीचे गिर जाता है, पिछले सारे चुनाव इसका जीता जागता उदारहण है, पर राहुल तो राहुल है और लगता है कि इस बार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी यूपी में भी कांग्रेस की लुटिया पूरी तरह से डूबने के लिए कमर कस बैठे हैं।

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