By Arati Jain
आपका भाग्य कितना आपको साथ देगा सब पता चलता कुंडली से
आठ घरों की यात्रा हम पूरी कर चुके हैं। अब हम नौवें घर पे आते हैं, आप सुन के खुश हो जाएंगे क्योंकि यह आपके भाग्य का घर है। हर कोई कहता है यह भाग्यवान है। यह भाग्यवान नहीं है। मेरी तो किस्मत ही खराब है। इसकी किस्मत तो बहुत अच्छी है। इसको तो बैठे-बैठे सब कुछ मिल जाता है। मेरे को तो इतना काम करना पड़ता है कि मुझको तब भी
इतना नहीं मिलता जितना मेरे को मिलना चाहिए। तो ये सब चीजें हमको नौवां घर दिखाता है। नौवें घर में आपका ग्रह कौन सा है? किस ग्रह की दृष्टि है? कौन सा नक्षत्र है? कौन सा बुरा ग्रह उसके ऊपर उसका बुरा प्रभाव दे रहा है? इन सब चीजों को देख के ही हम नौवें घर को देखेंगे
कर्म अच्छे करेंगे तो भाग्य दिन दुगनी रात चौगनी से तरक्की देगा
भाग्य को बढ़ाने के लिए आपको थोड़ा बहुत कर्म तो करना ही पड़ेगा। बिना कर्म करे तो कुछ भी नहीं मिलेगा। आपके सामने थाली रखी हुई है पर थाली में हाथ बढ़ा के मुंह में उसको रोटी का टुकड़ा डालना ही पड़ेगा और उसको चबाना ही पड़ेगा। भले ही थाली आपको कोई भी दे दे आपके परिश्रम की ना हो पर थोड़ा सा परिश्रम तो आपको करना ही पड़ेगा कि आपको खाना खुद ही खाना पड़ेगा और हां अगर आप कहें जी नहीं भाग्यवान आदमी को तो कुछ काम करने की जरूरत ही नहीं होती फिर तो वो बिस्तर पे ही रहता है। पाइप से उसके फूट जा रहा है। पाइप से ही सारा काम हो रहा है और वो आराम से लेटा हुआ है। तो ऐसा भाग्य भी कोई भाग्य होता है। तो इसलिए भाग्य को अगर अच्छा करना है तो आपको थोड़ा सा अपने कर्मों पे भी ध्यान देना पड़ेगा। हां यह है अगर आप कर्म अच्छे करेंगे तो आपका भाग्य और दिन दुगनी रात चौगनी तेजी से बढ़ेगा। पर अगर आपके कर्मों में जरा सा भी खराब होंगे तो आपका भाग्य भी खराब होना शुरू हो जाएगा।
विदेश जाने का कितना योग पता चल जाता है यदि कुंडली में यह घर देखेंगे
नौवां घर आपके पिता का भी होता है। अगर आप पिता का मान नहीं रखते, पिता का सम्मान नहीं करते तो भी नौवा घर हमारे भाग्य को असर डालता है और हमारा भाग्य खराब होता है। ऐसे ही गुरु जी हां, गुरु का सम्मान भी नौवें घर से ही देखा जाता है। कई बारी क्या होता है? आपका भाग्य बहुत अच्छा है। पर आप अपने गुरु को उतना मान नहीं दे पाते जितना मान उसको देना चाहिए। तब भी आप अपना भाग्य खराब कर लेंगे। फिर नौवां घर आपका हायर एजुकेशन को भी दिखाता है। जैसे पीएचडी करनी है आपको। आगे कोई बहुत बड़ी डिग्री लेनी है, डिलीट करना है, ऐसी कोई बड़ी डिग्री वह भी नौवें घर से ही देखी जाती है। नौवा घर अच्छा है, तो आप हायर एजुकेशन ले सकते हैं। अपनी जो पढ़ाई की यात्रा है, वह बिना विघ्न बाधाओं के पूरी कर सकते हैं। साथ ही साथ दूर जोदेश की जर्नी है, लंबी यात्रा है, हवाई यात्रा है, वह भी हम नौवें से ही देखी जाती है। कई बार यह क्या होता है? आपके पास बहुत पैसा है, सब कुछ है पर आप हवाई जहाज से यात्रा नहीं कर पाते। आपको बहुत ही विघ्न बाधाएं आती हैं। पर कोई आदमी ऐसा होता है कि कुछ भी नहीं है तब भी आपको वो अपनी कंपनी की तरफ से विदेश यात्रा कर रहा है। हवाई जहाज की यात्रा कर रहा है। तो वो उसके नौवें घर का ही असर होता है।
40 साल के बाद भाग्य नहीं कर्मों का लेखाजोखा आपको मिलता है
अपने इस घर को ठीक करने के लिए अपने ही कर्मों पर ध्यान देना पड़ेगा। अपने गुरुओं का मान सम्मान करिए। पिता तुल्य जो भी कोई आदमी आता है उसकी रिस्पेक्ट करिए। अगर पिता से नहीं बनती तो थोड़ी दूरी बना के रखिए। पर उसकी अवहेलना मत करिए। उसको निरादर मत करिए अपने पिता का। ऐसे ही कुछ जतन प्रतन करिए और कभी भी किसी भी बड़े आदमी का जो हम कहते हैं ना कि श्राप ना लें या उसके मुंह से अपने लिए बद्दुआएं ना लें इससे भी आपके भाग्य पे असर पड़ता है। भाग्य का जो हमारा होता है वो हमारे पिछले जन्मों से ही हमको मिलता है। जो कि आपको 50 साल तक की उम्र ही तक ही मिलेगा। जी हां, अगर आप 40 के हो गए हैं, 50 के हो गए हैं और उसके बाद आप कहते हैं अब तो मेरा भाग्य काम ही नहीं करता। अब तो मैं जो भी काम करता हूं, उसमें मेरे को अड़चनें आती हैं। पहले तो मुझको बैठे-बैठे सब कुछ मिल जाता था। तो वह इसलिए होता है क्योंकि 40 के बाद 50 के बाद आपके कर्मों का लेखाजोखा आपके जीवन में जुड़ता है और जैसे आप कर्म करते हैं उसके हिसाब से आपका भाग्य बन जाता है। तो इसलिए ध्यान रखिए अगर आपका भाग्य अच्छा है तो अपने कर्म अच्छे रखिए और अपने भाग्य को और भी अच्छा करिए और अगर भाग्य अच्छा नहीं है तब तो आपको कर्म अच्छे करने ही पड़ेंगे। यह आप चाहे कह ले मजबूरी कह लिए चाहे एक एक जैसे होता है ना कि आपको जिंदगी में कुछ पाना है तो उसके लिए आपको हर चीज का ध्यान रखना पड़ेगा और अपने आप अपने भाग्य को बढ़ाने के लिए आपको जतन प्रतन करने ही पड़ेंगे और इसके लिए विभिन्न राशियों की अलग-अलग चीजें होती हैं जिससे हम अपने भाग्य को बढ़ा सकते हैं।
बाहर निकलें पर तो दीपक जला के निकलें, पानी पीकर निकलें
जैसे कभी आप बाहर निकलें पर तो दीपक जला के निकलें, पानी पीकर निकलें। पर यह सब चीजें आपकी कुंडली को देख के ही बताई जा सकती हैं। बिना कुंडली को देखे हम इस चीज के बारे में आपको नहीं बता सकते। क्योंकि अगर आपके भाग्य के घर में ऐसा है कि आपको दीपक जला के निकलना है पर आप पानी पी के निकल जाते हैं तो आग और पानी तो दोनों अपोजिट है तो आपको आपके भाग्य का पूरा असर नहीं मिलेगा। तो इसके लिए अगर आपको भाग्य को जगाना है तो थोड़ा सा ध्यान अपनी कुंडली पे भी दीजिए। नौवें घर को देखिए और ध्यान रखिए कि आपका भाग्य कैसे जगेगा
